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रोडवेज बसें भेजी चुनावी बेड़े में, धक्के खा रहे यात्री
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55 रोडवेज बसें भेजीं चुनावी बेड़े में, धक्के खा रहे यात्री
अयोध्या। जिले में परिवहन निगम की बसों का टोटा हो गया है। शाम होते ही बस अड्डे पर बसें नजर नहीं आती हैं। यात्रियों का सहारा सिर्फ बाहरी डिपो की आने वाली बसें बचती हैं। इनमें भी बड़ी मुश्किल से यात्रियों को स्थान मिल पाता है।
फैजाबाद डिपो की 55 बसें चुनावी बेड़े में शामिल हो गई हैं। इसके मद्देनजर संचालन व्यवस्था ढर्रे से उतर गई है लेकिन अधिकारियों का दावा है कि सब कुछ ठीक चल रहा है।
परिवहन निगम के फैजाबाद डिपो में अनुबंधित को जोड़कर 138 बसें संचालित होती हैं। इसमें कानपुर-गोरखपुर, बहराइच-इलाहाबाद, आजमगढ़-कानपुर व दिल्ली मार्ग पर बड़ी संख्या में सवारियां निकलती हैं।
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लोक सभा चुनाव के मद्देनजर फैजाबाद डिपो की 55 बसें चुनावी बेड़े में शामिल की गई है। इसमें से निर्वाचन आयोग ने मौजूदा समय में 37 बसें परिवहन निगम से ले लिया है, शेष 18 बसें भी जल्द ली जाएंगी।
दूसरी ओर समस्या यह है कि रामनवमी के बाद लगन का सिलसिला शुरू हो गया है। फैजाबाद डिपो के निर्धारित रूटों पर बड़ी संख्या में सवारियां निकल रही हैं। बसों की कमी के चलते रूटों पर बसों की संख्या कम हो गई है।
हालत यह है फैजाबाद डिपो पर शाम होते ही बसों का टोटा हो जाता है। कभी-कभी घंटों खड़े होने के बाद भी यात्रियों को बसें नहीं मिलती हैं। सहारा सिर्फ बाहरी डिपो की बसों का रहता है।
हालांकि अधिकारी यही बताते हैं कि संचालन व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन जिस डिपो की 55 बसें निकल जाएं वहां संचालन प्रभावित होना तय है।
देश-प्रदेश में किसी भी प्रकार का चुनाव हो तो परिवहन निगम की बसों को भारी मुनाफा मिलता है। कारण यह है कि चुनाव अयोग बसों को बुक कराता है और सीट बराबर की सवारियों पर बसें बुक होती है।
इसका भुगतान निर्वाचन आयोग की ओर से किया जाता है। इसमें परिवहन निगम का कोई घाटा नहीं होता हैं। एआरएम, फैजाबाद डिपो नंदकुमार चौधरी ने कहा कि परिवहन निगम के फैजाबाद डिपो से 55 बसें चुनाव में लगाई जानी हैं। 37 बसें जा चुकी हैं, शेष 18 बसें भी जल्द जाएंगी। हालांकि इससे संचालन व्यवस्था पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है।
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अयोध्या। जिले में परिवहन निगम की बसों का टोटा हो गया है। शाम होते ही बस अड्डे पर बसें नजर नहीं आती हैं। यात्रियों का सहारा सिर्फ बाहरी डिपो की आने वाली बसें बचती हैं। इनमें भी बड़ी मुश्किल से यात्रियों को स्थान मिल पाता है।
फैजाबाद डिपो की 55 बसें चुनावी बेड़े में शामिल हो गई हैं। इसके मद्देनजर संचालन व्यवस्था ढर्रे से उतर गई है लेकिन अधिकारियों का दावा है कि सब कुछ ठीक चल रहा है।
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परिवहन निगम के फैजाबाद डिपो में अनुबंधित को जोड़कर 138 बसें संचालित होती हैं। इसमें कानपुर-गोरखपुर, बहराइच-इलाहाबाद, आजमगढ़-कानपुर व दिल्ली मार्ग पर बड़ी संख्या में सवारियां निकलती हैं।
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लोक सभा चुनाव के मद्देनजर फैजाबाद डिपो की 55 बसें चुनावी बेड़े में शामिल की गई है। इसमें से निर्वाचन आयोग ने मौजूदा समय में 37 बसें परिवहन निगम से ले लिया है, शेष 18 बसें भी जल्द ली जाएंगी।
दूसरी ओर समस्या यह है कि रामनवमी के बाद लगन का सिलसिला शुरू हो गया है। फैजाबाद डिपो के निर्धारित रूटों पर बड़ी संख्या में सवारियां निकल रही हैं। बसों की कमी के चलते रूटों पर बसों की संख्या कम हो गई है।
हालत यह है फैजाबाद डिपो पर शाम होते ही बसों का टोटा हो जाता है। कभी-कभी घंटों खड़े होने के बाद भी यात्रियों को बसें नहीं मिलती हैं। सहारा सिर्फ बाहरी डिपो की बसों का रहता है।
हालांकि अधिकारी यही बताते हैं कि संचालन व्यवस्था पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन जिस डिपो की 55 बसें निकल जाएं वहां संचालन प्रभावित होना तय है।
देश-प्रदेश में किसी भी प्रकार का चुनाव हो तो परिवहन निगम की बसों को भारी मुनाफा मिलता है। कारण यह है कि चुनाव अयोग बसों को बुक कराता है और सीट बराबर की सवारियों पर बसें बुक होती है।
इसका भुगतान निर्वाचन आयोग की ओर से किया जाता है। इसमें परिवहन निगम का कोई घाटा नहीं होता हैं। एआरएम, फैजाबाद डिपो नंदकुमार चौधरी ने कहा कि परिवहन निगम के फैजाबाद डिपो से 55 बसें चुनाव में लगाई जानी हैं। 37 बसें जा चुकी हैं, शेष 18 बसें भी जल्द जाएंगी। हालांकि इससे संचालन व्यवस्था पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है।