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दीप जलाकर नारी शिक्षा का संदेश देंगी बेटियां 18-05-09
Updated Sun, 04 Nov 2018 01:02 AM IST
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फैजाबाद। अपने अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति नारियां जागृत हों, इसके लिए उनका शिक्षित होना अति आवश्यक है। अयोध्या के दीपोत्सव पर्व पर रिकॉर्ड दीप जलाकर नारी सशक्तिकरण के संदेश को मजबूत करते हुए नारी को शिक्षित करने के लिए जागरूक किया जाएगा। यह संदेश अमर उजाला की ओर से शनिवार को महिला सशक्तिकरण को लेकर आयोजित किए गए संवाद में शिक्षिकाओं व छात्राओं ने दिया।
झुनझुनवाला ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के पीजी कॉलेज कैंपस द्वारिकापुरी हांसापुर में आयोजित इस संवाद में विभिन्न विभागों की छात्राओं व शिक्षिकाओं ने एक सुर में कहा कि महिलाओं को मजबूत व आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा अनिवार्य है, इसके लिए बेटी पढ़ाओ अभियान को घर-घर पहुंचाकर लोगों को जागरूक करना होगा।
कविताओं व विचारों के माध्यम से संवाद में मौजूद छात्राओं व शिक्षिकाओं ने घर-घर नारी शिक्षा की अलख जताते हुए खुद को बौद्धिक रूप से मजबूत बनाने का संदेश दिया। इस दौरान एक्सपर्ट के रूप में मौजूद शिक्षिकाओं ने कहा कि शिक्षा से महिलाओं के अंदर आत्मविश्वास, आत्मसम्मान पैदा होता है जिससे वे अपनी क्षमता की खोज कर सकती हैं और वे नए विचारों और नवीनता के मार्ग की ओर अग्रसर होती हैं।
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शिक्षा से लिंग भेदभाव दूर होता है, महिलाएं अपने फैसलों को लेने में सक्षम बनती हैं। कहा कि शिक्षित महिलाएं ही आज की दुनिया में स्वतंत्र हैं। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि हम इस बार दीपोत्सव का विश्व रिकॉर्ड तो बनाएंगे ही, साथ ही इसके माध्यम से समाज को नारी शिक्षा के लिए जागृति करने का संदेश भी देंगे।
वहीं छात्राओं ने कहा कि शिक्षित महिला आर्थिक व पारिवारिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होती हैं, जिससे देश उन्नति के पथ पर अग्रसर होता है। इसके अलावा शिक्षित नारी ही घरेलू हिंसा, यौन शोषण जैसे गंभीर महिला अपराध का डटकर मुकाबला कर सकती है।
देश को विकसित करने के लिए नारी का शिक्षित होना अनिवार्य
सामाजिक विज्ञान विभाग की शिक्षिका डॉ. पूर्णिमा तिवारी ने कहा कि किसी भी देश को पूर्ण रूप से विकसित होने के लिए वहां की महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है। यह एक तरह से उस दवाई की भांति है जो मरीज को ठीक होने में मदद करती है और उसे फिर से सेहतमंद बनने में मदद करती है। शिक्षित महिला उस तरह का औजार है जो भारतीय समाज पर और अपने परिवार पर अपने हुनर तथा ज्ञान से सकारात्मक प्रभाव डालती है, साथ ही देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के पीछे भी अपना अमूल्य योगदान देती है। कहा कि दीपोत्सव पर समरसता, प्रेम, सहयोग का संदेश फैलाने के लिए अयोध्या में लाखों दीप जलेंगे। इसके माध्यम से बेटियां नारी शिक्षा की अलख भी जगाएंगी।
महिलाओं को शिक्षा से दूर रखना अपराध
जंतु विज्ञान की शिक्षिका डॉ. रेखा सक्सेना ने कहा कि महिलाओं को भी पुरुषों की तरह शिक्षा संबंधी गतिविधियों में बराबरी का मौका दिया जाना चाहिए। उन्हें शिक्षा से दूर रखना अपराध है, हमारे देश की आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व महिलाएं करती हैं। अगर महिलाएं अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाई तो इसका मतलब है कि हमारे देश का विकास भी अधूरा है जो देश को पिछड़ेपन की ओर ले जाएगा। महिलाओं के शिक्षित होने से समाज और देश में विकास भी तेजी से हो पाएगा। महिलाओं के लिए शिक्षा के महत्व को व्यापक स्तर पर फैलाने के लिए पूरे देश में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। एक शिक्षित महिला ही अपने परिवार का तथा देश का विकास कर सकती है।
शिक्षित महिला से देश का भविष्य रहेगा सुरक्षित
गृह विज्ञान की शिक्षिका डॉ. पूनम सिंह ने कहा कि महिला शिक्षा की दर कम होने की ही वजह से जनसंख्या के मामले में हमारा देश पूरे विश्व में दूसरे नंबर पर आता है। अगर महिला खुद शिक्षित होगी तो देश का आने वाला भविष्य भी शिक्षित होगा। महिला शिक्षा मध्यकालीन भारत में बहुत बड़ा मुद्दा था, हालांकि आज यह मसला काफी हद तक सुलझ चुका है। भारत में अब महिला शिक्षा को पुरुषों की शिक्षा की ही तरह अहमियत दी जाती है ताकि महिलाएं भी सामाजिक और आर्थिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकें।
शिक्षा से खत्म होगा स्त्री-पुरुष में भेदभाव
शिक्षिका डा. संगीता यादव ने कहा कि नारी दिया समान है, वो दूसरों को प्रकाश देती है लेकिन उसके नीचे खुद अंधेरा रहता है। कहा कि आज समाज में स्त्री पुरुष के बीच बोए गए भेदभाव को नारी शिक्षा की अलख जगाकर मिटाना होगा, तभी हमारा समाज मजबूत होगा। कहा कि हमें रीति रिवाज के बंधनों को तोड़कर मर्यादा में रहकर देश व समाज की सेवा में योगदान देना होगा।
जल्द होगी नई सुबह, दूर होगा अंधेरा
कार्यक्रम का संचालन कर रही पत्रकारिता व जनसंचार विभाग की छात्रा शोभा गुप्ता ने कहा कि अब समाज की सोच बदल रही, जल्द ही नई सुबह होगी, जिसके प्रकाश से समाज में छाया अंधकार दूर होगा। कहा कि आज की नारी शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही है, जिससे उनके माता-पिता का हौसला बढ़ रहा है और वो अपनी बेटियों को आजादी देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जरूरत है कि आज समाज नारियों के हौसले को बढ़ाए और उनके कदम से कदम मिलाकर समाज व देश को नई दिशा प्रदान करे।
नारी शिक्षा को बनाएं मजबूत हथियार
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा गुंजन त्रिपाठी ने कहा कि लाख कानून बनने के बाद भी महिला अपराध कम नहीं हो रहे, इसके लिए हमें खुद जागरूक होकर चुप्पी तोडनी होगी, इसमें नारी शिक्षा ही मजबूत हथियार बन सकता है।।
महिला अपराधों के खिलाफ खुलकर लड़ना होगा
बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा निशि तिवारी ने कहा कि देश की आजादी के बाद भी आज हमें शैक्षिक आजादी नहीं मिली, लेकिन आज नारियां जागरूक हो रही है और शिक्षा को लेकर सजग हो रही हैं।
शिक्षित होंगी महिलाएं तो आने वाले पीढ़ी भी होगी शिक्षित
बीएससी की छात्रा आकृति तिवारी ने कहा कि महिलाओं के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती क्योंकि आने वाले वंश की जन्मदाता वे ही है। अगर महिलाएं अच्छी तरह से शिक्षित होंगी तो ही वे भविष्य में जन्म लेने वाली पीढ़ी को शिक्षा दे पाएंगी, जिससे समाज और देश प्रगति कर पाएगा।
बराबर की शिक्षा का हक जरूरी
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा शिवांगी ने कहा कि भारतीय समाज के सही आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नारी शिक्षा बेहद जरूरी है। महिला एवं पुरुष दोनों ही देश को नई ऊंचाईयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं इसलिए दोनों को ही बराबर की शिक्षा का हक मिलना जरूरी है।
बच्चों की पहली शिक्षक उसकी मां होती है
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा अजरा बानो ने कहा कि बच्चों की पहली शिक्षक मां ही होती है जो उन्हें जीवन की अच्छाइयों और बुराइयों से अवगत कराती है। अगर नारी शिक्षा को नजरंदाज किया गया तो देश के भविष्य के लिए यह किसी खतरे से कम नहीं होगा।
