फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   मरीजों पर आफत बनकर टूटी डॉक्टरों की हड़ताल

मरीजों पर आफत बनकर टूटी डॉक्टरों की हड़ताल

Mon, 17 Jun 2019 11:06 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jun 2019 11:06 PM IST
विज्ञापन
मरीजों पर आफत बनकर टूटी डॉक्टरों की हड़ताल
मरीजों पर आफत बनकर टूटी डॉक्टरों की हड़ताल
विज्ञापन



अयोध्या। पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों पर हुए प्राणघातक हमले के विरोध में आईएमए की हड़ताल का सोमवार को जिले में व्यापक असर दिखा। सभी निजी अस्पतालों में इलाज ठप होने से मरीजों में हाहाकार मच गया।


तमाम मरीज घर लौट आए, जबकि गंभीर हालत में कइयों को जिला अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां भीड़ से चिकित्सकीय इंतजाम ध्वस्त होते दिखे। मरीजों की कतारें लगने पर भी चिकित्सक के दर्शन नहीं हो पाए।
विज्ञापन



जिले में बेडयुक्त करीब 178 निजी अस्पताल संचालित हैं, जहां ओपीडी सेवाएं संचालित होती हैं। सोमवार को हड़ताल से निजी अस्पतालों में जाना मरीजों को भारी पड़ गया। कई मरीज गंभीरावस्था में अस्पताल के बाहर व अंदर कराहते रहे, लेकिन चिकित्सक अपने निर्णय पर डटे रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन



हालात ये रहे कि अधिकांश अस्पतालों में तालाबंदी की स्थिति रही। कुछ बड़े अस्पताल तो खुले रहे, मगर वहां सिर्फ भर्ती मरीजों का ही इलाज किया गया। डॉक्टर सुबह राउंड लेकर मरीजों का हालचाल जानने के बाद ओपीडी में नहीं बैठे।


निजी अस्पतालों में हड़ताल के बाद मजबूरी में मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, मगर वहां उन्हें अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ा। प्रतिदिन डेढ़ हजार तक पहुंचने वाली ओपीडी सोमवार को करीब दो हजार पहुंच गई। ओपीडी मरीजों से खचाखच भरी रही।


बाहर बैठने के पर्याप्त इंतजाम न होने से फर्श पर ही मरीजों को बैठना पड़ा। 12 बजे तक एक्सरे सेवा मिलने की बाध्यता की वजह से व अल्ट्रासाउंड सेवा ठप होने से मरीज इधर-उधर भटकने को विवश हुए। पीएमएस संघ की केंद्रीय कार्यकारिणी का चुनाव होने से कुछ चिकित्सक भी ओपीडी में पूरे समय नहीं बैठे, इससे मरीजों को और दिक्कतें हुईं।



पश्चिम बंगाल के एनआरएस मेडिकल कॉलेज में बीते दिनों में चिकित्सकों पर तीमारदारों के हमले के बाद वहां की मुख्यमंत्री के रवैये से क्षुब्ध डॉक्टरों की हड़ताल की आंच सोमवार को यहां भी पहुंची। सोमवार सुबह छह बजे से 24 घंटे तक हड़ताल का निर्णय शीर्ष नेतृत्व ने लिया, जिससे जिले में हाहाकार की स्थिति रही।


आईएमए अध्यक्ष डॉ. एसपी बंसल व सचिव डॉ. निशांत सक्सेना के नेतृत्व में चिकित्सकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर डॉक्टरों को सुरक्षा दिलाने की मांग की। इसके बाद इन्हीं मांगों को लेकर राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में बैठक कर घटना की निंदा की गई।


वहीं, पीएमएस संघ के अध्यक्ष डॉ. रामकिशोर के नेतृत्व में जिला अस्पताल सहित सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताते हुए मरीजों का इलाज किया।


डॉ. निशांत सक्सेना ने बताया कि जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में हड़ताल के संबंध में बैठक की गई थी, जिसमें इमरजेंसी सेवाएं संचालित करने और ओपीडी बंद रखने का निर्णय लिया गया था, जिस पर अमल किया गया है।



जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके राय ने बताया कि आईएमए की हड़ताल से सोमवार को जिला अस्पताल में मरीजों को भारी भीड़ रही। ओपीडी में मरीजों की संख्या दो हजार तक पहुंच गई। फिलहाल बिना किसी समस्या के इलाज किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed