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लॉकडाउन ने हुनरमंदों को किया बेरोजगार
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शादी पार्टियों, बर्थडे और गृह प्रवेश जैसे कार्यक्रमों में अपनी मौजूदगी में चार-चांद लगाने वाले डीजे, रोडलाइट और फोटोग्राफी का काम करने वाले लोग अब खुद बेरोजगारी की दंश झेल रहे हैं।
अप्रैल, मई व जून ये तीन महीने सहालग की दृष्टि से काफी अहम माने जाते हैं। कोरोना के कारण इन लोगों को भी अपने व्यापार से हाथ धोना पड़ा।
इन लोगों को उम्मीद थी कि जून में व्यापार कुछ चलेगा, लेकिन लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के कारण व्यापार नहीं चल सका। 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के चार चरणों के बाद अब अनलॉक-1 चल रहा है।
हालांकि इसके कारण सभी छोटे, बड़े व्यापारों को नुकसान हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा झटका इन लोगों को लगा है।
निवाड़ीकला के डीजे संचालक पंकज कहते हैं कि पहले तो कोर्ट के आदेश से डीजे का धंधा मंदा रहा फिर लॉकडाउन से तो बिल्कुल काम खत्म ही हो गया है और आगे भी उम्मीद नहीं है कि इस वर्ष काम शुरू हो पाएगा।
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अहेरीपुर निवासी लाइटहाउस संचालक अरविंद पाल ने बताया लॉकडाउन से पहले 30 बुकिंग थी।
लॉकडाउन के शुरुआती दिनों के बाद लगा था कि शायद जून की सहालग मिल जाएगी, लेकिन वह भी नहीं मिली। अब जो शादी हो भी रही हैं उनमें लोग लाइट सजावट का कोई काम ही नहीं करवा रहा है।
फोटोग्राफर विकास दीक्षित की मानें तो इस बार उनका व्यापार तो बिल्कुल खत्म ही हो गया है।
आजकल किसी भी काम में फोटो खिंचवाने की अलग ही रिवाज है। लेकिन अब को कोई पूछता ही नहीं। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हालात सामान्य हो जाएंगे ।
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अप्रैल, मई व जून ये तीन महीने सहालग की दृष्टि से काफी अहम माने जाते हैं। कोरोना के कारण इन लोगों को भी अपने व्यापार से हाथ धोना पड़ा।
इन लोगों को उम्मीद थी कि जून में व्यापार कुछ चलेगा, लेकिन लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के कारण व्यापार नहीं चल सका। 25 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के चार चरणों के बाद अब अनलॉक-1 चल रहा है।
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हालांकि इसके कारण सभी छोटे, बड़े व्यापारों को नुकसान हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा झटका इन लोगों को लगा है।
निवाड़ीकला के डीजे संचालक पंकज कहते हैं कि पहले तो कोर्ट के आदेश से डीजे का धंधा मंदा रहा फिर लॉकडाउन से तो बिल्कुल काम खत्म ही हो गया है और आगे भी उम्मीद नहीं है कि इस वर्ष काम शुरू हो पाएगा।
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अहेरीपुर निवासी लाइटहाउस संचालक अरविंद पाल ने बताया लॉकडाउन से पहले 30 बुकिंग थी।
लॉकडाउन के शुरुआती दिनों के बाद लगा था कि शायद जून की सहालग मिल जाएगी, लेकिन वह भी नहीं मिली। अब जो शादी हो भी रही हैं उनमें लोग लाइट सजावट का कोई काम ही नहीं करवा रहा है।
फोटोग्राफर विकास दीक्षित की मानें तो इस बार उनका व्यापार तो बिल्कुल खत्म ही हो गया है।
आजकल किसी भी काम में फोटो खिंचवाने की अलग ही रिवाज है। लेकिन अब को कोई पूछता ही नहीं। उम्मीद है कि आने वाले महीनों में हालात सामान्य हो जाएंगे ।