महिला साक्षरता की कमी देश को कमजोर बनाती है
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा बबिता शर्मा ने कहा कि एक पुरुष को शिक्षित करके हम सिर्फ एक ही व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचा पाएंगे पर एक महिला को शिक्षित करके हम पूरे देश तक शिक्षा को पहुंचा पाएंगे। महिला साक्षरता की कमी देश को कमजोर बनाती है, इसलिए यह बहुत जरुरी है कि महिलाओं को उनकी शिक्षा का हक दिया जाए और उन्हें किसी भी तरह से पुरुषों से कम न समझा जाए।
शिक्षा में मिले मिले बराबरी का हक
बीएससी की छात्रा लक्ष्मी कोरी ने कहा कि भारत के लोकतंत्र को सफल बनाने का एकमात्र रास्ता यहीं है कि महिलाओं तथा पुरुषों को शिक्षा हासिल करने के लिए बराबरी का हक दिया जाए। शिक्षित महिलाएं ही देश, समाज और परिवार में खुशहाली ला सकती है।
अभी इस दिशा में काफी काम बाकी है
बीएएसी प्रथम वर्ष की छात्रा स्वाती पांडेय ने कहा कि पौराणिक युग से लेकर आजादी के बाद के समय तक महिला साक्षरता को लेकर किये गये प्रयासों में बहुत प्रगति हुई है। हालांकि अभी यह कार्य संतुष्टि के स्तर तक नहीं पहुँचा है। अभी भी इस दिशा में काफी काम करना बाकी है।
महिला साक्षरता के अभाव में पिछड़ रहा देश ंबीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा आरती पाठक ने कहा कि भारत के विश्व में बाकी देशों से पिछडने के पीछे महिला साक्षरता की कमी का ही होना है। भारत में महिला साक्षरता को लेकर गंभीरता इसलिए कम है क्योंकि बहुत पहले समाज में महिलाओं पर तरह-तरह की पाबंदियां थोप दी गई थी। इन पाबंदियों का जल्द ही हटाना बेहद जरूरी है।
महिलाओं को शिक्षित करने के साथ बढ़ें रोजगार के अवसर
बीएससी की छात्रा मोनिका मिश्रा ने कहा कि शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में महिला शिक्षा का स्तर काफी बढ़ा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अलग से विशेष योजनायें चलाई गयी है। गावों में महिलाओं को शिक्षित करने के साथ-साथ उनके लिए रोजगार संबंधी अवसर भी बढ़ाए जाने चाहिए।
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झुनझुनवाला ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के पीजी कॉलेज कैंपस द्वारिकापुरी हांसापुर में आयोजित इस संवाद में विभिन्न विभागों की छात्राओं व शिक्षिकाओं ने एक सुर में कहा कि महिलाओं को मजबूत व आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा अनिवार्य है, इसके लिए बेटी पढ़ाओ अभियान को घर-घर पहुंचाकर लोगों को जागरूक करना होगा।
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कविताओं व विचारों के माध्यम से संवाद में मौजूद छात्राओं व शिक्षिकाओं ने घर-घर नारी शिक्षा की अलख जताते हुए खुद को बौद्धिक रूप से मजबूत बनाने का संदेश दिया। इस दौरान एक्सपर्ट के रूप में मौजूद शिक्षिकाओं ने कहा कि शिक्षा से महिलाओं के अंदर आत्मविश्वास, आत्मसम्मान पैदा होता है जिससे वे अपनी क्षमता की खोज कर सकती हैं और वे नए विचारों और नवीनता के मार्ग की ओर अग्रसर होती हैं।
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शिक्षा से लिंग भेदभाव दूर होता है, महिलाएं अपने फैसलों को लेने में सक्षम बनती हैं। कहा कि शिक्षित महिलाएं ही आज की दुनिया में स्वतंत्र हैं। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि हम इस बार दीपोत्सव का विश्व रिकॉर्ड तो बनाएंगे ही, साथ ही इसके माध्यम से समाज को नारी शिक्षा के लिए जागृति करने का संदेश भी देंगे।
