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कर्जमाफी से वंचित किसानों के लिए बनेगा हेल्प डेस्क
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कर्जमाफी से वंचित किसानों के लिए बनेगी हेल्प डेस्क
अयोध्या। सरकार की महत्वपूर्ण कर्जमाफी योजना का लाभ पाने से विभिन्न कारणों से वंचित रहे किसानों को अब सरकार एक और मौका देने जा रही है। ऑनलाइन आवेदन के बाद भी बैंक, तहसील या अन्य पटल पर गड़बड़ी का शिकार होकर लाभ से वंचित किसानों के लिए अब हेल्प डेस्क की स्थापना की जा रही है। कृषि विभाग में स्थापित होने वाले इस पटल पर ऐसे किसान फिर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पूर्व अपने घोषणा पत्र में किसानों के एक लाख तक के कर्ज को माफ करने का एलान किया था। निजाम बदलने के बाद उस पर प्राथमिकता से अमल किया गया। जिसके तहत जिले के 72 हजार 592 किसान चिह्नित किए गए थे। सरकार की ओर से पात्रता निर्धारित करने के बाद इनमें से बहुत से किसान वंचित हो गए।
जिसमें प्रमुख कारण, ऋण खाते का नवीनीकरण न होना, देय धनराशि मार्च 2016 तक शून्य होना, ऋण खातों पर आधार फीड न होना, चार हेक्टेयर से अधिक की भूमि होना, एक ही जमीन पर दो या अधिक बैंकों से ऋण होना, अभिलेख पूर्ण न होने, ऋण लिए गए गाटों की उस समय जांच न हो पाने आदि प्रमुख रहे।
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अब तक करीब पांच चरणों में 58 हजार 84 किसानों का कुल 259 करोड़ कर्ज माफ किया गया। तकनीकी दांवपेंच के कारण पात्र होते हुए अपात्र की श्रेणी में रहे किसानों के लिए सरकार ने ऑनलाइन शिकायतें मांगी और ऑनलाइन पोर्टल संचालित किया। हाल ही में प्राप्त हुई शिकायतों के सत्यापन के उपरांत 12 सौ और लोगों को लाभ मिलेगा।
इन सबके बावजूद भी कई किसान पात्र होते हुए भी लाभ से वंचित रह गए हैं। घूरीटीकर निवासी प्रमोद कुमार की मार्च 2016 तक देनदारी एक लाख से अधिक थी। ऑनलाइन शिकायत के बाद भौतिक सत्यापन कराया गया, लेकिन बैंक ने गलती से करीब 30 हजार ही डिमांड भेजी। इसकी वजह से उनका मात्र उतनी ही राशि माफ हुई।
इसी तरह कई अन्य किसान आधार न होने, नामिनी न होने, बैंक की गलती से देयता कम करने, मुख्य सूची से वंचित रहने आदि विभिन्न कारणों से कर्जमाफी का लाभ न पा सके। ऐसे किसान लंबे समय से बैंक से लेकर जिले के उच्चाधिकारियों सहित शासन-प्रशासन तक चक्कर काट रहे थे। कुछ कृषकों का ऋण गैर जनपद से स्वीकृत होने के फेर में भी कर्जमाफी से वंचित हो गए थे।
इन तमाम कारणों से कर्जमाफी को लेकर सरकार की किरकिरी भी शुरू हो गई थी। रुदौली के एक प्रकरण में रुदौली विधायक रामचंद्र यादव ने सदन में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इन्हीं सब मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए शासन की ओर से अब इन किसानों को लाभान्वित करने का एक मौका दिया जा रहा है।
जिला मुख्यालय पर इसके लिए एक हेल्प डेस्क की स्थापना की जा रही है। पांच दिसंबर को इस आशय का पत्र शासन से प्राप्त हुआ था। इसके लिए एक कर्मचारी की तैनाती की जाएगी। जो किसानों से उनके आवेदन व सभी प्रपत्र जमा कराएगा। उनके सत्यापन आदि के उपरांत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली जिला स्तरीय समिति की बैठक में अनुमोदन के उपरांत शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
