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दुरदुरिया आयोजन संग अयोध्या महोत्सव का आगाज
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दुरदुरिया संग अयोध्या महोत्सव का रंगारंग आगाज
अयोध्या। 2100 महिलाओं के दुरदुरिया में पूजन-अर्चन के साथ बृहस्पतिवार को अयोध्या महोत्सव का आगाज हो गया। महोत्सव का उद्घाटन मणिराम दास छावनी के उतराधिकारी महंत कलमनयन दास जी के साथ अयोध्या, रुदौली के विधायक और महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने दीप प्रज्वलित कर किया।
राजकीय इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में महंत कमलनयन दास ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होते रहना चाहिए। जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत की जानकारी आम जन को प्राप्त होती है। अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्त ने कहा कि दुरदुरिया कार्यक्रम में माताओं व बहनों की उपस्थित ने आयोजन को महत्वपूर्ण बना दिया।
अयोध्या महोत्सव द्वारा भारतीय संस्कृति का दर्शन कराने का प्रयास किया गया है। अयोध्या महोत्सव में प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाता है। संस्कृति विभाग ने महोत्सव को मान्यता प्रदान की है। अयोध्या महोत्सव न्यास के अध्यक्ष हरीश श्रीवास्तव ने कहा कि महोत्सव के माध्यम से भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
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2100 महिलाओं ने महोत्सव के विशाल प्रांगण में दुरदुरिया पूजा आयोजित की। अवसान मइया को पूजा अर्पित की। कार्यक्रम में महोत्सव अध्यक्ष सहित अन्य लोगों ने महंत कमलनयन दास जी को स्मृति चिह्न प्रदान किया। महंत मैथिलीशरण दास, महंत रामदास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महामंडलेश्वर प्रेम शंकर दास, महंत उमेशदास, महंत राजीव लोचन शरण, महंत रामप्रकाश शरण, महंत प्रिया प्रितम शरण, महंत राम प्रवेश दास को शॉल भेंटकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में महंत मनमोहन दास, सहकारी बैंक सभापति धर्मेन्द्र प्रताप, महंत राजकुमार दास, गिरीश पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद थे। जीआईसी मेें शुरू हुए अयोध्या महोत्सव में कई को यहां पहुंचे लोगों की निगाहें तलाशती रही। अनुपस्थिति के कारण भी बताए गए लेकिन आयोजन मेें इनके नदारद होने के मायने जरूर निकाले जाते रहे।
असल में अयोध्या महोत्सव सत्तादल से जुड़े लोगों का आयोजन है। यहां दो विधायक, महापौर के साथ संगठन से जुड़े पदाधिकारी व पूर्व पदाधिकारी तो मौजूद दिखे लेकिन सांसद, जिलाध्यक्ष के साथ महानगर से जुड़े पदाधिकारियों की अनुपस्थिति कुछ और ही बयां कर रही थी। परिसर में सवाल उछले तो जवाब तो मिले लेकिन नाकाफी। सांसद तो हाउस चलने और अयोध्या पर्व को लेकर दिल्ली में हो सकते हैं लेकिन बाकी की गैर मौजूदगी को लेकर लोगों के अपने तर्क थे।
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अयोध्या। 2100 महिलाओं के दुरदुरिया में पूजन-अर्चन के साथ बृहस्पतिवार को अयोध्या महोत्सव का आगाज हो गया। महोत्सव का उद्घाटन मणिराम दास छावनी के उतराधिकारी महंत कलमनयन दास जी के साथ अयोध्या, रुदौली के विधायक और महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने दीप प्रज्वलित कर किया।
राजकीय इंटर कॉलेज के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम में महंत कमलनयन दास ने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होते रहना चाहिए। जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत की जानकारी आम जन को प्राप्त होती है। अयोध्या विधायक वेद प्रकाश गुप्त ने कहा कि दुरदुरिया कार्यक्रम में माताओं व बहनों की उपस्थित ने आयोजन को महत्वपूर्ण बना दिया।
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अयोध्या महोत्सव द्वारा भारतीय संस्कृति का दर्शन कराने का प्रयास किया गया है। अयोध्या महोत्सव में प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जाता है। संस्कृति विभाग ने महोत्सव को मान्यता प्रदान की है। अयोध्या महोत्सव न्यास के अध्यक्ष हरीश श्रीवास्तव ने कहा कि महोत्सव के माध्यम से भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
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2100 महिलाओं ने महोत्सव के विशाल प्रांगण में दुरदुरिया पूजा आयोजित की। अवसान मइया को पूजा अर्पित की। कार्यक्रम में महोत्सव अध्यक्ष सहित अन्य लोगों ने महंत कमलनयन दास जी को स्मृति चिह्न प्रदान किया। महंत मैथिलीशरण दास, महंत रामदास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, महामंडलेश्वर प्रेम शंकर दास, महंत उमेशदास, महंत राजीव लोचन शरण, महंत रामप्रकाश शरण, महंत प्रिया प्रितम शरण, महंत राम प्रवेश दास को शॉल भेंटकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में महंत मनमोहन दास, सहकारी बैंक सभापति धर्मेन्द्र प्रताप, महंत राजकुमार दास, गिरीश पांडेय सहित अन्य लोग मौजूद थे। जीआईसी मेें शुरू हुए अयोध्या महोत्सव में कई को यहां पहुंचे लोगों की निगाहें तलाशती रही। अनुपस्थिति के कारण भी बताए गए लेकिन आयोजन मेें इनके नदारद होने के मायने जरूर निकाले जाते रहे।
असल में अयोध्या महोत्सव सत्तादल से जुड़े लोगों का आयोजन है। यहां दो विधायक, महापौर के साथ संगठन से जुड़े पदाधिकारी व पूर्व पदाधिकारी तो मौजूद दिखे लेकिन सांसद, जिलाध्यक्ष के साथ महानगर से जुड़े पदाधिकारियों की अनुपस्थिति कुछ और ही बयां कर रही थी। परिसर में सवाल उछले तो जवाब तो मिले लेकिन नाकाफी। सांसद तो हाउस चलने और अयोध्या पर्व को लेकर दिल्ली में हो सकते हैं लेकिन बाकी की गैर मौजूदगी को लेकर लोगों के अपने तर्क थे।