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सुनवाई टलने पर संत-धर्माचार्य नाराज, कहा टूट रहा धैर्य
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सुनवाई टलने पर संत-धर्माचार्य नाराज, कहा टूट रहा धैर्य
अयोध्या। रामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई एक बार फिर टलने से रामनगरी के संत-धर्माचार्य नाराज हैं। उधर मुस्लिम पक्षकारों ने कहा है कि कोर्ट की प्रक्रिया में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगी वही मानेंगे। जबकि हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने मंदिर मामले की सुनवाई के लिए नई पीठ बनाने की मांग उठाई है। संतों ने स्पष्ट किया है कि अब न्यायिक प्रक्रिया को लटकाना नहीं चाहिए, संतों का कहना है कि अब धैर्य जबाब दे रहा है।
हिंदू समाज के आंदोलित होने की पटकथा तैयार की जा रही है। रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में ज्यादा विलंब नहीं होना चाहिए। याची को तुरंत न्याय मिलना चाहिए विलंब होने से भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
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आशा है कि वर्तमान सरकार रहते ही राममंदिर मामले का समाधान हो जाएगा। हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट मामले में अरुचि दिखा रहा है।
मैंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित अन्य को पत्र लिखकर यह मांग किया है कि राममंदिर मामले के लिए एक नई पीठ बनाकर शीघ्र मामले का निस्तारण किया जाए।
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती का कहना है कि कांग्रेस के इशारे पर जज मुकदमा टालना चाहते हैं। हमारा राष्ट्रपति से निवेदन है कि वह अपने अधिकार का प्रयोग कर दो महीने में अयोध्या मामले का निस्तारण कराएं।
प्रधानमंत्री मोदी मंदिर निर्माण के लिए प्रयासरत हैं। वे भी निर्णय का इंतजार कर रहे हैं क्यों कि निर्णय आने से पूर्व अध्यादेश लाना उचित नही होगा। कहा कि मामले में हो रही देरी को लेकर संत कुंभ में आगे की रणनीति तय करेंगे।
रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हिंदुओं की जनभावनाओं का अपमान कर रहा है। बहुत देर हुई तो हिंदू समाज आंदोलित होगा, क्रांति होगी तो सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी होगी।
जिस प्रकार 1992 में उस ढांचे को गिराकर एक-एक ईंट लोग उठा ले गए उस समय भी रामजन्मभूमि के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं का अपमान किया था जिसके कारण इस प्रकार की घटना हुई।
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। निर्णय जब भी आए सुबूतों एवं तथ्यों के आधार पर आना चाहिए। कहा कि सुबूतों के आधार पर निर्णय आएगा तो शांति सद्भाव कायम रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी चाहते हैं कि मामले का जल्द समाधान हो। कोर्ट की कार्रवाई में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया है जो भी निर्णय आएगा मानेंगे।
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने मामले की सुनवाई टलने पर कहा कि कोर्ट पर किसी का दबाव नहीं है कोर्ट जो भी फैसला करेगा वहीं मानेंगे। कहा कि कोर्ट पर दबाब नहीं बनाया जाना चाहिए।
न्यायालय स्वतंत्र है कोर्ट की कार्रवाई में अडंगा नहीं लगाना चाहिए। कोर्ट आज निर्णय दे या फिर बाद में दें हमने पहले ही कह दिया है कि हम कोर्ट का फैसला मानेंगे।
महंत परमहंस दास ने उम्मीद जताई है कि 10 जनवरी के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले में नियमित सुनवाई शुरू कर देगी। वह 14 जनवरी से 20 फरवरी तक कुंभ में तपस्या करेंगे।
इस दौरान यदि मेरी मृत्यु हो जाती है तो जब तक राममंदिर नहीं बनता तब तक मेरे शव को सम्मान पूर्वक सुरक्षित रखें और जब राममंदिर बने तभी मेरा अंतिम संस्कार किया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील किया है कि वह उनसे जल्द मुलाकात करें।
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि अब नियमित सुनवाई का प्रयास होना चाहिए। तारीख बढ़ने से मामला पहले ही बहुत प्रभावित हो चुका है। तारीखों से नुकसान हो रहा है।
कहा कि 10 जनवरी से यदि मामले की नियमित सुनवाई नहीं शुरू हुई तो सभी परिस्थितियों का आकलन करते हुए संत-धर्माचार्य प्रयागराज कुंभ में निर्णय लेंगे।
