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बिना सड़क बनाए चार लाख रूपये भुगतान का आरोप
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:03 AM IST
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सीडीओ ने दिया जांच का आदेश, मामला सांसद निधि की सड़क का
सोहावल (फैजाबाद)। बिना सड़क बनाए ही चार लाख रुपये के भुगतान कराए जाने का आरोप है। शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी रवीश गुप्ता ने इसकी जांच का आदेश दिया है। यह सड़क राज्य सभा सांसद विनय कटियार की निधि से स्वीकृत की गई थी।
विकास खंड के चिरैधापुर में सांसद निधि से वित्तीय वर्ष 2013-14 में 4 लाख 17 हजार के बजट से दो सड़कों को बनाने का ठेका हुआ। इसमें 150 मीटर इंटरलॉकिंग और 300 मीटर खड़ंजा लगना था। आरोप है ठेकेदार देवराज वर्मा ने विभागीय कर्मचारियों से मिलीभगत कर धन का भुगतान ले लिया लेकिन इंटरलॉकिंग कराया ही नहीं।
खड़ंजा भी पीले ईंटों से लगवाए जाने का आरोप है। गांव के रहने वाले राम किशोर वर्मा ने शिकायत तहसील दिवस और डीएम से की तो तीन बार जांच की गई लेकिन हर बार शिकायत फर्जी बताई गई और आरोपी को ही सुना गया, शिकायत कर्ता बुलाए ही नहीं गए।
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विभागीय अवर अभियंता ने भी मामले में क्लीन चिट दे दी। शिकायतकर्ता के मुताबिक गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी से इसकी शिकायत की गई। तो सीडीओ ने मामले की जांच 10 दिन में करने का निर्देश डीआरडीए के सहायक अभियंता को दिया।
इधर शुक्रवार को ठेकेदार ने इंटरलॉकिंग कराना शुरू किया तो ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए। विरोध जताने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच होने तक काम रुकवा दिया। थाना प्रभारी जीपी सिंह ने बताया ठेकेदार ने 10 दिनों तक कार्य न कराने व जांच में सहयोग करने का समझौता किया है।
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सोहावल (फैजाबाद)। बिना सड़क बनाए ही चार लाख रुपये के भुगतान कराए जाने का आरोप है। शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी रवीश गुप्ता ने इसकी जांच का आदेश दिया है। यह सड़क राज्य सभा सांसद विनय कटियार की निधि से स्वीकृत की गई थी।
विकास खंड के चिरैधापुर में सांसद निधि से वित्तीय वर्ष 2013-14 में 4 लाख 17 हजार के बजट से दो सड़कों को बनाने का ठेका हुआ। इसमें 150 मीटर इंटरलॉकिंग और 300 मीटर खड़ंजा लगना था। आरोप है ठेकेदार देवराज वर्मा ने विभागीय कर्मचारियों से मिलीभगत कर धन का भुगतान ले लिया लेकिन इंटरलॉकिंग कराया ही नहीं।
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खड़ंजा भी पीले ईंटों से लगवाए जाने का आरोप है। गांव के रहने वाले राम किशोर वर्मा ने शिकायत तहसील दिवस और डीएम से की तो तीन बार जांच की गई लेकिन हर बार शिकायत फर्जी बताई गई और आरोपी को ही सुना गया, शिकायत कर्ता बुलाए ही नहीं गए।
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विभागीय अवर अभियंता ने भी मामले में क्लीन चिट दे दी। शिकायतकर्ता के मुताबिक गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी से इसकी शिकायत की गई। तो सीडीओ ने मामले की जांच 10 दिन में करने का निर्देश डीआरडीए के सहायक अभियंता को दिया।
इधर शुक्रवार को ठेकेदार ने इंटरलॉकिंग कराना शुरू किया तो ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जमा हो गए। विरोध जताने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच होने तक काम रुकवा दिया। थाना प्रभारी जीपी सिंह ने बताया ठेकेदार ने 10 दिनों तक कार्य न कराने व जांच में सहयोग करने का समझौता किया है।