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Etawah News: गोदामों में खाद, समितियों में ताले, बोआई के वक्त किसान परेशान
Thu, 29 Oct 2026 12:31 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 29 Oct 2026 12:31 AM IST
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फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद
इटावा। जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसान डीएपी और यूरिया के लिए भटक रहे हैं। 22 अक्तूबर से सहकारी समितियों के सचिवों और कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते समितियों पर ताले लटके हैं। इससे आलू, गेहूं और सरसों की बोआई प्रभावित हो रही है। मजबूरी में किसान निजी दुकानों से महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, जिले में करीब 25,336 हजार मीट्रिक टन यूरिया और 3038 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। बृहस्पतिवार को डीएपी की दो रैक पहुंचने की उम्मीद है। सचिव और कर्मचारी नियमित वेतन तथा राज्य कर्मचारियों का दर्जा देने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।
जसवंतनगर, चकरनगर, उदी और अन्य क्षेत्रों में समितियां बंद होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। समय पर खाद नहीं मिलने से बोआई में देरी और पैदावार प्रभावित होने की चिंता सता रही है। जिले की समितियों की पड़ताल करती ये रिपोर्ट...
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केस-एक
आलू की बोआई में देरी, सरसों की फसल पर भी असर
जसवंतनगर। क्षेत्र में समितियां बंद होने से आलू और सरसों की बोआई करने वाले किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। आलू की बोआई का समय निकलता जा रहा है। किसानों को बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। वहीं, सरसों की बोआई में देरी से पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। किसान लगातार समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हड़ताल खत्म होने की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है। (संवाद)
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केस-दो
बंद समितियों ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें
चकरनगर। तहसील क्षेत्र की बंसरी, टिटावली, भरेह, चकरनगर, कार्यावली और बरेछा साधन सहकारी समितियों में भी ताले लटके हैं। बुधवार को बंसरी समिति पर सन्नाटा पसरा रहा। खाद लेने पहुंचे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। गेहूं और सरसों की बोआई के लिए डीएपी और यूरिया की जरूरत के बीच समितियों के बंद रहने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। (संवाद)
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केस-तीन
पुलिस रही मौजूद, नहीं मिली खाद
भरथना। क्षेत्र के भोली स्थित पीसीएफ सेंटर पर बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में डीएपी खाद का वितरण किया गया। खाद लेने के लिए बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। पुरुषों के साथ महिलाएं भी कतार में लगी रहीं। भीड़ अधिक होने के कारण कई किसानों को खाद नहीं मिल सकी। वहीं, सचिवों की हड़ताल के चलते ऊमरसेड़ा सहकारी समिति के कार्यालय में दोपहर करीब एक बजे ताला लटका रहा। (संवाद)
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केस-चार
समितियां बंद, यूरिया की बोरियां भी नहीं बंट रहीं
उदी। क्षेत्र में बढ़पुरा ब्लॉक की सहकारी समिति लिमिटेड चंदरपुरा 22 अक्तूबर से बंद है। समिति में डीएपी उपलब्ध नहीं है, जबकि यूरिया की करीब 300 बोरियां रखी हैं। सचिव रवि के मुताबिक, हड़ताल के चलते समिति बंद है और डीएपी न होने से किसान परेशान हैं। यूरिया उपलब्ध होने के बावजूद वितरण नहीं हो पा रहा है। कामेत सहकारी समिति में भी ताला लगा है। समिति अध्यक्ष सुरेंद्र ने बताया कि अभी तक डीएपी की बोरियां नहीं आई हैं। समिति में यूरिया की करीब 300 बोरियां रखी हैं, लेकिन सचिव आशीष यादव के हड़ताल से लौटने के बाद ही वितरण हो सकेगा। (संवाद)
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खाद के लिए भटकना पड़ रहा
- नगला तोर निवासी किसान लव किशोर ने बताया कि आलू की बोआई के लिए खाद की बेहद जरूरत है। समितियां बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। बोआई में दिन-ब-दिन देरी हो रही है और बाजार में खाद महंगे दामों पर मिल रही है।
- बढ़पुरा ब्लॉक की सहकारी समिति लिमिटेड चंदरपुरा पर खाद लेने गए अजबपुर निवासी गिरीश यादव को समिति पर ताला लगा मिला। उन्होंने बताया कि गेहूं के लिए खाद की आवश्यकता है लेकिन हड़ताल के कारण खाद ही नहीं मिल रही है।
- सिंडौस निवासी किसान सज्जन कठेरिया ने बताया कि गेहूं और सरसों की बोआई के लिए डीएपी और यूरिया चाहिए, लेकिन समितियां बंद होने से खाद नहीं मिल रही है। इसके लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
- ग्राम चमरपुरा निवासी पिंकू का कहना है कि डीएपी लेने के लिए सुबह से भोली सेंटर पर आए हैं। भीड़ बढ़ने के कारण खाद नहीं मिल सकी। निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
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समितियों के सचिवों की हड़ताल में किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए समितियों पर सुपरवाइजर के साथ ही अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई है। जनपद में खाद की किल्लत नहीं है, बुधवार को भी कई समितियों का निरीक्षण किया है। लगातार निगरानी करके खाद का वितरण कराया जा रहा है।
- कमलेश नारायण वर्मा, एआर कॉपरेटिव
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कृषि विभाग के अनुसार, जिले में करीब 25,336 हजार मीट्रिक टन यूरिया और 3038 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है। बृहस्पतिवार को डीएपी की दो रैक पहुंचने की उम्मीद है। सचिव और कर्मचारी नियमित वेतन तथा राज्य कर्मचारियों का दर्जा देने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।
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जसवंतनगर, चकरनगर, उदी और अन्य क्षेत्रों में समितियां बंद होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। समय पर खाद नहीं मिलने से बोआई में देरी और पैदावार प्रभावित होने की चिंता सता रही है। जिले की समितियों की पड़ताल करती ये रिपोर्ट...
