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Etawah News: पुल का इंतजार, नाव से जा रहे यमुना पार
Tue, 11 Apr 2023 12:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Tue, 11 Apr 2023 12:24 AM IST
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इटावा। शहर से लगभग 15 किलोमीटर दूर रूरा गांव के पास यमुना नदी पर पुल बनने का 50 गांवों के 50 हजार लोग इंतजार कर रहे हैं। ग्रामीण 20 किलोमीटर की दौड़़ से बचने के लिए नाव से नदी पार जाते हैं।
मुख्यालय से कचौरा रोड पर लगभग 10 किलोमीटर दूर रूरा गांव के लिए रास्ता मुड़ता है। गांव में महाबली पिलुआ बाबा का मंदिर है। इससे लगभग दो किलोमीटर आगे यमुना का तट है। इसके दोनों तरफ 50 गांव बसे हैं। एक तरफ के लोग 20 किलोमीटर चक्कर बचाने के लिए लगभग नाव से 300 मीटर नदी पार करके जाते हैं। किसी को यदि बाइक से मुख्यालय तक आना है तो वह बाइक आदि सामान नाव में रखकर ही इस पार आ जाता है और उसके बाद रूरा गांव होकर मुख्यालय जाता है। नदी पार करने के लिए नाविक को दस रुपये प्रति व्यक्ति देते हैं।
सोमवार दोपहर करीब एक बजे यमुना तट पर संवाद टीम पहुंची तो नदी किनारे यही नजारा दिखा। पांच लोग तीन बाइकें रखकर नाव पर सवार दिखे। दूरी तय कर बाइकें उतारकर करीब आधा किलोमीटर रेतीले रास्ते से होकर रूरा गांव के मुख्य सड़क पर गए। लोगों ने अपना दर्द बयां कर बताया कि साहब, क्या करें रोज उस पार आना-जाना है । (संवाद)
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विधायक ने पुल बनवाने के लिए भेजा प्रस्ताव
यमुना तट पर बसे सभी गांव लंबे समय से नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। इसे देखते हुए सपा शासन काल में एक बार प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से पुल को स्वीकृति नहीं मिल सकी थी। इस बार सदर विधायक सरिता भदौरिया ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। पिछले दिनों समीक्षा बैठक करने आए लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया था। उन्होंने जल्द पुल को स्वीकृति देने का आश्वासन दिया था। विधायक ने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इस संबंध में मंत्री जी से भी बात हुई है। इस वर्ष की कार्ययोजना में शामिल कराकर पुल का निर्माण कराया जाएगा।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
नदी के उस पार बसे असबा, मढ़ैया, पूर्वी पचार, बेला बाहूपुर, धमना की मढ़ैया, अजबपुर की मढ़ैया, भाऊपुरा, पछायगांव समेत लगभग 25 गांवों के लोगों को पुल बनने से लाभ मिलेगा। वहीं रूरा, प्रतापनेर, विजयपुरा, सलायता, सोखा, ढिमरई समेत करीब 25 गांवों के ग्रामीणों को भी सफर में आसानी होगी।
ग्रामीणों ने बताई समस्या
पूर्वी पचार गांव के हरिकिशोर ने बताया कि वह खेती करते हैं। कई कामों के लिए शहर, तहसील और मुख्यालय जाना पड़ता है। सड़क वाले रास्ते से पछायगांव से होकर जाने में करीब रास्ता 35 किलोमीटर पड़ता है। नाव से नदी पार कर जाते हैं।
बेला बाहूपुर के सुनील साइकिल रखकर नाव से आए। उन्होंने बताया कि बेटी की शादी है। उसके कार्ड बांट रहे हैं। इसलिए शहर तक जा रहे हैं। सड़क होकर आते तो पूरा दिन पहुंचने में ही लग जाता है।
पूर्वी पचार के राकेश ने बताया कि तहसील में वह काम से जा रहे हैं। यहां से जाने में दूरी कम पड़ती है। सड़क से जाने में पूरा दिन खराब होता है। वहीं किराया भी अधिक खर्च होता है। यदि पुल बन जाए तो यहां के लोगों को आवागमन में राहत मिल सकेगी।
असबा गांव के 70 वर्षीय रामपाल ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र के लोग पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। सपा शासनकाल में एक बार प्रस्ताव गया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। यदि पुल बन जाए तो इस क्षेत्र का भी विकास हो सकेगा।
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मुख्यालय से कचौरा रोड पर लगभग 10 किलोमीटर दूर रूरा गांव के लिए रास्ता मुड़ता है। गांव में महाबली पिलुआ बाबा का मंदिर है। इससे लगभग दो किलोमीटर आगे यमुना का तट है। इसके दोनों तरफ 50 गांव बसे हैं। एक तरफ के लोग 20 किलोमीटर चक्कर बचाने के लिए लगभग नाव से 300 मीटर नदी पार करके जाते हैं। किसी को यदि बाइक से मुख्यालय तक आना है तो वह बाइक आदि सामान नाव में रखकर ही इस पार आ जाता है और उसके बाद रूरा गांव होकर मुख्यालय जाता है। नदी पार करने के लिए नाविक को दस रुपये प्रति व्यक्ति देते हैं।
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सोमवार दोपहर करीब एक बजे यमुना तट पर संवाद टीम पहुंची तो नदी किनारे यही नजारा दिखा। पांच लोग तीन बाइकें रखकर नाव पर सवार दिखे। दूरी तय कर बाइकें उतारकर करीब आधा किलोमीटर रेतीले रास्ते से होकर रूरा गांव के मुख्य सड़क पर गए। लोगों ने अपना दर्द बयां कर बताया कि साहब, क्या करें रोज उस पार आना-जाना है । (संवाद)
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विधायक ने पुल बनवाने के लिए भेजा प्रस्ताव
यमुना तट पर बसे सभी गांव लंबे समय से नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। इसे देखते हुए सपा शासन काल में एक बार प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से पुल को स्वीकृति नहीं मिल सकी थी। इस बार सदर विधायक सरिता भदौरिया ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। पिछले दिनों समीक्षा बैठक करने आए लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद के सामने भी यह मुद्दा उठाया गया था। उन्होंने जल्द पुल को स्वीकृति देने का आश्वासन दिया था। विधायक ने बताया कि शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इस संबंध में मंत्री जी से भी बात हुई है। इस वर्ष की कार्ययोजना में शामिल कराकर पुल का निर्माण कराया जाएगा।
इन गांवों को मिलेगा लाभ
नदी के उस पार बसे असबा, मढ़ैया, पूर्वी पचार, बेला बाहूपुर, धमना की मढ़ैया, अजबपुर की मढ़ैया, भाऊपुरा, पछायगांव समेत लगभग 25 गांवों के लोगों को पुल बनने से लाभ मिलेगा। वहीं रूरा, प्रतापनेर, विजयपुरा, सलायता, सोखा, ढिमरई समेत करीब 25 गांवों के ग्रामीणों को भी सफर में आसानी होगी।
ग्रामीणों ने बताई समस्या
पूर्वी पचार गांव के हरिकिशोर ने बताया कि वह खेती करते हैं। कई कामों के लिए शहर, तहसील और मुख्यालय जाना पड़ता है। सड़क वाले रास्ते से पछायगांव से होकर जाने में करीब रास्ता 35 किलोमीटर पड़ता है। नाव से नदी पार कर जाते हैं।
बेला बाहूपुर के सुनील साइकिल रखकर नाव से आए। उन्होंने बताया कि बेटी की शादी है। उसके कार्ड बांट रहे हैं। इसलिए शहर तक जा रहे हैं। सड़क होकर आते तो पूरा दिन पहुंचने में ही लग जाता है।
पूर्वी पचार के राकेश ने बताया कि तहसील में वह काम से जा रहे हैं। यहां से जाने में दूरी कम पड़ती है। सड़क से जाने में पूरा दिन खराब होता है। वहीं किराया भी अधिक खर्च होता है। यदि पुल बन जाए तो यहां के लोगों को आवागमन में राहत मिल सकेगी।
असबा गांव के 70 वर्षीय रामपाल ने बताया कि लंबे समय से क्षेत्र के लोग पुल बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। सपा शासनकाल में एक बार प्रस्ताव गया था, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। यदि पुल बन जाए तो इस क्षेत्र का भी विकास हो सकेगा।