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कच्चे दूध के सेवन से हो सकता बुखार: डॉ उपेंद्र मणि
Updated Thu, 14 Sep 2017 01:03 AM IST
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स्वास्थ्य व होम्योपैथी जागरूकता अभियान में दी जानकारी
फैजाबाद। आप कच्चे दूध का सेवन करते हैं तो सावधान रहें। इसके संक्रमण से शरीर दर्द के साथ बुखार हो सकता है। ये जानकारी स्वास्थ्य व होम्योपैथी जागरूकता अभियान के तहत बुधवार को एचएमए के महासचिव डॉ. उपेंद्र मणि त्रिपाठी ने दी।
डॉ. उपेंद्र ने बताया कि, इस समय फ्लू जैसे लक्षणों के साथ शुरुआती बुखार व शरीर में दर्द के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। ये मौसम परिवर्तन के कारण भी हो सकता है। मगर ब्रूसेलोसिस की वापसी के संकेत भी मिल रहे हैं। जिसे जानने की आम लोगों में जिज्ञासा है।
डॉ. उपेंद्र ने बताया माल्टा द्वीप में सर्वप्रथम बकरी के दूध में एक ग्राम निगेटिव माइक्रोकॉकस मेलिटेनसिस जीवाणु की खोज डेविड ब्रूस ने की थी, जिससे संक्रमित दूध पीने पर इंसान बुखार की चपेट में आ जाता है। ऐसे में इस बैक्टीरिया को ब्रूसेला और रोग को ब्रूसेलोसिस या माल्टा फीवर भी कहते हैं।
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ये बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि दुधारू जानवरों में पाया जाता है। जिसका संक्रमण स्पर्श, सांस, वायु, घाव, रक्त, दूध व अन्य कच्चे डेयरी उत्पाद आदि से मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है। ये बुखार लंबे समय तक भी रह सकता है। ब्रूसेलोसिस किसी भी अंग या अंग प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
समय पर उचित इलाज नहीं होने पर तो ये जटिल रोग बन जाता है और व्यक्ति को गठिया, स्पॉन्डिलाइटिस, नपुंसकता, अवसाद आदि तमाम तरह की समस्याएं हो सकती है। पीड़ित व्यक्ति को कच्चा, बिना पाश्चुरीकृत या बकरी का दूध नहीं देना चाहिए। खुले में मल-मूत्र त्याग नहीं करना चाहिए।
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फैजाबाद। आप कच्चे दूध का सेवन करते हैं तो सावधान रहें। इसके संक्रमण से शरीर दर्द के साथ बुखार हो सकता है। ये जानकारी स्वास्थ्य व होम्योपैथी जागरूकता अभियान के तहत बुधवार को एचएमए के महासचिव डॉ. उपेंद्र मणि त्रिपाठी ने दी।
डॉ. उपेंद्र ने बताया कि, इस समय फ्लू जैसे लक्षणों के साथ शुरुआती बुखार व शरीर में दर्द के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। ये मौसम परिवर्तन के कारण भी हो सकता है। मगर ब्रूसेलोसिस की वापसी के संकेत भी मिल रहे हैं। जिसे जानने की आम लोगों में जिज्ञासा है।
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डॉ. उपेंद्र ने बताया माल्टा द्वीप में सर्वप्रथम बकरी के दूध में एक ग्राम निगेटिव माइक्रोकॉकस मेलिटेनसिस जीवाणु की खोज डेविड ब्रूस ने की थी, जिससे संक्रमित दूध पीने पर इंसान बुखार की चपेट में आ जाता है। ऐसे में इस बैक्टीरिया को ब्रूसेला और रोग को ब्रूसेलोसिस या माल्टा फीवर भी कहते हैं।
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ये बकरी, भेड़, ऊंटनी आदि दुधारू जानवरों में पाया जाता है। जिसका संक्रमण स्पर्श, सांस, वायु, घाव, रक्त, दूध व अन्य कच्चे डेयरी उत्पाद आदि से मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है। ये बुखार लंबे समय तक भी रह सकता है। ब्रूसेलोसिस किसी भी अंग या अंग प्रणाली को प्रभावित कर सकता है।
समय पर उचित इलाज नहीं होने पर तो ये जटिल रोग बन जाता है और व्यक्ति को गठिया, स्पॉन्डिलाइटिस, नपुंसकता, अवसाद आदि तमाम तरह की समस्याएं हो सकती है। पीड़ित व्यक्ति को कच्चा, बिना पाश्चुरीकृत या बकरी का दूध नहीं देना चाहिए। खुले में मल-मूत्र त्याग नहीं करना चाहिए।