वहीं छात्राओं ने कहा कि शिक्षित महिला आर्थिक व पारिवारिक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम होती हैं, जिससे देश उन्नति के पथ पर अग्रसर होता है। इसके अलावा शिक्षित नारी ही घरेलू हिंसा, यौन शोषण जैसे गंभीर महिला अपराध का डटकर मुकाबला कर सकती है।
देश को विकसित करने के लिए नारी का शिक्षित होना अनिवार्य
सामाजिक विज्ञान विभाग की शिक्षिका डॉ. पूर्णिमा तिवारी ने कहा कि किसी भी देश को पूर्ण रूप से विकसित होने के लिए वहां की महिलाओं का शिक्षित होना जरूरी है। यह एक तरह से उस दवाई की भांति है जो मरीज को ठीक होने में मदद करती है और उसे फिर से सेहतमंद बनने में मदद करती है। शिक्षित महिला उस तरह का औजार है जो भारतीय समाज पर और अपने परिवार पर अपने हुनर तथा ज्ञान से सकारात्मक प्रभाव डालती है, साथ ही देश के आर्थिक और सामाजिक विकास के पीछे भी अपना अमूल्य योगदान देती है। कहा कि दीपोत्सव पर समरसता, प्रेम, सहयोग का संदेश फैलाने के लिए अयोध्या में लाखों दीप जलेंगे। इसके माध्यम से बेटियां नारी शिक्षा की अलख भी जगाएंगी।
महिलाओं को शिक्षा से दूर रखना अपराध
जंतु विज्ञान की शिक्षिका डॉ. रेखा सक्सेना ने कहा कि महिलाओं को भी पुरुषों की तरह शिक्षा संबंधी गतिविधियों में बराबरी का मौका दिया जाना चाहिए। उन्हें शिक्षा से दूर रखना अपराध है, हमारे देश की आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व महिलाएं करती हैं। अगर महिलाएं अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाई तो इसका मतलब है कि हमारे देश का विकास भी अधूरा है जो देश को पिछड़ेपन की ओर ले जाएगा। महिलाओं के शिक्षित होने से समाज और देश में विकास भी तेजी से हो पाएगा। महिलाओं के लिए शिक्षा के महत्व को व्यापक स्तर पर फैलाने के लिए पूरे देश में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। एक शिक्षित महिला ही अपने परिवार का तथा देश का विकास कर सकती है।
शिक्षित महिला से देश का भविष्य रहेगा सुरक्षित
गृह विज्ञान की शिक्षिका डॉ. पूनम सिंह ने कहा कि महिला शिक्षा की दर कम होने की ही वजह से जनसंख्या के मामले में हमारा देश पूरे विश्व में दूसरे नंबर पर आता है। अगर महिला खुद शिक्षित होगी तो देश का आने वाला भविष्य भी शिक्षित होगा। महिला शिक्षा मध्यकालीन भारत में बहुत बड़ा मुद्दा था, हालांकि आज यह मसला काफी हद तक सुलझ चुका है। भारत में अब महिला शिक्षा को पुरुषों की शिक्षा की ही तरह अहमियत दी जाती है ताकि महिलाएं भी सामाजिक और आर्थिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला सकें।
शिक्षा से खत्म होगा स्त्री-पुरुष में भेदभाव
शिक्षिका डा. संगीता यादव ने कहा कि नारी दिया समान है, वो दूसरों को प्रकाश देती है लेकिन उसके नीचे खुद अंधेरा रहता है। कहा कि आज समाज में स्त्री पुरुष के बीच बोए गए भेदभाव को नारी शिक्षा की अलख जगाकर मिटाना होगा, तभी हमारा समाज मजबूत होगा। कहा कि हमें रीति रिवाज के बंधनों को तोड़कर मर्यादा में रहकर देश व समाज की सेवा में योगदान देना होगा।
जल्द होगी नई सुबह, दूर होगा अंधेरा
कार्यक्रम का संचालन कर रही पत्रकारिता व जनसंचार विभाग की छात्रा शोभा गुप्ता ने कहा कि अब समाज की सोच बदल रही, जल्द ही नई सुबह होगी, जिसके प्रकाश से समाज में छाया अंधकार दूर होगा। कहा कि आज की नारी शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति सजग हो रही है, जिससे उनके माता-पिता का हौसला बढ़ रहा है और वो अपनी बेटियों को आजादी देकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जरूरत है कि आज समाज नारियों के हौसले को बढ़ाए और उनके कदम से कदम मिलाकर समाज व देश को नई दिशा प्रदान करे।
नारी शिक्षा को बनाएं मजबूत हथियार
