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अष्टकोणीय गर्भगृह में अब तक लग गए 500 पत्थर
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण का काम जोरों पर चल रहा है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंदिर निर्माण की प्रगति साझा करते हुए बताया कि राममंदिर के अष्टकोणीय गर्भगृह में अब तक वंशीपहाड़पुर के पांच सौ पत्थर बिछाए जा चुके हैं। गर्भगृह निर्माण में ही केवल 500 कारीगर व मजदूर लगे हैं। गर्भगृह में लगने वाले मकराना के संगमरमर की भी आपूर्ति तेजी से हो रही है।
चंपत राय ने बताया कि राममंदिर के गर्भगृह में महापीठ का काम पूरा हो चुका है। गूढ़मंडप से थोड़ा आगे तक पत्थर बिछाए जा चुके हैं। बताया कि वंशीपहाड़पुर के अब तक करीब पांच सौ पत्थर बिछाए जा चुके हैं। जल्द ही नक्काशीदार खंभों को जोड़ने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में सर्वाधिक 160 स्तंभ लगाए जाएंगे, जिन पर मंदिर टिका होगा। इसी तरह प्रथम तल में 132 व दूसरे तल में 74 स्तंभ लगाए जाने हैं। मंदिर में कुल 12 दरवाजे होंगे, जो कि सागौन की लकड़ी से बनेंगे।
चंपत राय ने बताया कि राममंदिर का गर्भगृह मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले सफेद संगमरमर से सजेगा। चंपत राय ने बताया कि गर्भगृह में बाल स्वरूप रामलला ही विराजेंगें। एक अचल मूर्ति का भी निर्माण कराया जाएगा। बताया कि मंदिर की रिटेनिंग वॉल निर्माण का काम भी जोरों पर है। 12 मीटर ऊंची रिटेनिंग वॉल की छह मीटर की एक लेयर डाली जा चुकी है जबकि दूसरी लेयर भी करीब दो मीटर तक डाली जा चुकी है।
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चंपत राय ने बताया कि राममंदिर के गर्भगृह में महापीठ का काम पूरा हो चुका है। गूढ़मंडप से थोड़ा आगे तक पत्थर बिछाए जा चुके हैं। बताया कि वंशीपहाड़पुर के अब तक करीब पांच सौ पत्थर बिछाए जा चुके हैं। जल्द ही नक्काशीदार खंभों को जोड़ने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। मंदिर के गर्भगृह में सर्वाधिक 160 स्तंभ लगाए जाएंगे, जिन पर मंदिर टिका होगा। इसी तरह प्रथम तल में 132 व दूसरे तल में 74 स्तंभ लगाए जाने हैं। मंदिर में कुल 12 दरवाजे होंगे, जो कि सागौन की लकड़ी से बनेंगे।
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चंपत राय ने बताया कि राममंदिर का गर्भगृह मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले सफेद संगमरमर से सजेगा। चंपत राय ने बताया कि गर्भगृह में बाल स्वरूप रामलला ही विराजेंगें। एक अचल मूर्ति का भी निर्माण कराया जाएगा। बताया कि मंदिर की रिटेनिंग वॉल निर्माण का काम भी जोरों पर है। 12 मीटर ऊंची रिटेनिंग वॉल की छह मीटर की एक लेयर डाली जा चुकी है जबकि दूसरी लेयर भी करीब दो मीटर तक डाली जा चुकी है।
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