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अयोध्या में ही भूल गए टाट में विराजमान रामलला का दर्द
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:20 AM IST
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर रामलला का भव्य मंदिर बनाने को लेकर देशभर में हुईं धर्मसभाएं कहीं सियासत का हिस्सा तो नहीं थीं। पांच राज्यों में चुनाव का क्या खत्म हुआ, यहां शनिवार से शुरू हुए समरसता कुंभ में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा ही गायब हो गया। वह भी तब, जब मंच पर स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हों और अध्यक्षता श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास कर रहे थे।
न मुख्यमंत्री ने चुप्पी तोड़ी, न ही संघ-विहिप व शीर्ष संतों ने ही टाट में विराजमान रामलला का दर्द बयां किया। नाराज कुछ युवकों व संतों ने योगी का भाषण खत्म होते ही मंदिर का निर्माण करो... की आवाज देने की कोशिश की, मगर दबकर रह गई। मायूस संतों ने कहा कि जब अयोध्या में ऐसी चुप्पी है तो प्रयागराज में मंदिर निर्माण की तिथि तय करने के एलान का क्या होगा।
अयोध्या में यह पहला अवसर था जब योगी आदित्यनाथ संतों के बीच थे। फिर भी राममंदिर की आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। वे मुख्यमंत्री बनने के बाद आठवीं बार अयोध्या आए थे। महत्वपूर्ण यह भी था कि धर्मसभा के बाद पहली बार आए। धर्मसभा में 25 नवंबर को यहां की गलियों-सड़कों व मठ-मंदिरों में राममंदिर के लिए लाखों रामभक्तों का उबाल और आक्रोश पूरे विश्व ने देखा था।
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किसी ने कल्पना नहीं की थी कि जिस हिंदुत्व के नाम पर सभी जातियों को कभी कारसेवा ने जोड़ा था। उसी अनुरूप एकजुटता के लिए आयोजित समरसता कुंभ में राम मंदिर की बात तक नहीं होगी। योगी के आने पर संघ के सह सरकार्यवाह भागैय्या जी और पूणे से आए स्वामी गोविंददेव गिरि ने करीब 45 मिनट ओजस्वी भाषण दिया। मगर, राम मंदिर निर्माण में देरी की तल्खी तो दूर, टाट में विराजमान रामलला का नाम तक नहीं लिया गया।
मंच के सामने की पंक्ति में विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय भी थे, जिन्होंने धर्मसभा में मंदिर के लिए बंटवारा नहीं, पूरी जमीन चाहिए की धमकी दी थी। विहिप के संगठन मंत्री दिनेशचंद समेत राम मंदिर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों बड़ी शख्सियतें भी आगे की कतार में मौजूद थीं। मगर राम मंदिर के सवाल पर सब चुप थे। इससे युवा वर्ग खासा निराश हुआ।
ठीक मंच के सामने शीर्ष संतों के बीच बैठे हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास भी उदास थै। बोले-हमने मुख्यमंत्री का एयरपोर्ट पर गुलाब देकर स्वागत किया था। मगर, ऐसा पहली बार देखा जब मंच पर साधु-संतों तक ने राम मंदिर की बात नहीं उठाई। श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास कहते हैं कि राममंदिर की बात न होना निराशाजनक है।
पुणे के स्वामी जी ने इतना जरूर कहा था कि योगी के हाथों शुभ काम होने वाला है, लेकिन राममंदिर का नाम नहीं लिया था। हमें उम्मीद है कि प्रयागराज कुंभ में विश्व भर के संत-धर्माचार्य राममंदिर बनाने की तिथि घोषित करेंगे। महंत वृजमोहन दास और छविरामदास भी निराश दिखे। कहना था कि समरसता कुंभ में राम की तो खूब चर्चा हुई, मगर टाट में रह रहे रामलला का दर्द किसी ने बयां नहीं किया।
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न मुख्यमंत्री ने चुप्पी तोड़ी, न ही संघ-विहिप व शीर्ष संतों ने ही टाट में विराजमान रामलला का दर्द बयां किया। नाराज कुछ युवकों व संतों ने योगी का भाषण खत्म होते ही मंदिर का निर्माण करो... की आवाज देने की कोशिश की, मगर दबकर रह गई। मायूस संतों ने कहा कि जब अयोध्या में ऐसी चुप्पी है तो प्रयागराज में मंदिर निर्माण की तिथि तय करने के एलान का क्या होगा।
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अयोध्या में यह पहला अवसर था जब योगी आदित्यनाथ संतों के बीच थे। फिर भी राममंदिर की आवाज उठाने वाला कोई नहीं था। वे मुख्यमंत्री बनने के बाद आठवीं बार अयोध्या आए थे। महत्वपूर्ण यह भी था कि धर्मसभा के बाद पहली बार आए। धर्मसभा में 25 नवंबर को यहां की गलियों-सड़कों व मठ-मंदिरों में राममंदिर के लिए लाखों रामभक्तों का उबाल और आक्रोश पूरे विश्व ने देखा था।
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किसी ने कल्पना नहीं की थी कि जिस हिंदुत्व के नाम पर सभी जातियों को कभी कारसेवा ने जोड़ा था। उसी अनुरूप एकजुटता के लिए आयोजित समरसता कुंभ में राम मंदिर की बात तक नहीं होगी। योगी के आने पर संघ के सह सरकार्यवाह भागैय्या जी और पूणे से आए स्वामी गोविंददेव गिरि ने करीब 45 मिनट ओजस्वी भाषण दिया। मगर, राम मंदिर निर्माण में देरी की तल्खी तो दूर, टाट में विराजमान रामलला का नाम तक नहीं लिया गया।
मंच के सामने की पंक्ति में विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री चंपत राय भी थे, जिन्होंने धर्मसभा में मंदिर के लिए बंटवारा नहीं, पूरी जमीन चाहिए की धमकी दी थी। विहिप के संगठन मंत्री दिनेशचंद समेत राम मंदिर आंदोलन से जुड़े सैकड़ों बड़ी शख्सियतें भी आगे की कतार में मौजूद थीं। मगर राम मंदिर के सवाल पर सब चुप थे। इससे युवा वर्ग खासा निराश हुआ।
ठीक मंच के सामने शीर्ष संतों के बीच बैठे हनुमानगढ़ी के पुजारी राजूदास भी उदास थै। बोले-हमने मुख्यमंत्री का एयरपोर्ट पर गुलाब देकर स्वागत किया था। मगर, ऐसा पहली बार देखा जब मंच पर साधु-संतों तक ने राम मंदिर की बात नहीं उठाई। श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास कहते हैं कि राममंदिर की बात न होना निराशाजनक है।
पुणे के स्वामी जी ने इतना जरूर कहा था कि योगी के हाथों शुभ काम होने वाला है, लेकिन राममंदिर का नाम नहीं लिया था। हमें उम्मीद है कि प्रयागराज कुंभ में विश्व भर के संत-धर्माचार्य राममंदिर बनाने की तिथि घोषित करेंगे। महंत वृजमोहन दास और छविरामदास भी निराश दिखे। कहना था कि समरसता कुंभ में राम की तो खूब चर्चा हुई, मगर टाट में रह रहे रामलला का दर्द किसी ने बयां नहीं किया।