इसको लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने समीक्षा बैठक कर विभागीय अधिकारियों को अनेक दिशा-निर्देश दिया। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि जिले में अब तक 58 हजार 85 किसानों का 259 करोड़ कर्ज माफ हो चुका है। अब भी विभिन्न कारणों से वंचित रहे किसानों को एक और मौका दिया जा रहा है। शीघ्र ही इसके लिए कार्यालय में हेल्प डेस्क की स्थापना की जाएगी, जहां संबंधित किसान शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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अयोध्या। सरकार की महत्वपूर्ण कर्जमाफी योजना का लाभ पाने से विभिन्न कारणों से वंचित रहे किसानों को अब सरकार एक और मौका देने जा रही है। ऑनलाइन आवेदन के बाद भी बैंक, तहसील या अन्य पटल पर गड़बड़ी का शिकार होकर लाभ से वंचित किसानों के लिए अब हेल्प डेस्क की स्थापना की जा रही है। कृषि विभाग में स्थापित होने वाले इस पटल पर ऐसे किसान फिर शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पूर्व अपने घोषणा पत्र में किसानों के एक लाख तक के कर्ज को माफ करने का एलान किया था। निजाम बदलने के बाद उस पर प्राथमिकता से अमल किया गया। जिसके तहत जिले के 72 हजार 592 किसान चिह्नित किए गए थे। सरकार की ओर से पात्रता निर्धारित करने के बाद इनमें से बहुत से किसान वंचित हो गए।
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जिसमें प्रमुख कारण, ऋण खाते का नवीनीकरण न होना, देय धनराशि मार्च 2016 तक शून्य होना, ऋण खातों पर आधार फीड न होना, चार हेक्टेयर से अधिक की भूमि होना, एक ही जमीन पर दो या अधिक बैंकों से ऋण होना, अभिलेख पूर्ण न होने, ऋण लिए गए गाटों की उस समय जांच न हो पाने आदि प्रमुख रहे।
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अब तक करीब पांच चरणों में 58 हजार 84 किसानों का कुल 259 करोड़ कर्ज माफ किया गया। तकनीकी दांवपेंच के कारण पात्र होते हुए अपात्र की श्रेणी में रहे किसानों के लिए सरकार ने ऑनलाइन शिकायतें मांगी और ऑनलाइन पोर्टल संचालित किया। हाल ही में प्राप्त हुई शिकायतों के सत्यापन के उपरांत 12 सौ और लोगों को लाभ मिलेगा।
इन सबके बावजूद भी कई किसान पात्र होते हुए भी लाभ से वंचित रह गए हैं। घूरीटीकर निवासी प्रमोद कुमार की मार्च 2016 तक देनदारी एक लाख से अधिक थी। ऑनलाइन शिकायत के बाद भौतिक सत्यापन कराया गया, लेकिन बैंक ने गलती से करीब 30 हजार ही डिमांड भेजी। इसकी वजह से उनका मात्र उतनी ही राशि माफ हुई।
इसी तरह कई अन्य किसान आधार न होने, नामिनी न होने, बैंक की गलती से देयता कम करने, मुख्य सूची से वंचित रहने आदि विभिन्न कारणों से कर्जमाफी का लाभ न पा सके। ऐसे किसान लंबे समय से बैंक से लेकर जिले के उच्चाधिकारियों सहित शासन-प्रशासन तक चक्कर काट रहे थे। कुछ कृषकों का ऋण गैर जनपद से स्वीकृत होने के फेर में भी कर्जमाफी से वंचित हो गए थे।
इन तमाम कारणों से कर्जमाफी को लेकर सरकार की किरकिरी भी शुरू हो गई थी। रुदौली के एक प्रकरण में रुदौली विधायक रामचंद्र यादव ने सदन में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। इन्हीं सब मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए शासन की ओर से अब इन किसानों को लाभान्वित करने का एक मौका दिया जा रहा है।
जिला मुख्यालय पर इसके लिए एक हेल्प डेस्क की स्थापना की जा रही है। पांच दिसंबर को इस आशय का पत्र शासन से प्राप्त हुआ था। इसके लिए एक कर्मचारी की तैनाती की जाएगी। जो किसानों से उनके आवेदन व सभी प्रपत्र जमा कराएगा। उनके सत्यापन आदि के उपरांत जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली जिला स्तरीय समिति की बैठक में अनुमोदन के उपरांत शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
इसको लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने समीक्षा बैठक कर विभागीय अधिकारियों को अनेक दिशा-निर्देश दिया। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि जिले में अब तक 58 हजार 85 किसानों का 259 करोड़ कर्ज माफ हो चुका है। अब भी विभिन्न कारणों से वंचित रहे किसानों को एक और मौका दिया जा रहा है। शीघ्र ही इसके लिए कार्यालय में हेल्प डेस्क की स्थापना की जाएगी, जहां संबंधित किसान शिकायत दर्ज करा सकते हैं।