{"_id":"63349699d82c9e1e3442c504","slug":"no-facality-in-50-bed-hospital-etawah-news-knp720662146","type":"story","status":"publish","title_hn":"ात करोड़ के अस्पताल में जांच, न इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ात करोड़ के अस्पताल में जांच, न इलाज
विज्ञापन
बकेवर। सात करोड़ से बने 50 शैया अस्पताल में स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को जिला अस्पताल तक दौड़ लगानी पड़ रही है। हाल ये है कि यहां अल्ट्रासाउंड और अन्य जांच की सुविधा नहीं है। यहां इलाज जुकाम, बुखार और खांसी तक सिमट गया है।
ढाई साल पहले अस्पताल बनने से करीब 50 हजार लोगों को बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद जगी थी। अस्पताल में अब तक इमरजेंसी सेवा चालू नहीं हो सकी है। दोपहर दो बजे के बाद अगर किसी को स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत पड़ जाए तो उसे जिला अस्पताल या फिर प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि खून की जांच के लिए भी 22 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
तीन करोड़ के उपकरण कमरे में बंद
अस्पताल में एक साल पहले करीब तीन करोड़ के उपकरण आए थे। इन्हें कमरों में रखकर ताला लगा दिया गया। यहां 10 डॉक्टर्स रूम है। एक प्रभारी रूम है। इसके अलावा दो ऑपरेशन थियेटर हैं। 50 बेड के लिए छह वार्ड बने हैं। अस्पताल को दवाएं सीधे नहीं मिलती हैं, पहले दवाएं टीबी अस्पताल पहुंचती हैं और फिर वहां से कुछ दवाएं यहां भेजी जाती हैं। इसका कारण अस्पताल का कोड जनरेट न होना है। ये कोड शासन स्तर पर जनरेट होना है।
विज्ञापन
पद स्टाफ सृजित तैनाती
अधीक्षक 1 1
चिकित्सक 12 3
फार्मासिस्ट 5 2
वार्ड ब्वाय 4 1
स्वीपर 4 1
स्टाफ नर्स 8 0
लैब टेक्नीशियन 2 0
जांच के साथ ही इमरजेंसी सेवाएं और प्रसव से जुड़े ऑपरेशन शुरू करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। सीएमओ स्तर पर बात भी हुई है। शासन से जल्द सभी सेवाएं शुरू कराने का आश्वासन मिला है। कोशिश है कि जल्द से जल्द जनता को राहत दी जाए। - दिलीप कुमार, प्रभारी, 50 शैया अस्पताल।
किराया और समय होता बर्बाद
कछपुरा की अनीता ने बताया कि उन्हें चार-पांच दिन से बुखार आ रहा है। दवा से राहत नहीं मिल रही। अब डॉक्टर ने खून की जांच कराने के लिए लिखा है। यहीं हो जाती तो आसानी होती अब जिला अस्पताल जाना पड़ेगा। किराये के साथ समय भी ज्यादा लगेगा।
लखना कस्बा निवासी विनीता ने बताया कि उनके मुंह और गले में छाले हैं। दवा ली लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ। डॉक्टर ने खून की जांच के लिखा है। जिला अस्पताल दूर है। इसलिए पैसे खर्च करके प्राइवेट पैथोलॉजी से ही जांच करानी पड़ेगी।
विज्ञापन
ढाई साल पहले अस्पताल बनने से करीब 50 हजार लोगों को बेहतर इलाज मिलने की उम्मीद जगी थी। अस्पताल में अब तक इमरजेंसी सेवा चालू नहीं हो सकी है। दोपहर दो बजे के बाद अगर किसी को स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत पड़ जाए तो उसे जिला अस्पताल या फिर प्राइवेट अस्पताल जाना पड़ता है। मरीजों का कहना है कि खून की जांच के लिए भी 22 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
विज्ञापन
तीन करोड़ के उपकरण कमरे में बंद
अस्पताल में एक साल पहले करीब तीन करोड़ के उपकरण आए थे। इन्हें कमरों में रखकर ताला लगा दिया गया। यहां 10 डॉक्टर्स रूम है। एक प्रभारी रूम है। इसके अलावा दो ऑपरेशन थियेटर हैं। 50 बेड के लिए छह वार्ड बने हैं। अस्पताल को दवाएं सीधे नहीं मिलती हैं, पहले दवाएं टीबी अस्पताल पहुंचती हैं और फिर वहां से कुछ दवाएं यहां भेजी जाती हैं। इसका कारण अस्पताल का कोड जनरेट न होना है। ये कोड शासन स्तर पर जनरेट होना है।
विज्ञापन
पद स्टाफ सृजित तैनाती
अधीक्षक 1 1
चिकित्सक 12 3
फार्मासिस्ट 5 2
वार्ड ब्वाय 4 1
स्वीपर 4 1
स्टाफ नर्स 8 0
लैब टेक्नीशियन 2 0
जांच के साथ ही इमरजेंसी सेवाएं और प्रसव से जुड़े ऑपरेशन शुरू करने के लिए पत्र लिखा जा चुका है। सीएमओ स्तर पर बात भी हुई है। शासन से जल्द सभी सेवाएं शुरू कराने का आश्वासन मिला है। कोशिश है कि जल्द से जल्द जनता को राहत दी जाए। - दिलीप कुमार, प्रभारी, 50 शैया अस्पताल।
किराया और समय होता बर्बाद
कछपुरा की अनीता ने बताया कि उन्हें चार-पांच दिन से बुखार आ रहा है। दवा से राहत नहीं मिल रही। अब डॉक्टर ने खून की जांच कराने के लिए लिखा है। यहीं हो जाती तो आसानी होती अब जिला अस्पताल जाना पड़ेगा। किराये के साथ समय भी ज्यादा लगेगा।
लखना कस्बा निवासी विनीता ने बताया कि उनके मुंह और गले में छाले हैं। दवा ली लेकिन कुछ फायदा नहीं हुआ। डॉक्टर ने खून की जांच के लिखा है। जिला अस्पताल दूर है। इसलिए पैसे खर्च करके प्राइवेट पैथोलॉजी से ही जांच करानी पड़ेगी।