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मल्लिका-ए-गजल के नाम से बनेगी संगीत कला अकादमी
Updated Tue, 13 Mar 2018 01:04 AM IST
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मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर के नाम से बनेगी संगीत कला अकादमी
फैजाबाद। मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर के नाम से प्रसिद्ध अख्तरी बाई फैजाबादी के नाम पर अवध विश्वविद्यालय भव्य संगीत कला अकादमी खोलने जा रहा है। इसका ब्लू प्रिंट तैयार हो गया है। इसके निर्माण की लागत 42 करोड़ 66 लाख आंकी गई है। सात स्वरों सा-रे-गा-मा-पा-धा-नि... के नाम पर सात फैकल्टी बनेगी। यह एक कॉमन बड़े हाल से कनेक्ट होगी। एक भव्य प्रवेश हाल बनेगा, जहां संगीत का म्यूजियम भी सजेगा।
फैजाबाद भदेसरा कस्बे में जन्मी बेगम अख्तर के नाम से प्रसिद्ध अख्तरी बाई फैजाबादी ने दादरा, ठुमरी व गजल गायकी में अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज कराया है। अवध विश्वविद्यालय ने आईटी के नए परिसर के पास उपलब्ध 35 एकड़ के खाली पड़े भू-भाग के एक हिस्से में 9 हजार 951 वर्ग मीटर में बेगम अख्तर संगीत कला अकादमी बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक इसे बनाने में कुल लागत 42 करोड़ 66 लाख 36 हजार रुपये आएगी। आर्किटेक्ट अनुपम अग्रवाल ने इसकी भव्य डिजाइन तैयार की है। इसमें कुल नौ हाल बनेंगे। जिसमें मध्य में सबसे बड़ा हाल सभी अन्य हाल से सीधा कनेक्ट होगा। सात हाल एक साइज के होंगे। जबकि प्रवेश हाल काफी भव्य व संगीत के म्यूजियम से सजा होगा। कुल सातों फैकल्टी में विद्यार्थियों के प्रशिक्षण का इंतजाम होगा। सभी फेकल्टी में अलग-अलग संगीत की विधाएं सिखाई जाएगी।
स्वरों से होगी फैकल्टी की पहचान
फैकल्टी- रंग- प्रशिक्षण
सा... नीला विंड इंस्ट्रूमेंट
रे... लाल स्ट्रींग इंस्ट्रूमेंट
गा... पीला राइमिक इंस्ट्रूमेंट
मा... नीला मध्यम ऑल अदर इंस्ट्रूमेंट
पा... लाल मध्यम शास्त्रीय संगीत
धा... पीला मध्यम लाइट क्लासिकल वोकल सुगम संगीत
नि... नीला हल्का रवींद्र संगीत
मुख्य परीक्षा के बाद होगा शिलान्यास : कुलपति
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने बताया कि बेगम अख्तर संगीत कला अकादमी बनाने की तैयारी तेजी से चल रही है। यह विश्वविद्यालय ने आईटी नया परिसर के पास उपलब्ध 35 एकड़ के खाली पड़े भू भाग के एक हिस्से में 9 हजार 951 वर्ग मीटर में बनेगा। प्रोजेक्ट रिपोर्ट बन गई है। मास्टर प्लान दो दिन में फाइनल हो जाएगा। विश्वविद्यालय की विभिन्न कमेटियों की स्वीकृति के बाद धन उपलब्ध कराते हुए मुख्य परीक्षा के बाद इसका शिलान्यास कराया जाएगा। इससे यहां जन्मी बेगम अख्तर की जहां याद ताजा होगी, वहीं नई पीढ़ी संगीत की सभी विधाओं से परिचित होकर कॅरिअर में मुकाम गढ़ेगी।
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फैजाबाद में जन्मी मल्लिका-ए-गजल थीं अख्तरी बाई
बेगम अख्तर के नाम से प्रसिद्ध अख्तरी बाई फैजाबादी दादरा, ठुमरी व गजल में गायकी से एक मिशाल कायम की थी। उनका तल्लफुस बहुत साफ था और वो खनकती हुई आवाज की मालकिन थीं। मशहूर गजल ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया.. के अलावा बेगम अख्तर ने संगीत प्रेमियों को गजलों की कीमती विरासत सौंपी है। बेगम अख्तर का जन्म 7 अक्तूबर 1914 को फैजाबाद के भदरसा में हुआ था। 1938 में वह एक फिल्म कंपनी के काम के लिए लखनऊ आई थीं। हालांकि 1941 में मुंबई चली गईं। लखनऊ के भातखंडे में वह एक लंबे अरसे तक विजीटर प्रोफेसर रहीं। बेगम ने जिस खास अंदाज के साथ गजलें गाईं उसी अंदाज में उन्होंने ठुमरी व दादरा भी पेश किए। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर उनकी वसीयत के मुताबिक ठाकुरगंज के पास पसंदबाग में अपनी मां के पास ही दफन किया गया। उन्हें कला के क्षेत्र में भारत सरकार ने पहले पद्म श्री व सन 1975 में मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें मल्लिका-ए-गजल के खिताब से नवाजा गया था।
