फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   राममंदिर के साथ ‘भइया’ का वोट भी साध रही शिवसेना

राममंदिर के साथ ‘भइया’ का वोट भी साध रही शिवसेना

Sun, 25 Nov 2018 12:08 AM IST
Updated Sun, 25 Nov 2018 12:08 AM IST
विज्ञापन
राममंदिर के साथ ‘भइया’ का वोट भी साध रही शिवसेना
राममंदिर के साथ ‘भइया’ का वोट भी साध रही शिवसेना
विज्ञापन

अयोध्या। राममंदिर के साथ शिवसेना मुंबई के ‘भइया’ यानि उत्तर भारतीय वोट बैंक को भी साधने में जुटी है। पहले मंदिर फिर सरकार...के पीछे उत्तर भारतीयों को खासी प्रमुखता मिल रही है।

यहां महाराष्ट्र से आए करीब पांच हजार शिवसैनिकों में से 50 फीसदी पूरब के हैं। अवध के जिलों के अलावा जौनपुर, गाजीपुर, भदोही, इलाहाबाद, आजमगढ़ के शिवसैनिकों को अयोध्या की कमान सौंपी गई है।
विज्ञापन


इन्हें अनुशासन और धैर्य के साथ न सिर्फ उद्धव ठाकरे के कार्यक्रम के लिए हवा बनानी है बल्कि विहिप की धर्मसभा में भी जाकर रामभक्तों को मोदी से सावधान करने और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व की अहमियत समझाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अयोध्या में आए मराठी शिवसैनिकों को खास ताकीद दी गई है कि वे हिंदी में ही बात कर दिल जीतने की पूरी कोशिश करेंगे। कोई भड़काऊ एक्टिविटी नहीं दिखनी चाहिए।

इसलिए शिवसेना के उग्र तेवर वाले युवा और महिला विंग को अयोध्या आने की इजाजत नहीं दी गई। मुंबई हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एके दूबे जौनपुर जिले के रामपुर के रहने वाले हैं।

वे कल्याण विहिप के कार्याध्यक्ष हैं। कहते हैं कि अयोध्या आने से ठीक पहले शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट संदेश दिया था कि अयोध्या में शिवसैनिकों को अपने अनुशासन और धैर्य की परीक्षा देनी है।

हम विहिप से जुड़े हैं लेकिन मुंबई में शिवसेना हिंदुत्व को लेकर भाजपा से ज्यादा मुखर है। उत्तर भारतीयों के मन में शिवसेना की अब पुरानी छवि नहीं रही। राममंदिर मुद्दे पर पहले मंदिर फिर सरकार के नारे ने उद्धव ठाकरे को और चहेता बना दिया है।

वे मोदी-योगी की तरह ढुलमुल नहीं साफ बात करते हैं। कल्याण में बिल्डर माधव सिंह भी अयोध्या आए हुए हैं, वे गाजीपुर के रहने वाले हैं। कहते हैं कि अगले लोकसभा चुनाव में आम ‘भइया’ वोट कांग्रेस और भाजपा को बॉय-बॉय करने वाला है।

आजमगढ़ के लालगंज निवासी रामआसरे पहुंचू चौहान भी कल्याण में बिल्डर हैं। कहते हैं कि राममंदिर आंदोलन का बिगुल अयोध्या से फूंककर शिवसेना प्रमुख ने उत्तर भारतीयों का दिल जीत लिया है। अमेठी के महेश राम कृपाल त्रिपाठी मुंबई में कॉलेज चलाते हैं।

बोले-40 साल से महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से देख रहे हैं। मातोश्री का चेहरा काफी बदल गया है। अयोध्या चलो...के नारे ने तो उत्तर भारतीयों को मराठियों का नेतृत्व करने का मौका दिया है। 25-25 की बनाई गई टोली में भइया ही सुप्रीम हैं।

यहां शिवसेना का कार्य व्यवहार देख एक नया संदेश पूरे विश्व में जाएगा। कल्याण में रिक्शा चलाने वाले मनोहर दादा राम आठवले और मनोहर शंकर राने के साथ भदोही निवासी मुंबई के डोंबीवली में रिक्शा चलाने वाले बबलू उपाध्याय शिवसेना के नए रूप से खासे प्रभावित दिखे।

बोले कि अगले चुनाव में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए उत्तर भारतीयों का 80 फीसदी समर्थन शिवसेना को मिलेगा। समाजसेवी भदोही निवासी विश्वनाथ दुबे हों या डोंबीवली में ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले सागर, सभी की जुबान पर जय भवानी, जय शिवसेना...का नारा था।

मराठी शिवसैनिक तात्या साहब माने, रमेश गांगे, शरद पाटिल, अनंत रे कहते हैं कि कल्याण में अंबरनाथ का बुआ पाड़ा, कल्याण ईस्ट, खड़े गोलवली, शंकर पान्से रोड, कोलसे वाड़ी, उल्लासनगर समेत कई इलाके उत्तर भारतीयों के गढ़ हैं।

यहां चार लाख उत्तर भारतीय वोट निर्णायक होता है। अब शिवसेना इन्हें पूरी तरह साध चुकी है। हम लोग हिंदी बोलना सीख चुके हैं, उत्तर भारतीयों के हर दुख-सुख में कंधे से कंधा मिलाकर काम करते हैं।

दो ट्रेनों में अयोध्या आए करीब पांच हजार शिवसैनिक महाराष्ट्र की छह लोकसभा क्षेत्रों से हैं। पहला जत्था थाणे से शुक्रवार रात्रि 10 बजे पहुंचा, जबकि दूसरा जत्था नासिक से शनिवार सुबह 7 बजे यहां पहुंचा।

कल्याण के नगर सेवक शरद पाटिल और अनंत रे कहते हैं कि शिवसेना महाराष्ट्र में ही नहीं उत्तर भारत में भी 2019 के चुनाव में दम दिखाएगी। भाजपा बाप बनने की कोशिश कर रही है। महाराष्ट्र में 50-50 सीट की बात कर रही है।

जबकि अकेले शिवसेना उत्तर भारतीयों के समीकरण के साथ सबसे ज्यादा सीटें जीतेगी। मुंबई महानगर पालिका के हाल में हुए चुनाव में उत्तर भारतीय समीकरण का खासा दबदबा दिखा था। 227 सीटों में 150 सीटों पर उत्तर भारतीय मतदाता निर्णायक भूमिका में रहे।

कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 36 सीटें उत्तर भारतीयों को दी थी, जबकि भाजपा ने 25, राकांपा ने 13 और शिवसेना ने चार सीटें दी थीं। उत्तर भारतीयों का मुखर विरोध करने वाली मनसे ने भी एक सीट पर उम्मीदवार उतारा था।

इन्हें साधकर भाजपा ने शिवसेना को अपना मजबूत दम दिखाया था। इसी के बाद से शिवसेना काफी सचेत हुई है। अयोध्या आए वरिष्ठ पत्रकार दयाशंकर पाठक हडिया इलाहाबाद के निवासी हैं।


वे कहते हैं कि रिटायर होने के बाद उन्हें सबसे अच्छी शिवसेना लगी इसलिए भगवा धारण कर अयोध्या आए हैं। पहले मंदिर फिर सरकार उत्तर भारतीयों के वोट बैंक पर शिवसेना की पकड़ साबित करेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed