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घटतौली में मसौधा शुगर मिल के प्रबंधक कोर्ट में तलब
Updated Mon, 04 Dec 2017 11:18 PM IST
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फैजाबाद। गन्ना घटतौली के मामले में मसौधा शुगर मिल प्रशासन के चार अधिकारियों को कोर्ट ने प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए तलब किया है। यह आदेश किसान की तरफ से प्रस्तुत प्रोटेस्ट पेटीशन को स्वीकार करते हुए एसीजेएम रवींद्र कुमार द्विवेदी की कोर्ट से हुआ।
अधिवक्ता विजय बहादुर वर्मा ने बताया कि किसान अमरनाथ वर्मा पेशे से वकील भी हैं। वे अपना गन्ना 21 फरवरी 2014 को बेचने के लिए मसौधा केएम शुगर मिल गए थे। वहां ले जाने से पहले उन्होंने गन्ने का वजन एग्रो धर्मकांटा केशरुआ बुजुर्ग रामपुर भगन में कराया था।
मिल में गन्ना तौलने पर उसका वजन पूर्व में कराए तौल से आठ क्विंटल कम निकला। इसकी शिकायत किसान ने तत्कालीन जीएम केन बीएन मिश्र, डीजीएम शिव गोविंद सिंह, ईडी एससी अग्रवाल, जीएम पी एंड ए वीएन मिश्र से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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मिल प्रशासन ने किसान का गन्ना जबरदस्ती उतरवा लिया। चारों अधिकारियों ने 20 अन्य लोगों के साथ किसान को मारापीटा। इसकी रिपोर्ट किसान अजय वर्मा की तहरीर पर मिल के चारों अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी व मारपीट समेत अन्य धाराओं में दर्ज हुई।
विवेचना के बाद विवेचक ने सबको क्लीन चिट देते हुए मामले में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इस रिपोर्ट को अधिवक्ता ने पेटीशन दाखिल कर चुनौती दी।
कोर्ट ने पेटीशन स्वीकार करते हुए मामले को बतौर परिवाद दर्ज किया। फिर किसान की गवाही और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने चारों अधिकारियों को धोखाधड़ी समेत अन्य अपराध का प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विचारण के लिए तलब किया।
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अधिवक्ता विजय बहादुर वर्मा ने बताया कि किसान अमरनाथ वर्मा पेशे से वकील भी हैं। वे अपना गन्ना 21 फरवरी 2014 को बेचने के लिए मसौधा केएम शुगर मिल गए थे। वहां ले जाने से पहले उन्होंने गन्ने का वजन एग्रो धर्मकांटा केशरुआ बुजुर्ग रामपुर भगन में कराया था।
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मिल में गन्ना तौलने पर उसका वजन पूर्व में कराए तौल से आठ क्विंटल कम निकला। इसकी शिकायत किसान ने तत्कालीन जीएम केन बीएन मिश्र, डीजीएम शिव गोविंद सिंह, ईडी एससी अग्रवाल, जीएम पी एंड ए वीएन मिश्र से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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मिल प्रशासन ने किसान का गन्ना जबरदस्ती उतरवा लिया। चारों अधिकारियों ने 20 अन्य लोगों के साथ किसान को मारापीटा। इसकी रिपोर्ट किसान अजय वर्मा की तहरीर पर मिल के चारों अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी व मारपीट समेत अन्य धाराओं में दर्ज हुई।
विवेचना के बाद विवेचक ने सबको क्लीन चिट देते हुए मामले में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। इस रिपोर्ट को अधिवक्ता ने पेटीशन दाखिल कर चुनौती दी।
कोर्ट ने पेटीशन स्वीकार करते हुए मामले को बतौर परिवाद दर्ज किया। फिर किसान की गवाही और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने चारों अधिकारियों को धोखाधड़ी समेत अन्य अपराध का प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए विचारण के लिए तलब किया।