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उफनाई सरयू, कछार में बसे गांवों में घुसा पानी

Wed, 08 Aug 2018 11:17 PM IST
Updated Wed, 08 Aug 2018 11:17 PM IST
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उफनाई सरयू, कछार में बसे गांवों में घुसा पानी
लाल निशान से 52 सेमी. ऊपर सरयू, गांवों में घुसा पानी
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फैजाबाद। बैराजों से एक पखवारे से छोड़े गए 32 लाख क्यूसेक पानी और कई दिनों से हो रही बारिश से सरयू के जलस्तर में लगातार वृद्धि के कारण अयोध्या बिल्हर घाट व रौनाही तटबंध के कछार में बसे 18 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा गया है। मंगलवार रात्रि से ही अयोध्या-बिल्हर घाट के कछार में बसे गांव पिपरी संग्राम, शेवरहवा, मडना, माझा मुडाडिहा बलुईया समेत करीब 12 गांवों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। अयोध्या में भी चौधरी चरण सिंह घाट के निकट फटिक शिला में स्थित कई आश्रम सरयू के पानी से घिर गए हैं। सरयू का जलस्तर बुधवार शाम 6 बजे 92.250 रिकॉर्ड किया गया है। यह खतरे के निशान से 52 सेमी. अधिक है। पानी से घिरे गांव के लोग सुरक्षित स्थान के लिए पलायन कर रहे हैं।
एक बार फिर शारदा, गिरजा व सरयू बैराज से बुधवार सुबह आठ बजे 2.41 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। तीन दिनों से लगातार बढ़ रही सरयू बुधवार दोपहर बाद खतरे के निशान से 42 सेमी. ऊपर जाकर ठहर गई थी। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सरयू का जलस्तर दोपहर के एक बजे के बाद 93.210 सेमी. पर जाकर ठहर गया है। दोपहर बाद एक बार फिर से सरयू के जलस्तर में वृद्धि होने लगी है। बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण रौनाही तटबंध के 14.55 किमी व अयोध्या बिल्हर घाट तटबंघ के 13.14 किमी के कछार में बसे 18 से अधिक गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा गया है। मंगलवार रात्रि से ही अयोध्या-बिल्हर घाट के कछार में बसे गांव पिपरी संग्राम, शेवरहवा, मडना, माझा मुडाडिहा बलुईया समेत करीब 12 गांवों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। यहां आवागमन के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं। यही हाल मूडाडिहा व उरदहवा गांव का भी है। दोनों गांवों में 150 से अधिक घरों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। सभी गांवों के लोग आवश्यक सामानों के साथ उपरहार की शरण में जा रहे है। प्रशासन की ओर से अभी तक नाव की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है।
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मुडाडिहा के प्रधान तेज बहादुर निषाद ने बताया कि रास्तों पर भी पानी भर जाने के कारण स्कूली बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं क्योंकि उन्हें बाढ़ में डूबने का खतरा बढ़ गया है। मुडाडिहा निवासी जगदीश यादव ने बताया की अभी तक कोई भी सरकारी सहायता नहीं मिला है हम लोग अपना सामान किसी तरह निकाल कर सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं।
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दूसरी ओर रौनाही तटबंध पर नदी के रौद्र रूप को देखते हुए ग्रामीणों ने अपना सामान समेटना शुरू कर दिया है। गांव के चारों तरफ पानी भर जाने के कारण कीमती व जरूरी सामान गांव से बाहर निकलना काफी मुश्किल है। रुदौली क्षेत्र के दर्जनों गांवों में मंगलवार रात से ही पानी भरना शुरू हो गया था। आलम यह है कि जिस रास्ते से होकर जिलाधिकारी का कारवां मंगलवार को महंगू का पूरवा पहुंचा था उस रास्ते पर भी पानी भर जाने के कारण आवागमन का एक मात्र रास्ता भी बंद हो गया है। अब्बूपुर, मुझेहना, सरायनसिर, कैथी, महंगू का पूरवा,सल्लाहपुर के बजरंगी, देवीप्रसाद, रामबचन, राजदत्त, रामनेवाज, रमेश,रामदेव समेत तमाम परिवारों ने अपने मवेशियों के साथ रौनाही तटबंध पर शरण ले रखी है। जबकि चारे की समस्या को देखते हुए इंद्रजीत, राम उजागिर, कुँवर बहादुर, रामजीत, मनोहर, धर्मपाल, त्रिवेणी समेत लगभग 20 लोग अपने जानवरों को लेकर नदी के बीचों बीच टापू पर स्थित मरौचा में रहने को मजबूर है।
इन लोगों ने दूरभाष के माध्यम से बताया कि अगर तिरपाल का इंतजाम हो जाए तो बारिश से बचाव के साथ हम लोगों को रहने का स्थान भी मिल जाएगा। गौरतलब है कि कैथी मांझा के 71, सल्लाहपुर के 192, सड़री के 125, महंगू का पुरवा के 45, उधरौरा के 45, मुजेहना के 86, अब्बूपुर के 52 परिवारों के साथ लगभग सात सौ परिवार बाढ़ क्षेत्रों के अंतर्गत आते है। कैथी मांझा में 71 परिवारों का जीवन नारकीय बना हुआ है। गांव निवासी फूल बहादुर ने बताया कि अभी तक प्रशासन से केवल दो लीटर केरोसिन का तेल ही मिला है। गांव में सभी बच्चों को बुखार व संक्रमण दाने हाथों में निकलने हुए है लेकिन अभी तक डॉक्टर नहीं पहुंचे है। राम बहादुर का कहना कि एक दिन एसडीएम साहब गांव गए थे जो केवल दो लीटर केरोसिन तेल बांटा गया। उसके बाद अभी तक कुछ भी नहीं मिला हैं। पूरे गांव में में पानी भर चुका है। पुत्ती लाल ने बताया नदी का ही पानी पीना पड़ता हैं। अब तो खाना बनाने के लिए मचानों पर या तख्त ही केवल एक समय ही बन पाता है। पुत्ती लाल अपनी बेटी नैनसी(5) के हाथों में संक्रमण दाने अधिक होने पर शुजांगज बाजार निजी अस्पताल से दाव लेने नाव से आए थे।


बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण सरयू के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। शाम छह बजे सरयू का जलस्तर 93.250 मीटर पहुंच गया। यह खतरे के निशान से 52 सेमी. अधिक है। सभी बाढ़ चौकियों पर कर्मचारी तैनाती हैं। दोनों तटबंध सुरक्षित हैं।- जेपी यादव, अधीक्षण अभियंता, बाढ़ खंड फैजाबाद
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