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शांति व मुक्ति से भी बढ़कर है भक्ति: श्रीकृष्णचंद्र
Updated Tue, 19 Jun 2018 11:48 PM IST
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शांति व मुक्ति से भी बढ़कर है भक्ति : श्रीकृष्ण चंद्र
अयोध्या। रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिरामदास छावनी के श्रीमहंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज के 80वें जन्मोत्सव पर संचालित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भक्तों के श्रद्धाकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रतिदिन 108 वैदिक पंडितों द्वारा सुबह 8 बजे से श्रीरामचरित मानस पाठ का स्वर गूंज रहा है। सांयकाल भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए श्रीकृष्णचंद्र शास्त्री ने कहा कि शांति, मुक्ति से भी बढ़कर भक्ति है। भक्त वह बनता है जो जीवन की मुक्ति को ठुकरा देता है। भक्त वह है जो केवल भगवान को अपना मान लेता है। भक्ति के तीन रूप हैं प्रभु में विश्वास, प्रभु से संबंध व प्रभु के प्रति समर्पण। जो सुख भक्ति में हैं वह कहीं अन्यत्र नहीं।
व्यास जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत में भक्ति, ज्ञान वैराग्य, निष्काम कार्य का अद्भुत समन्वय है। संसार शाश्वत नहीं है, इसका परिज्ञान है वैराग्य है। परमात्मा के स्वरूप का अनुभव और अपनी खोज को सही रूप में जानना है ज्ञान है। जो भी कर्म सतकर्म करें उसके फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए, कर्म के अनुसार फल मिलना निश्चित है। व्यास जी कहते हैं कि स्वर्ग का सुख भी सर्वदा रहने वाला नहीं है अंत में वह भी दुखदायी हो जाता है। इससे पूर्व संतों-भक्तों द्वारा व्यास पीठ एवं श्रीमहंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज का पूजन-अर्चन किया गया। मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास द्वारा मंचस्थ संतों-महंतों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर बजरंग दास, महंत कन्हैयादास रामायणी, महंत सीतारामदास त्यागी, महंत राममंगल दास रामायणी, पुनीत रामदास, कृपालु पुनीतरामदास पंजाबी बाबा, महंत महेंद्र दास, विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा, संत आनंद शास्त्री सहित विभिन्न प्रांतों से आए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
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अयोध्या। रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष व मणिरामदास छावनी के श्रीमहंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज के 80वें जन्मोत्सव पर संचालित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भक्तों के श्रद्धाकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रतिदिन 108 वैदिक पंडितों द्वारा सुबह 8 बजे से श्रीरामचरित मानस पाठ का स्वर गूंज रहा है। सांयकाल भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए श्रीकृष्णचंद्र शास्त्री ने कहा कि शांति, मुक्ति से भी बढ़कर भक्ति है। भक्त वह बनता है जो जीवन की मुक्ति को ठुकरा देता है। भक्त वह है जो केवल भगवान को अपना मान लेता है। भक्ति के तीन रूप हैं प्रभु में विश्वास, प्रभु से संबंध व प्रभु के प्रति समर्पण। जो सुख भक्ति में हैं वह कहीं अन्यत्र नहीं।
व्यास जी कहते हैं कि श्रीमद्भागवत में भक्ति, ज्ञान वैराग्य, निष्काम कार्य का अद्भुत समन्वय है। संसार शाश्वत नहीं है, इसका परिज्ञान है वैराग्य है। परमात्मा के स्वरूप का अनुभव और अपनी खोज को सही रूप में जानना है ज्ञान है। जो भी कर्म सतकर्म करें उसके फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए, कर्म के अनुसार फल मिलना निश्चित है। व्यास जी कहते हैं कि स्वर्ग का सुख भी सर्वदा रहने वाला नहीं है अंत में वह भी दुखदायी हो जाता है। इससे पूर्व संतों-भक्तों द्वारा व्यास पीठ एवं श्रीमहंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज का पूजन-अर्चन किया गया। मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास द्वारा मंचस्थ संतों-महंतों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर बजरंग दास, महंत कन्हैयादास रामायणी, महंत सीतारामदास त्यागी, महंत राममंगल दास रामायणी, पुनीत रामदास, कृपालु पुनीतरामदास पंजाबी बाबा, महंत महेंद्र दास, विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा, संत आनंद शास्त्री सहित विभिन्न प्रांतों से आए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
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