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भव्यता की बानगी बनी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:48 PM IST
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अयोध्या। जगन्नाथपुरी की तर्ज पर अयोध्या में भी शनिवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। भगवान जगन्नाथ अयोध्या में भ्रमण को निकले तो उनके दर्शन के लिए भक्त उमड़ पड़े। अयोध्या के करीब एक दर्जन मंदिरों से निकली रथयात्रा का जगह-जगह भक्तों द्वारा पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। रथयात्रा में विभिन्न प्रांतों से आए भक्तों के अलावा साधु-संतों ने भी शिरकत की।
अधिग्रहीत परिसर से सटे जगन्नाथ मंदिर से परंपरागत ढंग से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा आकर्षण का केंद्र बनी। उड़ीसा से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बुंदेलखंडी नृत्य भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा। महंत राघवदास ने बताया कि मंदिर में सुबह भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर सायंकाल भगवान जगन्नाथ को दिव्य रथ पर विराजमान कर यात्रा निकाली गई। सायंकाल रथयात्रा वापस आने पर भगवान को स्नान कराकर, श्रृंगार व पूजन कर दिव्य झांकी सजाई गई। मंदिरों से निकली रथयात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। हरिधाम गोपाल मंदिर के सामने ज.गु. रामदिनेशाचार्य जी महाराज द्वारा पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत सत्कार किया गया।
बिंदु संप्रदाय की आचार्य पीठ दशरथ महल बड़ास्थान से शाम पांच बजे बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंदप्रसादाचार्य की अगुवाई में धनुषधारी भगवान के विग्रह की भव्य शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। इससे पूर्व धनुषधारी भगवान का विधिवत श्रृंगार, पूजन कर आरती उतारी गई। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गायकों-वादकों ने भजन आदि प्रस्तुत किए। महंत देवेंदप्रसादाचार्य ने इस अवसर पर भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ विभिन्न धर्मों, मतों और विश्वासों का अद्भुत समन्वय हैं। इसी प्रकार मणिरामदास की छावनी से श्रीमहंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में बाजे-गाजे के साथ निकली भव्यता की मिशाल बनी। यात्रा से पूर्व महंत नृत्यगोपाल दास ने संबोधन में कहा कि भगवान हर युग में भक्तों को दर्शन देने के लिए प्रकट होते हैं। यात्रा में कृपालु रामदास, पंजाबी बाबा, पुनीत रामदास, कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री, महंत रामगोपाल दास, विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा आदि शामिल रहे। उधर, कनकभवन, चार धाममंदिर, रामकचहरी धाम सहित अन्य मंदिरों से भी निकली जगन्नाथ यात्रा भक्तों के आकर्षण का केंद्र रही।
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अधिग्रहीत परिसर से सटे जगन्नाथ मंदिर से परंपरागत ढंग से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी निकली भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा आकर्षण का केंद्र बनी। उड़ीसा से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बुंदेलखंडी नृत्य भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा। महंत राघवदास ने बताया कि मंदिर में सुबह भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर सायंकाल भगवान जगन्नाथ को दिव्य रथ पर विराजमान कर यात्रा निकाली गई। सायंकाल रथयात्रा वापस आने पर भगवान को स्नान कराकर, श्रृंगार व पूजन कर दिव्य झांकी सजाई गई। मंदिरों से निकली रथयात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। हरिधाम गोपाल मंदिर के सामने ज.गु. रामदिनेशाचार्य जी महाराज द्वारा पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत सत्कार किया गया।
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बिंदु संप्रदाय की आचार्य पीठ दशरथ महल बड़ास्थान से शाम पांच बजे बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंदप्रसादाचार्य की अगुवाई में धनुषधारी भगवान के विग्रह की भव्य शोभायात्रा गाजे-बाजे के साथ निकाली गई। इससे पूर्व धनुषधारी भगवान का विधिवत श्रृंगार, पूजन कर आरती उतारी गई। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गायकों-वादकों ने भजन आदि प्रस्तुत किए। महंत देवेंदप्रसादाचार्य ने इस अवसर पर भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ विभिन्न धर्मों, मतों और विश्वासों का अद्भुत समन्वय हैं। इसी प्रकार मणिरामदास की छावनी से श्रीमहंत नृत्यगोपालदास की अध्यक्षता में बाजे-गाजे के साथ निकली भव्यता की मिशाल बनी। यात्रा से पूर्व महंत नृत्यगोपाल दास ने संबोधन में कहा कि भगवान हर युग में भक्तों को दर्शन देने के लिए प्रकट होते हैं। यात्रा में कृपालु रामदास, पंजाबी बाबा, पुनीत रामदास, कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री, महंत रामगोपाल दास, विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा आदि शामिल रहे। उधर, कनकभवन, चार धाममंदिर, रामकचहरी धाम सहित अन्य मंदिरों से भी निकली जगन्नाथ यात्रा भक्तों के आकर्षण का केंद्र रही।
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