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Etawah News: प्राकृतिक खेती कर दे रहे सेहत का उपहार
Sat, 11 Mar 2023 12:08 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Sat, 11 Mar 2023 12:08 AM IST
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इटावा। भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने के लिए गोबर की खाद का प्रयोग कर प्राकृतिक खेती करने वाले राकेश अन्य किसानाें के लिए भी मिसाल बन गए हैं। उन्होंने ये संकल्प लिया है कि खेती में केमिकल का प्रयोग नहीं करेंगे ताकि लोगों की सेहत बरकरार रहे।
गांव बहादुरपुर घार के किसान राकेश कुमार त्रिपाठी की मेहनत देखकर आसपास के कुछ किसानों ने प्राकृतिक खेती करना शुरू कर दिया है। इसका लाभ भी मिल रहा है। राकेश ने बताया कि अधिक उत्पादन मिलने की वजह से कुछ साल पहले तक किसान यूरिया, डीएपी का इस्तेमाल अधिक करते थे। इसके कारण कैंसर, शुगर, उच्च रक्तचाप जैसे रोग बढ़ने लगे। भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो गई। इस पर उन्होंने वर्ष 2016 में संकल्प लिया कि वह सिर्फ गोबर की खाद का प्रयोग करेंगे।
अरहर, सरसों, मूंग, बेसन से मिश्रण तैयार कर करते हैं स्प्रे
राकेश त्रिपाठी ने बताया कि अरहर, सरसों या खली, मूंग की दाल, तिल सभी दो-दो किलो पिसी हुई, 20 किलो बेसन व दो किलो गुड़ को मिलाकर 100 लीटर पानी में एक शीशी वेस्ट डी कंपोजर, एक लोहे का टुकड़ा और एक तांबे का टुकड़ा डालकर 10 दिन के लिए छोड़ देते हैं। इसके बाद उसमें से पांच लीटर मिश्रण को निकाल कर 100 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर स्प्रे करते हैं। इतना मिश्रण एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होता है। पहली बार फसल के पहले पानी के साथ, दूसरी बार फसल पर फूल आने पर और तीसरी बार फसल में दाना पड़ते समय स्प्रे करने से उत्पादन में वृद्धि होती है और खेत की जल धारण क्षमता बढ़ती है। मिट्टी उपजाऊ हो जाती है। खेतों में कंडे या लकड़ी की राख का भी साल में दो बार इस्तेमाल करते हैं। इससे खेतों में फास्फोरस की पूर्ति होती है।
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माइक्रो न्यूट्रिएंटस से मिलते हैं 14 पोषक तत्व
माइक्रो न्यूट्रिएंट्स से फसलों को 14 प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं। अलग से बाजार से कुछ खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। न यूरिया की और न डीएपी की। बताया कि तीन एकड़ खेत में गन्ने की खेती की और उसमें भी इसका प्रयोग किया। गन्ने के साथ में अरहर के बीज भी डाल दिए। अरहर की जड़ें खेत को नाइट्रोजन देती हैं। परिणाम यह हुआ कि गन्ने की फसल शानदार हुई और गन्ने की लंबाई पंद्रह से बीस फीट तक हुई। खास बात यह कि गन्ने में कीड़ा भी नहीं लगा।
पीपल, बरगद के पौधे लगाकर संजो रहे प्राकृतिक जीवन
प्रकृति के संरक्षण के लिए राकेश इतने जागरूक हैं कि खेत में पीपल, बरगद, अर्जुन, सहजन के पौधे भी लगा रखे हैं। क्लीन एनर्जी के लिए सोलर सिस्टम लगाया है। इससे खेतों की सिंचाई करते हैं। एक एकड़ में अमरूद का बाग लगा है। कीटों से रक्षा के लिए ट्रैपिंग प्लेट लगा रखी है।
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गांव बहादुरपुर घार के किसान राकेश कुमार त्रिपाठी की मेहनत देखकर आसपास के कुछ किसानों ने प्राकृतिक खेती करना शुरू कर दिया है। इसका लाभ भी मिल रहा है। राकेश ने बताया कि अधिक उत्पादन मिलने की वजह से कुछ साल पहले तक किसान यूरिया, डीएपी का इस्तेमाल अधिक करते थे। इसके कारण कैंसर, शुगर, उच्च रक्तचाप जैसे रोग बढ़ने लगे। भूमि की उर्वरा शक्ति भी कमजोर हो गई। इस पर उन्होंने वर्ष 2016 में संकल्प लिया कि वह सिर्फ गोबर की खाद का प्रयोग करेंगे।
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अरहर, सरसों, मूंग, बेसन से मिश्रण तैयार कर करते हैं स्प्रे
राकेश त्रिपाठी ने बताया कि अरहर, सरसों या खली, मूंग की दाल, तिल सभी दो-दो किलो पिसी हुई, 20 किलो बेसन व दो किलो गुड़ को मिलाकर 100 लीटर पानी में एक शीशी वेस्ट डी कंपोजर, एक लोहे का टुकड़ा और एक तांबे का टुकड़ा डालकर 10 दिन के लिए छोड़ देते हैं। इसके बाद उसमें से पांच लीटर मिश्रण को निकाल कर 100 लीटर पानी में मिलाकर फसल पर स्प्रे करते हैं। इतना मिश्रण एक एकड़ खेत के लिए पर्याप्त होता है। पहली बार फसल के पहले पानी के साथ, दूसरी बार फसल पर फूल आने पर और तीसरी बार फसल में दाना पड़ते समय स्प्रे करने से उत्पादन में वृद्धि होती है और खेत की जल धारण क्षमता बढ़ती है। मिट्टी उपजाऊ हो जाती है। खेतों में कंडे या लकड़ी की राख का भी साल में दो बार इस्तेमाल करते हैं। इससे खेतों में फास्फोरस की पूर्ति होती है।
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माइक्रो न्यूट्रिएंटस से मिलते हैं 14 पोषक तत्व
माइक्रो न्यूट्रिएंट्स से फसलों को 14 प्रकार के पोषक तत्व मिलते हैं। अलग से बाजार से कुछ खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती। न यूरिया की और न डीएपी की। बताया कि तीन एकड़ खेत में गन्ने की खेती की और उसमें भी इसका प्रयोग किया। गन्ने के साथ में अरहर के बीज भी डाल दिए। अरहर की जड़ें खेत को नाइट्रोजन देती हैं। परिणाम यह हुआ कि गन्ने की फसल शानदार हुई और गन्ने की लंबाई पंद्रह से बीस फीट तक हुई। खास बात यह कि गन्ने में कीड़ा भी नहीं लगा।
पीपल, बरगद के पौधे लगाकर संजो रहे प्राकृतिक जीवन
प्रकृति के संरक्षण के लिए राकेश इतने जागरूक हैं कि खेत में पीपल, बरगद, अर्जुन, सहजन के पौधे भी लगा रखे हैं। क्लीन एनर्जी के लिए सोलर सिस्टम लगाया है। इससे खेतों की सिंचाई करते हैं। एक एकड़ में अमरूद का बाग लगा है। कीटों से रक्षा के लिए ट्रैपिंग प्लेट लगा रखी है।