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इटावा: टेक्सटाइल का माल बढ़ा रहा निर्यात की चाल
Sun, 12 Feb 2023 11:51 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sun, 12 Feb 2023 11:51 PM IST
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इटावा। जिले का टेक्सटाइल्स उद्योग विदेशों में मजबूत पकड़ बना रहा है। आठ देशों में इसकी मांग बढ़ रही है। इसका नतीजा है कि एक साल में निर्यात करीब 100 करोड़ रुपये बढ़कर 500 करोड़ पहुंच गया है। वित्त वर्ष समाप्त होने में करीब डेढ़ माह शेष है। ऐसे में इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है। बासमती चावल भी विदेशों में खुशबू बिखेर रहा है। इसकी मांग भी बढ़ी है।
बेडशीट, बेड कवर, टेबल क्लाॅथ, पर्दे, हैंड बैग, शॉपिंग बैग की जापान, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, यूएई, वियतनाम, स्पेन जैसे देशों में तेजी से मांग बढ़ी है। यहां बनने वाला अंगौछा नेपाल और श्रीलंका में खूब पसंद किया जा रहा है। अच्छी गुणवत्ता और कीमत में भी कम होने के कारण इनकी मांग बढ़ी है।
कानपुर स्थित फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के रिकार्ड के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में इटावा जनपद से कुल 415 करोड़ का निर्यात इन देशों में हुआ था। इस साल अप्रैल से लेकर जनवरी तक यह कारोबार 500 करोड़ तक पहुंच चुका है। कई ऑर्डर मिले हैं।
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जूट और कॉटन को मिलाकर जूको बनाया
सीमित संसाधनों के बाद भी जिले के उद्यमी न सिर्फ विदेशों में अपने उत्पाद का डंका बजा रहे हैं, बल्कि टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में नई खोज में भी लगे हैं। शहर के युवा कारोबारी मानस अग्रवाल ने जूट और कॉटन को मिलाकर जूको नाम का नया मैटेरियल तैयार किया है। इससे शॉपिंग बैग तैयार किए जा रहे हैं। मानस का कहना है कि जूको से बने बैग न सिर्फ मजबूत होते हैं बल्कि देखने में भी काफी आकर्षक होते हैं। इनकी मांग भी विदेशों में हैं। जापान में इनका निर्यात हो चुका है।
लगातार मिल रहे ऑर्डर
रामलीला रोड निवासी उद्यमी नवीन अग्रवाल ने बताया कि अभी वह विदेशों में पिलो कवर, पर्दे, नोरन, एप्रन, ग्लब्स, बेडशीट का निर्यात कर रहे हैं। मांग बढ़ने का ही नतीजा है कि ऑर्डर लगातार मिल रहे हैं।
बाह अड्डा निवासी उद्यमी मोहम्मद फारुख ने बताया कि बेडशीट और टेक्सटाइल्स का सामान वह भेज रहे हैं। ज्यादातर माल दिल्ली से विदेश जाता है। कीमत कम होने और गुणवत्ता अच्छी होने का ही नतीजा है कि मांग बनी हुई है।
बासमती चावल की होती हैं यह किस्में
जिले में लगभग 43 हजार हेक्टेयर धान का रकबा है। इसमें से करीब सात हजार रकबा बासमती चावल का है। पूसा बासमती (पीबी) 1121, पीबी 1692, पीबी 1847, पीबी 1718, पीबी 1509 आदि बेहतर किस्म का चावल जिले में होता है। इसकी गुणवत्ता अच्छी होने से यहां के चावल के बाहरी देशों में भी मांग बढ़ी है। यही कारण है कि जिले के बासमती को जीआई टैग के लिए भी चयनित किया गया है।
जिले से होम फर्नीशिंग आइटम और बासमती चावल विदेशों में जा रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस साल कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कारोबार इस बार 500 करोड़ के पार हो जाएगा। यह बढ़ोतरी काफी अच्छी है। - आलोक श्रीवास्तव, सीईओ, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन, कानपुर
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बेडशीट, बेड कवर, टेबल क्लाॅथ, पर्दे, हैंड बैग, शॉपिंग बैग की जापान, आस्ट्रेलिया, सिंगापुर, यूएई, वियतनाम, स्पेन जैसे देशों में तेजी से मांग बढ़ी है। यहां बनने वाला अंगौछा नेपाल और श्रीलंका में खूब पसंद किया जा रहा है। अच्छी गुणवत्ता और कीमत में भी कम होने के कारण इनकी मांग बढ़ी है।
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कानपुर स्थित फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के रिकार्ड के मुताबिक, वर्ष 2021-22 में इटावा जनपद से कुल 415 करोड़ का निर्यात इन देशों में हुआ था। इस साल अप्रैल से लेकर जनवरी तक यह कारोबार 500 करोड़ तक पहुंच चुका है। कई ऑर्डर मिले हैं।
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जूट और कॉटन को मिलाकर जूको बनाया
सीमित संसाधनों के बाद भी जिले के उद्यमी न सिर्फ विदेशों में अपने उत्पाद का डंका बजा रहे हैं, बल्कि टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में नई खोज में भी लगे हैं। शहर के युवा कारोबारी मानस अग्रवाल ने जूट और कॉटन को मिलाकर जूको नाम का नया मैटेरियल तैयार किया है। इससे शॉपिंग बैग तैयार किए जा रहे हैं। मानस का कहना है कि जूको से बने बैग न सिर्फ मजबूत होते हैं बल्कि देखने में भी काफी आकर्षक होते हैं। इनकी मांग भी विदेशों में हैं। जापान में इनका निर्यात हो चुका है।
लगातार मिल रहे ऑर्डर
रामलीला रोड निवासी उद्यमी नवीन अग्रवाल ने बताया कि अभी वह विदेशों में पिलो कवर, पर्दे, नोरन, एप्रन, ग्लब्स, बेडशीट का निर्यात कर रहे हैं। मांग बढ़ने का ही नतीजा है कि ऑर्डर लगातार मिल रहे हैं।
बाह अड्डा निवासी उद्यमी मोहम्मद फारुख ने बताया कि बेडशीट और टेक्सटाइल्स का सामान वह भेज रहे हैं। ज्यादातर माल दिल्ली से विदेश जाता है। कीमत कम होने और गुणवत्ता अच्छी होने का ही नतीजा है कि मांग बनी हुई है।
बासमती चावल की होती हैं यह किस्में
जिले में लगभग 43 हजार हेक्टेयर धान का रकबा है। इसमें से करीब सात हजार रकबा बासमती चावल का है। पूसा बासमती (पीबी) 1121, पीबी 1692, पीबी 1847, पीबी 1718, पीबी 1509 आदि बेहतर किस्म का चावल जिले में होता है। इसकी गुणवत्ता अच्छी होने से यहां के चावल के बाहरी देशों में भी मांग बढ़ी है। यही कारण है कि जिले के बासमती को जीआई टैग के लिए भी चयनित किया गया है।
जिले से होम फर्नीशिंग आइटम और बासमती चावल विदेशों में जा रहे हैं। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस साल कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कारोबार इस बार 500 करोड़ के पार हो जाएगा। यह बढ़ोतरी काफी अच्छी है। - आलोक श्रीवास्तव, सीईओ, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशन, कानपुर