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अयोध्या। रामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई एक बार फिर टलने से रामनगरी के संत-धर्माचार्य नाराज हैं। उधर मुस्लिम पक्षकारों ने कहा है कि कोर्ट की प्रक्रिया में बाधा नहीं डालनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट जो निर्णय देगी वही मानेंगे। जबकि हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने मंदिर मामले की सुनवाई के लिए नई पीठ बनाने की मांग उठाई है। संतों ने स्पष्ट किया है कि अब न्यायिक प्रक्रिया को लटकाना नहीं चाहिए, संतों का कहना है कि अब धैर्य जबाब दे रहा है।
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हिंदू समाज के आंदोलित होने की पटकथा तैयार की जा रही है। रामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में ज्यादा विलंब नहीं होना चाहिए। याची को तुरंत न्याय मिलना चाहिए विलंब होने से भावनाओं को ठेस पहुंच रही है।
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आशा है कि वर्तमान सरकार रहते ही राममंदिर मामले का समाधान हो जाएगा। हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट मामले में अरुचि दिखा रहा है।
मैंने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति सहित अन्य को पत्र लिखकर यह मांग किया है कि राममंदिर मामले के लिए एक नई पीठ बनाकर शीघ्र मामले का निस्तारण किया जाए।
रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती का कहना है कि कांग्रेस के इशारे पर जज मुकदमा टालना चाहते हैं। हमारा राष्ट्रपति से निवेदन है कि वह अपने अधिकार का प्रयोग कर दो महीने में अयोध्या मामले का निस्तारण कराएं।
प्रधानमंत्री मोदी मंदिर निर्माण के लिए प्रयासरत हैं। वे भी निर्णय का इंतजार कर रहे हैं क्यों कि निर्णय आने से पूर्व अध्यादेश लाना उचित नही होगा। कहा कि मामले में हो रही देरी को लेकर संत कुंभ में आगे की रणनीति तय करेंगे।
रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य महंत कमलनयन दास ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हिंदुओं की जनभावनाओं का अपमान कर रहा है। बहुत देर हुई तो हिंदू समाज आंदोलित होगा, क्रांति होगी तो सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी होगी।
जिस प्रकार 1992 में उस ढांचे को गिराकर एक-एक ईंट लोग उठा ले गए उस समय भी रामजन्मभूमि के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं का अपमान किया था जिसके कारण इस प्रकार की घटना हुई।
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। निर्णय जब भी आए सुबूतों एवं तथ्यों के आधार पर आना चाहिए। कहा कि सुबूतों के आधार पर निर्णय आएगा तो शांति सद्भाव कायम रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी चाहते हैं कि मामले का जल्द समाधान हो। कोर्ट की कार्रवाई में दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया है जो भी निर्णय आएगा मानेंगे।
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने मामले की सुनवाई टलने पर कहा कि कोर्ट पर किसी का दबाव नहीं है कोर्ट जो भी फैसला करेगा वहीं मानेंगे। कहा कि कोर्ट पर दबाब नहीं बनाया जाना चाहिए।
न्यायालय स्वतंत्र है कोर्ट की कार्रवाई में अडंगा नहीं लगाना चाहिए। कोर्ट आज निर्णय दे या फिर बाद में दें हमने पहले ही कह दिया है कि हम कोर्ट का फैसला मानेंगे।
महंत परमहंस दास ने उम्मीद जताई है कि 10 जनवरी के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले में नियमित सुनवाई शुरू कर देगी। वह 14 जनवरी से 20 फरवरी तक कुंभ में तपस्या करेंगे।
इस दौरान यदि मेरी मृत्यु हो जाती है तो जब तक राममंदिर नहीं बनता तब तक मेरे शव को सम्मान पूर्वक सुरक्षित रखें और जब राममंदिर बने तभी मेरा अंतिम संस्कार किया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से अपील किया है कि वह उनसे जल्द मुलाकात करें।
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि अब नियमित सुनवाई का प्रयास होना चाहिए। तारीख बढ़ने से मामला पहले ही बहुत प्रभावित हो चुका है। तारीखों से नुकसान हो रहा है।
कहा कि 10 जनवरी से यदि मामले की नियमित सुनवाई नहीं शुरू हुई तो सभी परिस्थितियों का आकलन करते हुए संत-धर्माचार्य प्रयागराज कुंभ में निर्णय लेंगे।