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पशुओं में फैला मुंहपका रोग

Sun, 26 Dec 2021 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Dec 2021 11:54 PM IST
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pashuon mein phaila munhapaka rog
निवाड़ीकला। इन दिनों ब्लॉक क्षेत्र के कई गांवों में पशुओं में खुरपका और मुंहपका जैसी बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। परेशान पशुपालकों ने टीकाकरण कराने की मांग की है। मौसम के बदलते ही मवेशियों में मुंहपका और खुरपका तेजी से फैलने लगा है।
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कुछ दिन में ऐसे दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर यह रोग मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि दो साल से मवेशियों का टीकाकरण नहीं कराया गया है।
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गाय, बकरी, भैंस, बैलों को यह रोग तेजी से चपेट में ले रहा है। पशुपालकों के मुताबिक, बीमार मवेशियों ने दाना पानी लेना बंद कर दिया है। यह रोग उनके लिए जानलेवा हो चला है। पशुपालकों ने सरकार से मवेशियों का टीकाकरण कराने की मांग की है।
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ग्राम खितौरा निवासी पशुपालक अंकित ने बताया कि पशुओं को खुरपका और मुंहपका की बीमारी फैल गई है। पशुओं का वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। उधर, नीतू सिंह ने बताया कि उनके गांव खितौरा में एक दर्जन से अधिक पशु बीमारी से ग्रस्त हैं।
अगर वैक्सीनेशन हो जाता तो पशुओं में यह बीमारी न होती। कहा कि इस महंगाई के दौर ने प्राइवेट डॉक्टरों से इलाज काफी महंगा पड़ता है और दवा भी महंगी आती है। उधर, जिम्मेदार वैक्सीन आने पर टीकाकरण अभियान चलाने की बात कह रहे हैं।
रोग के लक्षण
पशु के मुंह से अत्यधिक लार का टपकना, जीभ और तलवे पर छालों का उभरना, पशु के जुगाली करना बंद कर देना, दूध उत्पादन में कमी, पशुओं का गर्भपात होना।
ऐसे करें बचाव
रोग का पता लगने पर पशु को अन्य पशुओं से तुरंत दूर किया जाए, दूध निकालने वाले व्यक्ति को हाथ और मुंह साबुन से धोना चाहिए, प्रभावित क्षेत्र को सोडियम कार्बोनेट घोल पानी मिलाकर धोना चाहिए,
चिकित्सकों की सलाह लेकर पशु के तुरंत टीका लगवाने के साथ नियमित उपचार कराएं, स्वस्थ एवं बीमार पशु को अलग-अलग रखें, बीमार पशुओं को स्पर्श करने के बाद व्यक्ति को सोडियम कार्बोनेट घोल से अपने हाथ पैर धोने चाहिए, जिस जगह पर पशु को रखते हों,
वहां ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करें, टीकाकरण के दौरान प्रत्येक पशु के लिए अलग-अलग सुई का प्रयोग कराया जाए और पशु के ठीक हो जाने पर 20 दिन बाद ही उसे दूसरे पशुओं के पास लाना चाहिए।

शासन से वैक्सीन उपलब्ध ही नहीं हुई है। ऐसे में वैक्सीनेशन संभव नहीं हो सका है। पशुपालक देखरेख और सावधानी से इस बीमारी से अपने पशुओं को बचा सकते हैं और सलाह भी ले सकते हैं।
-डा. शरद, पशु चिकित्साधिकारी महेवा
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