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सूख गया रामनगरी का पौराणिक अग्निकुंड
Updated Sat, 01 Jul 2017 12:36 AM IST
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सूख गया रामनगरी का पौराणिक अग्निकुंड
कुंड का स्वरूप भी हुआ बदहाल, जानवराें का बना चारागाह
अमर उजाला ब्यूरो
अयोध्या। अयोध्या की गरिमा व संस्कृति के द्योतक पौराणिक व ऐतिहासिक स्थल संरक्षण के अभाव में बदहाल हो रहे हैं। रामनगरी के ऐतिहासिक कुंडों-सरोवरों का कोई पुरसाहाल नहीं है। पौराणिक अग्निकुंड पूरी तरह सूख गया है।
केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश की योगी सरकार अयोध्या के विकास के लिए नित नई-नई घोषणाएं कर रही है। करोड़ों का बजट भी दिया जा रहा है। इसके बावजूद रामनगरी के अधिक तर कुंड जलविहीन हो चुके हैं। कुछ पर भूमाफिया की टेड़ी नजर है। अयोध्या के सीताकुंड मोहल्ले में स्थित अग्निकुंड पूरी तरह से जलविहीन होकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा कर रहा है। कुंड में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आयी हैं। कुंड के चारों तरफ रेलिंग अधिकतर स्थानों पर टूट गई है। कुंड का स्वरूप बदहाल होता जा रहा है। सांयकाल होते ही यह कुंड नशेड़ियों व अराजकतत्वों का अड्डा बन जाता है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह कुंड चारागाह बन गया है।
शास्त्रों में वर्णित है कुंड की महिमा
अग्निकुंड की महिमा शास्त्रों में वर्णित है। पंडित कौशल्यानंद वर्धन बताते हैं कि अग्निकुंड में स्नान करने से तन, भजन करने से मन व दान करने से धन शुद्ध होता है। शास्त्रों में कुंड को अज्ञान व अंधकारनाशक बताया है। यही नहीं वेद पारंगत ब्राह्मणों ने दाक्षिणाग्नि, गार्हपत्या अग्नि एवं हवनीय अग्नि की स्थापना भी यहीं पर की थी। ऐसी मान्यता है कि हर साल अगहन कृष्ण प्रतिपदा को इस कुंड की परिक्रमा कर नारियल, चुनरी, पान आदि अर्पित करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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करेंगे सौंदर्यीकरण की मांग
अयोध्या के पौराणिक स्थलों के संरक्षण हेतु प्रयासरत रहने वाली संस्था एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा के अध्यक्ष राजकुमार दास भी अयोध्या के कुंडों की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए उम्मीद व्यक्त करते हैं कि भाजपा सरकार में निश्चित ही पौराणिक स्थलों का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण होगा। वहीं महामंत्री रामदास कहते हैं कि संस्था भी शासन-प्रशासन का ध्यानाकृष्ट कर कुंडों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की मांग उठाएगी।
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कुंड का स्वरूप भी हुआ बदहाल, जानवराें का बना चारागाह
अमर उजाला ब्यूरो
अयोध्या। अयोध्या की गरिमा व संस्कृति के द्योतक पौराणिक व ऐतिहासिक स्थल संरक्षण के अभाव में बदहाल हो रहे हैं। रामनगरी के ऐतिहासिक कुंडों-सरोवरों का कोई पुरसाहाल नहीं है। पौराणिक अग्निकुंड पूरी तरह सूख गया है।
केंद्र की मोदी सरकार व प्रदेश की योगी सरकार अयोध्या के विकास के लिए नित नई-नई घोषणाएं कर रही है। करोड़ों का बजट भी दिया जा रहा है। इसके बावजूद रामनगरी के अधिक तर कुंड जलविहीन हो चुके हैं। कुछ पर भूमाफिया की टेड़ी नजर है। अयोध्या के सीताकुंड मोहल्ले में स्थित अग्निकुंड पूरी तरह से जलविहीन होकर अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा कर रहा है। कुंड में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आयी हैं। कुंड के चारों तरफ रेलिंग अधिकतर स्थानों पर टूट गई है। कुंड का स्वरूप बदहाल होता जा रहा है। सांयकाल होते ही यह कुंड नशेड़ियों व अराजकतत्वों का अड्डा बन जाता है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यह कुंड चारागाह बन गया है।
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शास्त्रों में वर्णित है कुंड की महिमा
अग्निकुंड की महिमा शास्त्रों में वर्णित है। पंडित कौशल्यानंद वर्धन बताते हैं कि अग्निकुंड में स्नान करने से तन, भजन करने से मन व दान करने से धन शुद्ध होता है। शास्त्रों में कुंड को अज्ञान व अंधकारनाशक बताया है। यही नहीं वेद पारंगत ब्राह्मणों ने दाक्षिणाग्नि, गार्हपत्या अग्नि एवं हवनीय अग्नि की स्थापना भी यहीं पर की थी। ऐसी मान्यता है कि हर साल अगहन कृष्ण प्रतिपदा को इस कुंड की परिक्रमा कर नारियल, चुनरी, पान आदि अर्पित करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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करेंगे सौंदर्यीकरण की मांग
अयोध्या के पौराणिक स्थलों के संरक्षण हेतु प्रयासरत रहने वाली संस्था एडवर्ड अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा के अध्यक्ष राजकुमार दास भी अयोध्या के कुंडों की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए उम्मीद व्यक्त करते हैं कि भाजपा सरकार में निश्चित ही पौराणिक स्थलों का संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण होगा। वहीं महामंत्री रामदास कहते हैं कि संस्था भी शासन-प्रशासन का ध्यानाकृष्ट कर कुंडों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की मांग उठाएगी।