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फैजाबाद। मल्लिका-ए-गजल बेगम अख्तर के नाम से प्रसिद्ध अख्तरी बाई फैजाबादी के नाम पर अवध विश्वविद्यालय भव्य संगीत कला अकादमी खोलने जा रहा है। इसका ब्लू प्रिंट तैयार हो गया है। इसके निर्माण की लागत 42 करोड़ 66 लाख आंकी गई है। सात स्वरों सा-रे-गा-मा-पा-धा-नि... के नाम पर सात फैकल्टी बनेगी। यह एक कॉमन बड़े हाल से कनेक्ट होगी। एक भव्य प्रवेश हाल बनेगा, जहां संगीत का म्यूजियम भी सजेगा।
फैजाबाद भदेसरा कस्बे में जन्मी बेगम अख्तर के नाम से प्रसिद्ध अख्तरी बाई फैजाबादी ने दादरा, ठुमरी व गजल गायकी में अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज कराया है। अवध विश्वविद्यालय ने आईटी के नए परिसर के पास उपलब्ध 35 एकड़ के खाली पड़े भू-भाग के एक हिस्से में 9 हजार 951 वर्ग मीटर में बेगम अख्तर संगीत कला अकादमी बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक इसे बनाने में कुल लागत 42 करोड़ 66 लाख 36 हजार रुपये आएगी। आर्किटेक्ट अनुपम अग्रवाल ने इसकी भव्य डिजाइन तैयार की है। इसमें कुल नौ हाल बनेंगे। जिसमें मध्य में सबसे बड़ा हाल सभी अन्य हाल से सीधा कनेक्ट होगा। सात हाल एक साइज के होंगे। जबकि प्रवेश हाल काफी भव्य व संगीत के म्यूजियम से सजा होगा। कुल सातों फैकल्टी में विद्यार्थियों के प्रशिक्षण का इंतजाम होगा। सभी फेकल्टी में अलग-अलग संगीत की विधाएं सिखाई जाएगी।
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स्वरों से होगी फैकल्टी की पहचान
फैकल्टी- रंग- प्रशिक्षण
सा... नीला विंड इंस्ट्रूमेंट
रे... लाल स्ट्रींग इंस्ट्रूमेंट
गा... पीला राइमिक इंस्ट्रूमेंट
मा... नीला मध्यम ऑल अदर इंस्ट्रूमेंट
पा... लाल मध्यम शास्त्रीय संगीत
धा... पीला मध्यम लाइट क्लासिकल वोकल सुगम संगीत
नि... नीला हल्का रवींद्र संगीत
मुख्य परीक्षा के बाद होगा शिलान्यास : कुलपति
अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने बताया कि बेगम अख्तर संगीत कला अकादमी बनाने की तैयारी तेजी से चल रही है। यह विश्वविद्यालय ने आईटी नया परिसर के पास उपलब्ध 35 एकड़ के खाली पड़े भू भाग के एक हिस्से में 9 हजार 951 वर्ग मीटर में बनेगा। प्रोजेक्ट रिपोर्ट बन गई है। मास्टर प्लान दो दिन में फाइनल हो जाएगा। विश्वविद्यालय की विभिन्न कमेटियों की स्वीकृति के बाद धन उपलब्ध कराते हुए मुख्य परीक्षा के बाद इसका शिलान्यास कराया जाएगा। इससे यहां जन्मी बेगम अख्तर की जहां याद ताजा होगी, वहीं नई पीढ़ी संगीत की सभी विधाओं से परिचित होकर कॅरिअर में मुकाम गढ़ेगी।
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फैजाबाद में जन्मी मल्लिका-ए-गजल थीं अख्तरी बाई
बेगम अख्तर के नाम से प्रसिद्ध अख्तरी बाई फैजाबादी दादरा, ठुमरी व गजल में गायकी से एक मिशाल कायम की थी। उनका तल्लफुस बहुत साफ था और वो खनकती हुई आवाज की मालकिन थीं। मशहूर गजल ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया.. के अलावा बेगम अख्तर ने संगीत प्रेमियों को गजलों की कीमती विरासत सौंपी है। बेगम अख्तर का जन्म 7 अक्तूबर 1914 को फैजाबाद के भदरसा में हुआ था। 1938 में वह एक फिल्म कंपनी के काम के लिए लखनऊ आई थीं। हालांकि 1941 में मुंबई चली गईं। लखनऊ के भातखंडे में वह एक लंबे अरसे तक विजीटर प्रोफेसर रहीं। बेगम ने जिस खास अंदाज के साथ गजलें गाईं उसी अंदाज में उन्होंने ठुमरी व दादरा भी पेश किए। उनके निधन के बाद पार्थिव शरीर उनकी वसीयत के मुताबिक ठाकुरगंज के पास पसंदबाग में अपनी मां के पास ही दफन किया गया। उन्हें कला के क्षेत्र में भारत सरकार ने पहले पद्म श्री व सन 1975 में मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उन्हें मल्लिका-ए-गजल के खिताब से नवाजा गया था।