फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ayodhya News ›   बाढ़ से डूबे गांवों-मोहल्लो में कटान से हड़कंप

बाढ़ से डूबे गांवों-मोहल्लो में कटान से हड़कंप

Tue, 22 Aug 2017 12:20 AM IST
Updated Tue, 22 Aug 2017 12:20 AM IST
विज्ञापन
बाढ़ से डूबे गांवों-मोहल्लो में कटान से हड़कंप
बाढ़ से डूबे गांवों व मोहल्लों में कटान तेज
विज्ञापन

नदी का जलस्तर घटा, मगर बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं नहीं हो रहीं कम
फैजाबाद। सरयू/घाघरा नदी के जलस्तर में गिरावट आ रही है, लेकिन लोगों की मुसीबतें कम नहीं हो रही हैं। सदर तहसील समेत रुदौली व सोहावल तहसील के करीब 24 गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं, वहीं,रुदौली के कैथा मांझा के बचे नौ मकान कटान की जद में हैं। इस गांव से संपर्क कटा हुआ है। बाढ़ खंड व राजस्व विभाग के मुताबिक जैसे-जैसे नदी का पानी कम होगा, वैसे-वैसे कटान और तेज होगी। कटान तेज होने से लोगों में हड़कंप है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के मुताबिक सोमवार की शाम चार बजे तक सरयू का जलस्तर 93.250 मीटर रिकॉर्ड किया गया जो कि अभी भी लाल निशान 92.73 मीटर से 52 सेंमी ऊपर है।
बाढ़ से अयोध्या के तटीय इलाके में करीब 100 घर प्रभावित हैं। रामघाट हाल्ट स्टेशन के पीछे बसे फटिक शिला मंदिर समेत करीब 45 मकान जलमग्न हैं। वहीं, रुदौली, पूरा, मया और सोहावल के कछारीय इलाकों में कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें पूरा बाजार इलाके के पिपरी संग्रामपुर, मूड़ाडीहा व सलेमपुर गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। रुदौली के कैथी माझा में बाकी बचे नौ घरों के लोगों ने अब मकान बचने की आस छोड़ दी है। वहीं, पूरा के मूड़ाडीहा से सैकड़ों लोगों का पलायन हो चुका है। यह लोग बिल्वहरि बंधे पर शरण लिए हैं। सलेमपुर में 25-30 घर व पूरे चेतन गांव में 30-40 मकान नदी में समा चुके हैं। राजापुर और मड़ना गांव के आंशिक हिस्से भी बाढ़ की चपेट में हैं।
विज्ञापन

एडीएम वित्त व राजस्व एमसी दूबे का कहना है कि बाढ़ का पानी घटने के बाद कटान व नुकसान का सर्वे होगा। फिलहाल पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता जेपी यादव के मुताबिक रुदौली, पूरा बाजार, मया बाजार और सोहावल के तटीय इलाकों में कटान का खतरा काफी बढ़ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन



नाकाफी है राहत सामग्री
बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन राहत सामग्री उपलब्ध कराने में नाकाम नजर आ रहा है। पीड़ितों का कहना है कि राहत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और जो मिल भी रहा है, वह ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। बिल्हरघाट बंधे पर शरण लिए बाढ़ पीड़ित अखिलेश, लालता, रामवीर का कहना है कि चुटकी भर राशन में अपना व परिवार का पेट भरना नामुमकिन है। घर व सारा सामान बाढ़ में बह गया है। ऐसे में भगवान के साथ सरकार ने भी साथ छोड़ दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed