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पुलिस ने छोड़े सामूहिक दुष्कर्म के अहम सबूत
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बकेवर। लखना चौकी क्षेत्र की किशोरी के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दुष्कर्म से जुड़े जिस वायरल वीडियो के आधार पर पीड़िता के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने यह सबूत माल मुकदमाती यानी मुकदमे का हिस्सा नहीं बनाया है। आरोपियों के मोबाइल व लैपटॉप सील नहीं किए हैं, जबकि दर्ज रिपोर्ट में आईटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गईं हैं। बताया जा रहा कि आरोपियों के मोबाइल फोन अब तक पुलिस के पास ही हैं।
बकेवर थाना क्षेत्र से संबद्ध लखना पुलिस चौकी क्षेत्र की एक किशोरी के साथ उसके पड़ोसी युवक व उसके साथियों ने सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद एक लाख रुपयों की मांग की थी। पीड़िता जब यह रकम नहीं दे पाई तो आरोपियों ने वीडियो वायरल कर दिया था। इस पर किशोरी के पिता ने छह लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था।
इस मामले में पुलिस ने अब तक जो कार्रवाई की है। उसमें झोल दिख रहे हैं। पुलिस जहां छोटे मोटे मामलों में भी आरोपियों से बरामद सामान मसलन मोबाइल फोन आदि बतौर सबूत मुकदमे का हिस्सा बनाती है। उसे कानूनी कार्रवाई में दाखिल करती है। इस गंभीर मामले में विवेचक ने आरोपियों के मोबाइल फोन व लैपटॉप को सबूत के तौर पर आज तक सील कर दाखिल नहीं किया है। वीडियो वायरल होना मामले के सामने आने की प्रमुख वजह रहा है।
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इसे लेकर लोगों में चर्चा है कि आखिर सामूहिक दुष्कर्म के वायरल वीडियो के सबूत के तौर पर आरोपियों के मोबाइल व एक लैपटॉप को पुलिस ने दाखिल क्यों नहीं किया।
इस संबंध में मामले के विवेचक सीओ भरथना आलोक प्रसाद ने बताया कि इस मामले के पूर्व में विवेचक रहे सीओ भरथना ने तब मोबाइल व लैपटॉप दाखिल नहीं किए थे। आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र लगाया जा चुका है। अब वायरल वीडियो व तस्वीर की सीडी बनवा ली गई है।
मोबाइल व लैपटॉप का डाटा हुआ साफ
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों के स्मार्ट मोबाइल व एक आरोपी का लैपटॉप बरामद किया था। जिन्हें चार महीने बाद भी माल मुकदमाती नहीं बनाया गया। जो थाना पुलिस के पास मौजूद बताए जा रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों के मोबाइल व लैपटॉप में जो डाटा था। वह डिलीट हो चुका है। उनमें अब कोई वीडियो या फोटो बतौर सबूत नहीं बचा है।
गोपाल त्रिपाठी
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बकेवर थाना क्षेत्र से संबद्ध लखना पुलिस चौकी क्षेत्र की एक किशोरी के साथ उसके पड़ोसी युवक व उसके साथियों ने सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद एक लाख रुपयों की मांग की थी। पीड़िता जब यह रकम नहीं दे पाई तो आरोपियों ने वीडियो वायरल कर दिया था। इस पर किशोरी के पिता ने छह लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया था।
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इस मामले में पुलिस ने अब तक जो कार्रवाई की है। उसमें झोल दिख रहे हैं। पुलिस जहां छोटे मोटे मामलों में भी आरोपियों से बरामद सामान मसलन मोबाइल फोन आदि बतौर सबूत मुकदमे का हिस्सा बनाती है। उसे कानूनी कार्रवाई में दाखिल करती है। इस गंभीर मामले में विवेचक ने आरोपियों के मोबाइल फोन व लैपटॉप को सबूत के तौर पर आज तक सील कर दाखिल नहीं किया है। वीडियो वायरल होना मामले के सामने आने की प्रमुख वजह रहा है।
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इसे लेकर लोगों में चर्चा है कि आखिर सामूहिक दुष्कर्म के वायरल वीडियो के सबूत के तौर पर आरोपियों के मोबाइल व एक लैपटॉप को पुलिस ने दाखिल क्यों नहीं किया।
इस संबंध में मामले के विवेचक सीओ भरथना आलोक प्रसाद ने बताया कि इस मामले के पूर्व में विवेचक रहे सीओ भरथना ने तब मोबाइल व लैपटॉप दाखिल नहीं किए थे। आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र लगाया जा चुका है। अब वायरल वीडियो व तस्वीर की सीडी बनवा ली गई है।
मोबाइल व लैपटॉप का डाटा हुआ साफ
पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों के स्मार्ट मोबाइल व एक आरोपी का लैपटॉप बरामद किया था। जिन्हें चार महीने बाद भी माल मुकदमाती नहीं बनाया गया। जो थाना पुलिस के पास मौजूद बताए जा रहे। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों के मोबाइल व लैपटॉप में जो डाटा था। वह डिलीट हो चुका है। उनमें अब कोई वीडियो या फोटो बतौर सबूत नहीं बचा है।
गोपाल त्रिपाठी