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अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने उमड़ा महिलाओं का सैलाब
Updated Wed, 14 Nov 2018 12:16 AM IST
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छठ पर घर से घाट तक गूंजे देवी गीत, अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने उमड़ी महिलाएं
अयोध्या/फैजाबाद। कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकच जाए...आदि छठ माता के गीतों के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने मंगलवार को शहर के सरयू घाटों पर परिवार समेत व्रती महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
यही हाल जिलेभर में जलाशयों के किनारे दिखा। वेदी सजाकर व्रती महिलाओं ने शाम को कमर भर पानी में खड़ा होकर अस्ताचलगामी सूर्य को जल व दूध से अर्घ्य दिया। इसके बाद छठ माता को 36 प्रकार के फलों का भोग लगाकर महाआरती की गई।
बुधवार को सूर्योदय के समय फिर घाटों पर अर्घ्य देकर महाआरती के साथ चार दिनी छठ व्रत का समापन होगा।आस्था के महापर्व छठ्योत्सव पर सूर्यास्त के पहले सरयू तट की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
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व्रती महिलाएं गीत गाते हुए घर से निकलीं तो परिवार के सदस्य कदम से कदम मिलाते हुए फलों की बहंगी समेत पूजन-अर्चन की सामग्री और गन्ना लेकर परिवार के साथ चल रहे थे। कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए..।
हंसि-हंसि बोलेले महादेव सुना ए छठि मइया, हम राउर दुबिया छिलाई देबों चनन छिरिक देबों’ जैसे गीत सुनकर सभी भावुक हो उठे। कई व्रती दंडवत लेटकर घाटों तक पहुंची।
नगर में गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या में संत तुलसी दास, नयाघाट घाट, राम की पैड़ी समेत कुंडों व अन्य घाटों पर मेले का माहौल रहा। महिलाओं ने विधिपूर्वक भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना के बाद अर्घ्य दिया।
इसके बाद घाटों पर सजाई गई वेदी पर 36 प्रकार के फलों व पकवानों के चढ़ाकर छठ माता से बच्चों व परिवार के लिए प्रार्थना की गई। फिर महाआरती हुई। बुधवार को सुबह पर सप्तमी तिथि पर सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देकर महा आरती होगी। इसके बाद व्रती महिलाएं निराजल-निराहार व्रत का पारण करेंगी।
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अयोध्या/फैजाबाद। कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकच जाए...आदि छठ माता के गीतों के साथ अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने मंगलवार को शहर के सरयू घाटों पर परिवार समेत व्रती महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
यही हाल जिलेभर में जलाशयों के किनारे दिखा। वेदी सजाकर व्रती महिलाओं ने शाम को कमर भर पानी में खड़ा होकर अस्ताचलगामी सूर्य को जल व दूध से अर्घ्य दिया। इसके बाद छठ माता को 36 प्रकार के फलों का भोग लगाकर महाआरती की गई।
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बुधवार को सूर्योदय के समय फिर घाटों पर अर्घ्य देकर महाआरती के साथ चार दिनी छठ व्रत का समापन होगा।आस्था के महापर्व छठ्योत्सव पर सूर्यास्त के पहले सरयू तट की ओर जाने वाले मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही।
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व्रती महिलाएं गीत गाते हुए घर से निकलीं तो परिवार के सदस्य कदम से कदम मिलाते हुए फलों की बहंगी समेत पूजन-अर्चन की सामग्री और गन्ना लेकर परिवार के साथ चल रहे थे। कांच ही बांस की बहंगिया, बहंगी लचकत जाए..।
हंसि-हंसि बोलेले महादेव सुना ए छठि मइया, हम राउर दुबिया छिलाई देबों चनन छिरिक देबों’ जैसे गीत सुनकर सभी भावुक हो उठे। कई व्रती दंडवत लेटकर घाटों तक पहुंची।
नगर में गुप्तारघाट से लेकर अयोध्या में संत तुलसी दास, नयाघाट घाट, राम की पैड़ी समेत कुंडों व अन्य घाटों पर मेले का माहौल रहा। महिलाओं ने विधिपूर्वक भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना के बाद अर्घ्य दिया।
इसके बाद घाटों पर सजाई गई वेदी पर 36 प्रकार के फलों व पकवानों के चढ़ाकर छठ माता से बच्चों व परिवार के लिए प्रार्थना की गई। फिर महाआरती हुई। बुधवार को सुबह पर सप्तमी तिथि पर सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देकर महा आरती होगी। इसके बाद व्रती महिलाएं निराजल-निराहार व्रत का पारण करेंगी।