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संगीतमयी प्रस्तुति से भगवान राम को निवेदित की श्रद्धा
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संगीतमयी प्रस्तुति से भगवान राम को निवेदित की श्रद्धा
अयोध्या। चैत्र रावनवमी के उपलक्ष्य में अयोध्या के श्रीकालेराम मंदिर में महाराष्ट्र मंडल कानपुर द्वारा ‘राम उसी ने पाया’ कार्यक्रम के तहत मंगलवार को भगवान श्रीराम से जुड़े भजनों की श्रृंखला पेश की गई।
इसमें जयपुर संगीत घराने की प्रख्यात गायिका शुभदा मराठे व वरिष्ठ भक्ति संगीत गायक संजय तरानेकर ने भजनों की प्रस्तुति दी तो श्रोता भाव विह्वल हो उठे। कार्यक्रम की सूत्रधार छाया तरानेकर थीं। इस दौरान राम लक्ष्मण जानकी, जय बोले हनुमानजी का उद्घोष भी खूब हुआ।
अयोध्या के प्राचीन श्रीकालेराम मंदिर में मंगलवार की शाम सजी भजन संध्या में भगवान श्रीराम से जुड़े भजनों ने ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शाम करीब 4 बजे से 5 बजे तक चले इस कार्यक्रम में जयपुर संगीत घराने की प्रख्यात गायिका शुभदा मराठे व वरिष्ठ भक्ति संगीत गायक संजय तरानेकर ने भजनों की प्रस्तुति दी।
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बताते चले कि शुभदा मराठे शास्त्रीय संगीत की साधिका होने के साथ आध्यात्मिक साहित्य की अभ्यासिका भी हैं। उन्होंने कई ग्रंथों के अनुवाद भी किए हैं, इसमें आद्य गुरु श्रीपाद श्रीवल्लभ स्वामी का गहन अध्ययन व उस पर आधारित ग्रंथ अनुवाद शामिल है।
वह मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के कुछ पिछड़े क्षेत्रों में आदिवासी कल्याण से संबंधित एक संस्था में सक्रिय हैं। वहीं छाया तरानेकर स्वयं विज्ञान विषय से स्नातकोत्तर पदवी से विभूषित हैं, साथ ही दत्त संप्रदाय के संवाहक नाना महराज के संस्थान के कार्य में सक्रिय हैं।
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अयोध्या। चैत्र रावनवमी के उपलक्ष्य में अयोध्या के श्रीकालेराम मंदिर में महाराष्ट्र मंडल कानपुर द्वारा ‘राम उसी ने पाया’ कार्यक्रम के तहत मंगलवार को भगवान श्रीराम से जुड़े भजनों की श्रृंखला पेश की गई।
इसमें जयपुर संगीत घराने की प्रख्यात गायिका शुभदा मराठे व वरिष्ठ भक्ति संगीत गायक संजय तरानेकर ने भजनों की प्रस्तुति दी तो श्रोता भाव विह्वल हो उठे। कार्यक्रम की सूत्रधार छाया तरानेकर थीं। इस दौरान राम लक्ष्मण जानकी, जय बोले हनुमानजी का उद्घोष भी खूब हुआ।
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अयोध्या के प्राचीन श्रीकालेराम मंदिर में मंगलवार की शाम सजी भजन संध्या में भगवान श्रीराम से जुड़े भजनों ने ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शाम करीब 4 बजे से 5 बजे तक चले इस कार्यक्रम में जयपुर संगीत घराने की प्रख्यात गायिका शुभदा मराठे व वरिष्ठ भक्ति संगीत गायक संजय तरानेकर ने भजनों की प्रस्तुति दी।
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बताते चले कि शुभदा मराठे शास्त्रीय संगीत की साधिका होने के साथ आध्यात्मिक साहित्य की अभ्यासिका भी हैं। उन्होंने कई ग्रंथों के अनुवाद भी किए हैं, इसमें आद्य गुरु श्रीपाद श्रीवल्लभ स्वामी का गहन अध्ययन व उस पर आधारित ग्रंथ अनुवाद शामिल है।
वह मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र के कुछ पिछड़े क्षेत्रों में आदिवासी कल्याण से संबंधित एक संस्था में सक्रिय हैं। वहीं छाया तरानेकर स्वयं विज्ञान विषय से स्नातकोत्तर पदवी से विभूषित हैं, साथ ही दत्त संप्रदाय के संवाहक नाना महराज के संस्थान के कार्य में सक्रिय हैं।