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आए दिन मौतें, फिर भी जल पुलिस की तैनाती नहीं
Updated Tue, 24 Apr 2018 11:33 PM IST
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सरयू में आए दिन मौतें, फिर भी जल पुलिस की तैनाती नहीं
अयोध्या। सरयू का जलस्तर कम होने के साथ ही डूबने की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। अप्रैल, मई व जून माह में सर्वाधिक डूबने की घटनाएं होती हैं, इन महीनाें में पानी का जलस्तर कम हो जाता है, जिससे स्नान करते समय लोग पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाते जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद भी न निगरानी का इंतजाम है, न ही बचाव की बैरिकेडिंग की गई है। मेला के बाद यहां से पीएसी की बचाव टीमें हटा ली जाती है, जबकि रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। यहां जल पुलिस की स्थाई चौकी बनाने का आश्वासन कई बार दिया जा चुका है।
तैयारी के नाम पर पिछले वर्ष प्रशासन द्वारा लगभग 30 नाविकों एवं गोताखोरों को लाइफ जैकेट भी प्रदान की गई थी। शनिवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने आए दो युवक सरयू में समाहित हो गए। अप्रैल माह में ही अब तक चार लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। प्रशासन मेलों के दौरान घाट पर फ्लड कंपनी लगाता है लेकिन मेला खत्म होते ही यह कंपनी वापस चली जाती है। सरयू घाट के पास दुकान लगाने वाले राकेश पांडेय व दुकानदार कुलदीप यादव कहते हैं कि यदि घाट पर जल पुलिस की तैनाती हो जाए व स्नान करने के लिए एक निश्चित स्नान चिह्नित कर बैरीकेडिंग कर दी जाए तो दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। महेंद्र शुक्ला कहते हैं कि कई बार प्रशासन से घाट पर जल पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की गई है लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया का कहना है कि सरयू घाट पर जाल, रस्सा आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जाती है। सरयू घाट पर स्थायी जल पुलिस की तैनाती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, अनुमति मिलते ही जल पुलिस की तैनाती की जाएगी।
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अयोध्या। सरयू का जलस्तर कम होने के साथ ही डूबने की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। अप्रैल, मई व जून माह में सर्वाधिक डूबने की घटनाएं होती हैं, इन महीनाें में पानी का जलस्तर कम हो जाता है, जिससे स्नान करते समय लोग पानी की गहराई का अंदाजा नहीं लगा पाते जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। इसके बाद भी न निगरानी का इंतजाम है, न ही बचाव की बैरिकेडिंग की गई है। मेला के बाद यहां से पीएसी की बचाव टीमें हटा ली जाती है, जबकि रोजाना हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं। यहां जल पुलिस की स्थाई चौकी बनाने का आश्वासन कई बार दिया जा चुका है।
तैयारी के नाम पर पिछले वर्ष प्रशासन द्वारा लगभग 30 नाविकों एवं गोताखोरों को लाइफ जैकेट भी प्रदान की गई थी। शनिवार को अंतिम संस्कार में शामिल होने आए दो युवक सरयू में समाहित हो गए। अप्रैल माह में ही अब तक चार लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। प्रशासन मेलों के दौरान घाट पर फ्लड कंपनी लगाता है लेकिन मेला खत्म होते ही यह कंपनी वापस चली जाती है। सरयू घाट के पास दुकान लगाने वाले राकेश पांडेय व दुकानदार कुलदीप यादव कहते हैं कि यदि घाट पर जल पुलिस की तैनाती हो जाए व स्नान करने के लिए एक निश्चित स्नान चिह्नित कर बैरीकेडिंग कर दी जाए तो दुर्घटनाओं पर अंकुश लग सकता है। महेंद्र शुक्ला कहते हैं कि कई बार प्रशासन से घाट पर जल पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की गई है लेकिन सुनवाई नहीं हुई। एसपी सिटी अनिल सिंह सिसौदिया का कहना है कि सरयू घाट पर जाल, रस्सा आदि की व्यवस्थाएं की गई हैं। स्थानीय गोताखोरों की मदद ली जाती है। सरयू घाट पर स्थायी जल पुलिस की तैनाती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है, अनुमति मिलते ही जल पुलिस की तैनाती की जाएगी।
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