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न इलाज मिला, न शव के लिए स्ट्रेचर
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इटावा। जिला अस्पताल के महिला विंग में बनाए गए कोविड एल-टू अस्पताल में इलाज न मिलने से कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत हो गई। मौत के बाद शव घर ले जाने के लिए दो घंटे एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। एंबुलेंस तक शव ले जाने के लिए न ही स्ट्रेचर दिया गया और न ही किसी कर्मचारी ने ही मदद की। बेटे और दामाद शव को घसीटकर एंबुलेंस तक ले गए।
भरथना निवासी रमेश चंद्र कोरोना पॉजिटिव थे। बेटे अवनीश उपाध्याय ने बताया कि चार दिन पहले पिता की जांच कराई थी। गुरुवार को तबियत बिगड़ने पर सुबह करीब 11 बजे एंबुलेंस से जिला अस्पताल के महिला बिंग में बने एल-टू अस्पताल लेकर पहुंचे। अवनीश के साथ बहनोई पीयूष भी थे। अवनीश का आरोप है कि अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरती गई। डॉक्टरों के आगे काफी मिन्नतें की, तब दो घंटे बाद एक डॉक्टर आए और पिता को मृत घोषित कर दिया। अवनीश ने बताया कि पिता ने उनकी आंखों से सामने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
अवनीश ने बताया कि मौत के बाद अस्पताल कर्मी शव को जमीन पर रखकर चले गए। उसने ही शव पीपीई किट में बंद किया। शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस के लिए 108 नंबर डायल किया। करीब दो घंटे बाद एंबुलेंस आई। शव को एंबुलेंस तक ले जाने के लिए न ही स्ट्रेचर दिया गया और न ही किसी कर्मचारी ने मदद ही की। अवनीश और पीयूष शव को घसीट कर किसी तरह एंबुलेंस तक ले गए। किसी तरह दोनों ही ही शव को एंबुलेंस पर चढ़ाया। डॉक्टर व कर्मचारी केवल तमाशबीन बने रहे।
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भरथना निवासी रमेश चंद्र कोरोना पॉजिटिव थे। बेटे अवनीश उपाध्याय ने बताया कि चार दिन पहले पिता की जांच कराई थी। गुरुवार को तबियत बिगड़ने पर सुबह करीब 11 बजे एंबुलेंस से जिला अस्पताल के महिला बिंग में बने एल-टू अस्पताल लेकर पहुंचे। अवनीश के साथ बहनोई पीयूष भी थे। अवनीश का आरोप है कि अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरती गई। डॉक्टरों के आगे काफी मिन्नतें की, तब दो घंटे बाद एक डॉक्टर आए और पिता को मृत घोषित कर दिया। अवनीश ने बताया कि पिता ने उनकी आंखों से सामने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।
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अवनीश ने बताया कि मौत के बाद अस्पताल कर्मी शव को जमीन पर रखकर चले गए। उसने ही शव पीपीई किट में बंद किया। शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस के लिए 108 नंबर डायल किया। करीब दो घंटे बाद एंबुलेंस आई। शव को एंबुलेंस तक ले जाने के लिए न ही स्ट्रेचर दिया गया और न ही किसी कर्मचारी ने मदद ही की। अवनीश और पीयूष शव को घसीट कर किसी तरह एंबुलेंस तक ले गए। किसी तरह दोनों ही ही शव को एंबुलेंस पर चढ़ाया। डॉक्टर व कर्मचारी केवल तमाशबीन बने रहे।
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