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टीबी मरीजों की हो रही जियो टैगिंग, दर्ज हो रही है लोकेशन
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इटावा। देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए शासन-प्रशासन पूरे दमखम से जुटा है। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मरीजों की जियो टैगिंग शुरू कर दी है। इसके लिए स्वास्थ्य टीमें टीबी मरीजों के घर जाकर उनकी लोकेशन निक्षय पोर्टल पर दर्ज कर रही हैं।
जिले में एक जनवरी 2019 से 30 जून 2021 तक सरकारी अस्पतालों के 8152 मरीज व निजी अस्पतालों के 1863 मरीज चिह्नित किए गए हैं। 12 जुलाई से 25 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता संभावित क्षय रोगियों को चिह्नित कर उनकी जांच कराएंगी।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीएल संजय ने बताया निजी व सरकारी क्षेत्र के सभी क्षय रोगियों के घरों की जियो टैगिंग करते हुए उनकी लोकेशन अपडेट करने का शासन से निर्देश प्राप्त हुआ है। जियो टैगिंग से पता चल जाएगा किस क्षेत्र या गांव में क्षय रोगियों की सघनता ज्यादा है। इसके बाद टीबी रोगी खोजी अभियान के दौरान उस क्षेत्र पर विशेष फोकस किया जाएगा।
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क्षय विभाग में जिला समन्वयक कंचन तिवारी ने बताया टीबी मरीजों की जियो टैगिंग में 21 कर्मचारी लगाए गए हैं। जिसमें 11 सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर, 4 सीनियर ट्रीटमेंट लैब सुपरवाइजर व 6 टीबी स्वास्थ्य परिदर्शक शामिल हैं। 31 जुलाई तक लगभग सभी मरीजों की लोकेशन पोर्टल पर दर्ज कर दी जाएगी।
क्या है जियो टैगिंग
जियो टैगिंग ऐसी भौगोलिक जानकारी है जो फोटो, नक्शे और वीडियो के माध्यम से दर्शाई जाती है। इसका डाटा मरीज के संपर्क में रहने में मददगार साबित होता है। इनमें अन्य जानकारियों में जगह का नाम और क्षेत्र ही नहीं, बल्कि समुद्र तल से उसकी ऊंचाई और दूरी भी शामिल होती है।
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जिले में एक जनवरी 2019 से 30 जून 2021 तक सरकारी अस्पतालों के 8152 मरीज व निजी अस्पतालों के 1863 मरीज चिह्नित किए गए हैं। 12 जुलाई से 25 जुलाई तक दस्तक अभियान चलाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ता संभावित क्षय रोगियों को चिह्नित कर उनकी जांच कराएंगी।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. बीएल संजय ने बताया निजी व सरकारी क्षेत्र के सभी क्षय रोगियों के घरों की जियो टैगिंग करते हुए उनकी लोकेशन अपडेट करने का शासन से निर्देश प्राप्त हुआ है। जियो टैगिंग से पता चल जाएगा किस क्षेत्र या गांव में क्षय रोगियों की सघनता ज्यादा है। इसके बाद टीबी रोगी खोजी अभियान के दौरान उस क्षेत्र पर विशेष फोकस किया जाएगा।
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क्षय विभाग में जिला समन्वयक कंचन तिवारी ने बताया टीबी मरीजों की जियो टैगिंग में 21 कर्मचारी लगाए गए हैं। जिसमें 11 सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर, 4 सीनियर ट्रीटमेंट लैब सुपरवाइजर व 6 टीबी स्वास्थ्य परिदर्शक शामिल हैं। 31 जुलाई तक लगभग सभी मरीजों की लोकेशन पोर्टल पर दर्ज कर दी जाएगी।
क्या है जियो टैगिंग
जियो टैगिंग ऐसी भौगोलिक जानकारी है जो फोटो, नक्शे और वीडियो के माध्यम से दर्शाई जाती है। इसका डाटा मरीज के संपर्क में रहने में मददगार साबित होता है। इनमें अन्य जानकारियों में जगह का नाम और क्षेत्र ही नहीं, बल्कि समुद्र तल से उसकी ऊंचाई और दूरी भी शामिल होती है।