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इतिहास का पुनर्लेखन आवश्यक: कुलपति

Sat, 10 Mar 2018 12:45 AM IST
Updated Sat, 10 Mar 2018 12:45 AM IST
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इतिहास का पुनर्लेखन आवश्यक: कुलपति
इतिहास का पुनर्लेखन आवश्यक : कुलपति
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फैजाबाद। भारत में कभी इतिहास लेखन की परंपरा नहीं रही। जो भी इतिहास लिखा गया उसमें मुख्य रूप से चीनी यात्रियों व अंग्रेजों द्वारा लिखा गया या फिर विजेता राजाओं द्वारा जिन्हें ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करनी होती थी, उन्होंने ही इतिहास लेखन कराया। ऐसे में इतिहास का पुनर्लेखन बहुत जरूरी है। यह बातें डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने शुक्रवार को कहीं।
वे इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में सिंध का इतिहास शीर्षक पर राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। इसका शुभारंभ करते हुए कुलपति कहा कि सिंध के इतिहास को समझने के लिए कहा कि इसके लिए पाकिस्तान में सिंध पर क्या लिखा गया है, इसका भी अध्ययन करना आवश्यक है। विशिष्ठ अतिथि डॉ. रवि टेकचंदानी ने कहा कि सिंध क्षेत्र जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थिति है जो कभी भारत का अभिन्न अंग रहा था। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सिंध का हिस्सा पाकिस्तान मे चला गया। कहा कि सिंध बिना हिंद कभी पूर्ण हो ही नहीं सकता। यदि हम 1947 को भारत की आजादी के लिए याद रखते हैं, तो हमें 1947 को विभाजन के लिए भी याद रखना होगा। यदि भौगोलिक परिक्षेत्र से देखा जाए तो सिंध प्रांत बिल्कुल भारत एवं पाकिस्तान की सीमा पर स्थित है। विभाजन के समय किन कारणों से सिंध प्रांत को पाकिस्तान के हवाले कर दिया गया। यह पीड़ादायक एवं शोध का विषय है। विशिष्ठ अतिथि प्रो. माखन लाल ने शोधार्थियों से सीधे संवाद करते हुए कहा कि इतिहास को समझने के लिए सभी घटनाओं की भौगोलिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक परिस्थियों को समझना आवश्यक होता है। मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप अग्निहोत्री ने इतिहास के पुनर्लेखन की वकालत की। उन्होंने मुख्य रूप से कहा कि 712 ई0 में मो. बिन कासिम के भारत छोड़ के जाने के बाद से लभगभ 1200 ई0 में मुसलमानों का आगमन भारत में हुआ। प्रश्न यह उठता है कि लभगभ 500 वर्षों का इतिहास क्यों नहीं लिखा गया, यह शोध का विषय है।
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कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राजेश सिंह ने किया, धन्यवाद ज्ञापन जैन शोध पीठ के सहायक आचार्य डॉ. देव नारायण वर्मा ने किया। कार्यक्रम को अयोध्या नगर निगम के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय, भाजपा जिला अध्यक्ष अवधेश पांडेय बादल ने भी संबोधित किया। स्वागत संबोधन विभागाध्यक्ष, इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग प्रो. अजय प्रताप सिंह ने किया।
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