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा गुंजन त्रिपाठी ने कहा कि लाख कानून बनने के बाद भी महिला अपराध कम नहीं हो रहे, इसके लिए हमें खुद जागरूक होकर चुप्पी तोडनी होगी, इसमें नारी शिक्षा ही मजबूत हथियार बन सकता है।।
महिला अपराधों के खिलाफ खुलकर लड़ना होगा
बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा निशि तिवारी ने कहा कि देश की आजादी के बाद भी आज हमें शैक्षिक आजादी नहीं मिली, लेकिन आज नारियां जागरूक हो रही है और शिक्षा को लेकर सजग हो रही हैं।
शिक्षित होंगी महिलाएं तो आने वाले पीढ़ी भी होगी शिक्षित
बीएससी की छात्रा आकृति तिवारी ने कहा कि महिलाओं के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती क्योंकि आने वाले वंश की जन्मदाता वे ही है। अगर महिलाएं अच्छी तरह से शिक्षित होंगी तो ही वे भविष्य में जन्म लेने वाली पीढ़ी को शिक्षा दे पाएंगी, जिससे समाज और देश प्रगति कर पाएगा।
बराबर की शिक्षा का हक जरूरी
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा शिवांगी ने कहा कि भारतीय समाज के सही आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए नारी शिक्षा बेहद जरूरी है। महिला एवं पुरुष दोनों ही देश को नई ऊंचाईयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं इसलिए दोनों को ही बराबर की शिक्षा का हक मिलना जरूरी है।
बच्चों की पहली शिक्षक उसकी मां होती है
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा अजरा बानो ने कहा कि बच्चों की पहली शिक्षक मां ही होती है जो उन्हें जीवन की अच्छाइयों और बुराइयों से अवगत कराती है। अगर नारी शिक्षा को नजरंदाज किया गया तो देश के भविष्य के लिए यह किसी खतरे से कम नहीं होगा।
महिला साक्षरता की कमी देश को कमजोर बनाती है
बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा बबिता शर्मा ने कहा कि एक पुरुष को शिक्षित करके हम सिर्फ एक ही व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचा पाएंगे पर एक महिला को शिक्षित करके हम पूरे देश तक शिक्षा को पहुंचा पाएंगे। महिला साक्षरता की कमी देश को कमजोर बनाती है, इसलिए यह बहुत जरुरी है कि महिलाओं को उनकी शिक्षा का हक दिया जाए और उन्हें किसी भी तरह से पुरुषों से कम न समझा जाए।
शिक्षा में मिले मिले बराबरी का हक
बीएससी की छात्रा लक्ष्मी कोरी ने कहा कि भारत के लोकतंत्र को सफल बनाने का एकमात्र रास्ता यहीं है कि महिलाओं तथा पुरुषों को शिक्षा हासिल करने के लिए बराबरी का हक दिया जाए। शिक्षित महिलाएं ही देश, समाज और परिवार में खुशहाली ला सकती है।
अभी इस दिशा में काफी काम बाकी है
बीएएसी प्रथम वर्ष की छात्रा स्वाती पांडेय ने कहा कि पौराणिक युग से लेकर आजादी के बाद के समय तक महिला साक्षरता को लेकर किये गये प्रयासों में बहुत प्रगति हुई है। हालांकि अभी यह कार्य संतुष्टि के स्तर तक नहीं पहुँचा है। अभी भी इस दिशा में काफी काम करना बाकी है।
महिला साक्षरता के अभाव में पिछड़ रहा देश ंबीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा आरती पाठक ने कहा कि भारत के विश्व में बाकी देशों से पिछडने के पीछे महिला साक्षरता की कमी का ही होना है। भारत में महिला साक्षरता को लेकर गंभीरता इसलिए कम है क्योंकि बहुत पहले समाज में महिलाओं पर तरह-तरह की पाबंदियां थोप दी गई थी। इन पाबंदियों का जल्द ही हटाना बेहद जरूरी है।
महिलाओं को शिक्षित करने के साथ बढ़ें रोजगार के अवसर
बीएससी की छात्रा मोनिका मिश्रा ने कहा कि शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में महिला शिक्षा का स्तर काफी बढ़ा है। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अलग से विशेष योजनायें चलाई गयी है। गावों में महिलाओं को शिक्षित करने के साथ-साथ उनके लिए रोजगार संबंधी अवसर भी बढ़ाए जाने चाहिए।