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Ayodhya News: जिले में 11 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार
Mon, 27 Feb 2023 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 27 Feb 2023 12:43 AM IST
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अयोध्या। जिले में 11 हजार बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। पर्याप्त पोषक आहार न मिलने के कारण 2732 अति कुपोषित की श्रेणी में है। इनकी कद काठी स्वस्थ बच्चों की अपेक्षा कमजोर है। ऐसे बच्चों के स्वास्थ्य पर संबंधित क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नजर रखते हैं। यह आंकड़े बाल विकास विभाग के सर्वे से सामने आए हैं।
शहर के साथ सभी 11 ब्लॉक क्षेत्रों में 0-5 साल के कुल बच्चों की संख्या 2,36,688 है। बच्चों के स्वास्थ्य के मद्देनजर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और नाप तौल कराई गई।
इसके बाद बच्चों की लंबाई व वजन के औसत के हिसाब से इन्हें कुपोषित, अतिकुपोषित की श्रेणी मेंं रखा गया। पूरक आहार के जरिए इन बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल किए जाने की व्यवस्था है। कुपोषण को दूर करने के मद्देनजर अफसरों द्वारा गांवों को गोद लिए जाने की व्यवस्था भी है।
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पोषक आहार की अनुपलब्धता में अतिकुपोषित बच्चों में भी सैम(सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रीशन) और मैम (मॉडरेट एक्यूट मालन्यूट्रीशन) बच्चों की पहचान कर इनकी विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है।
सैम श्रेणी के खराब गंभीर हालत वाले बच्चों को स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल परिसर में बनाए गए पोषण पुनर्वास केंद्र में रखकर इलाज किए जाने की व्यवस्था है। जिले में मैम श्रेणी में 5780 बच्चे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे निचली पायदान पर होने वाले सैम श्रेणी के कुल 641 बच्चे हैं।
जिले में दर्शननगर में पोषण पुनर्वास केंद्र में दो बच्चों को इलाज के लिए रखा गया है। 23 फरवरी को यहां बच्चों की संख्या 12 थी। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 10 को वापस भेज दिया गया। भर्ती बच्चों को मानक के अनुसार पौष्टिक भोजन के साथ दवाएं दी जाती हैं।
विभाग के मुताबिक सुपोषण के लिए महिलाओं और किशोरियों की सेहत की जांच कराई जाती है। गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए हर महीने पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थों का वितरण किया जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों की सेहत पर नजर रखी जाती है। बच्चों के अभिभावकों को किचन गार्डेन व पोषण वाटिका को लेकर जागरूक किया जा रहा है। अतिकुपोषित बच्चों की निगरानी कराई जा रही है। बच्चों को पोषण युक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
-एके त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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शहर के साथ सभी 11 ब्लॉक क्षेत्रों में 0-5 साल के कुल बच्चों की संख्या 2,36,688 है। बच्चों के स्वास्थ्य के मद्देनजर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग से सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन और नाप तौल कराई गई।
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इसके बाद बच्चों की लंबाई व वजन के औसत के हिसाब से इन्हें कुपोषित, अतिकुपोषित की श्रेणी मेंं रखा गया। पूरक आहार के जरिए इन बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल किए जाने की व्यवस्था है। कुपोषण को दूर करने के मद्देनजर अफसरों द्वारा गांवों को गोद लिए जाने की व्यवस्था भी है।
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पोषक आहार की अनुपलब्धता में अतिकुपोषित बच्चों में भी सैम(सीवियर एक्यूट मालन्यूट्रीशन) और मैम (मॉडरेट एक्यूट मालन्यूट्रीशन) बच्चों की पहचान कर इनकी विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है।
सैम श्रेणी के खराब गंभीर हालत वाले बच्चों को स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल परिसर में बनाए गए पोषण पुनर्वास केंद्र में रखकर इलाज किए जाने की व्यवस्था है। जिले में मैम श्रेणी में 5780 बच्चे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे निचली पायदान पर होने वाले सैम श्रेणी के कुल 641 बच्चे हैं।
जिले में दर्शननगर में पोषण पुनर्वास केंद्र में दो बच्चों को इलाज के लिए रखा गया है। 23 फरवरी को यहां बच्चों की संख्या 12 थी। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 10 को वापस भेज दिया गया। भर्ती बच्चों को मानक के अनुसार पौष्टिक भोजन के साथ दवाएं दी जाती हैं।
विभाग के मुताबिक सुपोषण के लिए महिलाओं और किशोरियों की सेहत की जांच कराई जाती है। गर्भवती महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए हर महीने पोषक तत्वों से युक्त खाद्य पदार्थों का वितरण किया जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों की सेहत पर नजर रखी जाती है। बच्चों के अभिभावकों को किचन गार्डेन व पोषण वाटिका को लेकर जागरूक किया जा रहा है। अतिकुपोषित बच्चों की निगरानी कराई जा रही है। बच्चों को पोषण युक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
-एके त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी