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नई ईबारत : दीपोत्सव से मिलेगा भारत-कोरिया के संबंधों को नया आयाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 06 Nov 2018 12:34 AM IST
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रामनगरी में आयोजित होने जा रहा दीपोत्सव सुदूर देशों से सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी माध्यम बन रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों को नया आयाम मिलने की ओर है। दीपोत्सव के जरिए दोनों देशों के संबंधों की नई ईबारत गढ़ने की तैयारी है। दीपोत्सव में कोरिया की प्रथम महिला मुख्य अतिथि किम जुंग सूक के दौर पर अयोध्या आ रही हैं। वे यहां कोरियाई महारानी हो के स्मारक का शिलान्यास करेंगी तो दीप जलाकर अयोध्या-कोरिया के रिश्ते को नई रोशनी भी प्रदान करेंगी।
दीपोत्सव में रामनगरी से दक्षिण कोरिया का रिश्ता परवान चढ़ रहा है। लगभग दो हजार साल पहले हुई एक शादी ने भारत की धार्मिक नगरी अयोध्या का अटूट संबंध हजारों मील दूर दक्षिण कोरिया से स्थापित कर दिया। इतिहासकार इसे पहली ग्लोबल शादी मानते हैं। जिसकी वजह से दो देश सांस्कृतिक रूप से जुड़ गए। 48वीं ईं में भारत के अयोध्या राज्य के राजकुमारी सुरीरत्ना का विवाह कोरिया के राजा किम सुरो से हुआ था और वह रानी हु हवांग ओक के नाम से प्रसिद्ध् हुईं।
राजकुमार राम और अयोध्या से उनके 14 साल के वनवास की कथा हजारों साल से भारतीय किवंदियों का हिस्सा रही है। लेकिन बीते दो दशकों में अयोध्या से एक और शाही व्यक्ति के बाहरी दुनिया में जाने की बात चर्चा में रही है। समय-समय पर अयोध्या के कुछ प्रमुख लोग किमहे शहर की यात्रा भी करने लगे हैं अयोध्या नरेश बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र यहां आने वाले करक वंश के लोगों की मेहमाननवाजी करते रहें और वे पिछले कुछ सालों में कई बार दक्षिण कोरिया भी जाते रहे हैं। अयोध्या राजघराने के सदस्य यतींद्र मोहन मिश्र कहते हैं कि दीपोत्सव का यह आयोजन भारत-कोरिया के संबंधों की नई इबारत गढ़ने जा रहा है, साथ ही दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए मार्ग भी प्रशस्त होंगे।
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दीपोत्सव में रामनगरी से दक्षिण कोरिया का रिश्ता परवान चढ़ रहा है। लगभग दो हजार साल पहले हुई एक शादी ने भारत की धार्मिक नगरी अयोध्या का अटूट संबंध हजारों मील दूर दक्षिण कोरिया से स्थापित कर दिया। इतिहासकार इसे पहली ग्लोबल शादी मानते हैं। जिसकी वजह से दो देश सांस्कृतिक रूप से जुड़ गए। 48वीं ईं में भारत के अयोध्या राज्य के राजकुमारी सुरीरत्ना का विवाह कोरिया के राजा किम सुरो से हुआ था और वह रानी हु हवांग ओक के नाम से प्रसिद्ध् हुईं।
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राजकुमार राम और अयोध्या से उनके 14 साल के वनवास की कथा हजारों साल से भारतीय किवंदियों का हिस्सा रही है। लेकिन बीते दो दशकों में अयोध्या से एक और शाही व्यक्ति के बाहरी दुनिया में जाने की बात चर्चा में रही है। समय-समय पर अयोध्या के कुछ प्रमुख लोग किमहे शहर की यात्रा भी करने लगे हैं अयोध्या नरेश बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र यहां आने वाले करक वंश के लोगों की मेहमाननवाजी करते रहें और वे पिछले कुछ सालों में कई बार दक्षिण कोरिया भी जाते रहे हैं। अयोध्या राजघराने के सदस्य यतींद्र मोहन मिश्र कहते हैं कि दीपोत्सव का यह आयोजन भारत-कोरिया के संबंधों की नई इबारत गढ़ने जा रहा है, साथ ही दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए मार्ग भी प्रशस्त होंगे।
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2001 में कोरिया ने बनाया सरयू तट पर रानी हो स्मारक
राज्य सरकार के सहयोग से 2001 में अयोध्या के सरयू तट पर रानी हो के भव्य स्मारक का निर्माण कराया गया। स्मारक में लगे शिलालेख का पत्थर कोरिया से मंगवाया गया है। कोरिया के पौराणिक दस्तावेज साम गुक युसा में उल्लिखत कथा के अनुसार अयोध्या की राजकुमार के पिता के स्वप्न में स्वयं ईश्वर प्रकट हुए और उन्होंने राजकुमारी को विवाह के लिए किमहे शहर भेजा, जहां सुरीरत्ना का विवाह राजा सुरो के साथ संपन्न कराने को कहा। किम हे राजवंश के नाम पर ही वर्तमान कोरिया का नामकरण हुआ है। कोरिया के लोगों का मानना है कि सुरीरत्ना और राजा सुरो के वंशजों ने ही सातवीं शताब्दी में कोरिया के विभिन्न राजघरानों की स्थापना की थी। इनके वशंजों को कारक वंश का नाम दिया गया है। कोरिया के इतिहास में अनेक महारानियों का नाम दर्ज है लेकिन सभी में से सुरीरत्ना को ही सबसे अधिक आदरणीय और पवित्र माना गया, कोरिया में कारक गोत्र के तकरीबन 60 लाख स्वयं को राजा सुरो और अयोध्या की राजकुमारी का वशंज बताते हैं।