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केस-एक
आलू की बोआई में देरी, सरसों की फसल पर भी असर
जसवंतनगर। क्षेत्र में समितियां बंद होने से आलू और सरसों की बोआई करने वाले किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। आलू की बोआई का समय निकलता जा रहा है। किसानों को बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ रही है। वहीं, सरसों की बोआई में देरी से पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। किसान लगातार समितियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हड़ताल खत्म होने की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है। (संवाद)
केस-दो
बंद समितियों ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें
चकरनगर। तहसील क्षेत्र की बंसरी, टिटावली, भरेह, चकरनगर, कार्यावली और बरेछा साधन सहकारी समितियों में भी ताले लटके हैं। बुधवार को बंसरी समिति पर सन्नाटा पसरा रहा। खाद लेने पहुंचे किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ा। गेहूं और सरसों की बोआई के लिए डीएपी और यूरिया की जरूरत के बीच समितियों के बंद रहने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। (संवाद)
केस-तीन
पुलिस रही मौजूद, नहीं मिली खाद
भरथना। क्षेत्र के भोली स्थित पीसीएफ सेंटर पर बुधवार को पुलिस की मौजूदगी में डीएपी खाद का वितरण किया गया। खाद लेने के लिए बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। पुरुषों के साथ महिलाएं भी कतार में लगी रहीं। भीड़ अधिक होने के कारण कई किसानों को खाद नहीं मिल सकी। वहीं, सचिवों की हड़ताल के चलते ऊमरसेड़ा सहकारी समिति के कार्यालय में दोपहर करीब एक बजे ताला लटका रहा। (संवाद)
केस-चार
समितियां बंद, यूरिया की बोरियां भी नहीं बंट रहीं
उदी। क्षेत्र में बढ़पुरा ब्लॉक की सहकारी समिति लिमिटेड चंदरपुरा 22 अक्तूबर से बंद है। समिति में डीएपी उपलब्ध नहीं है, जबकि यूरिया की करीब 300 बोरियां रखी हैं। सचिव रवि के मुताबिक, हड़ताल के चलते समिति बंद है और डीएपी न होने से किसान परेशान हैं। यूरिया उपलब्ध होने के बावजूद वितरण नहीं हो पा रहा है। कामेत सहकारी समिति में भी ताला लगा है। समिति अध्यक्ष सुरेंद्र ने बताया कि अभी तक डीएपी की बोरियां नहीं आई हैं। समिति में यूरिया की करीब 300 बोरियां रखी हैं, लेकिन सचिव आशीष यादव के हड़ताल से लौटने के बाद ही वितरण हो सकेगा। (संवाद)
खाद के लिए भटकना पड़ रहा
- नगला तोर निवासी किसान लव किशोर ने बताया कि आलू की बोआई के लिए खाद की बेहद जरूरत है। समितियां बंद होने से परेशानी बढ़ गई है। बोआई में दिन-ब-दिन देरी हो रही है और बाजार में खाद महंगे दामों पर मिल रही है।
- बढ़पुरा ब्लॉक की सहकारी समिति लिमिटेड चंदरपुरा पर खाद लेने गए अजबपुर निवासी गिरीश यादव को समिति पर ताला लगा मिला। उन्होंने बताया कि गेहूं के लिए खाद की आवश्यकता है लेकिन हड़ताल के कारण खाद ही नहीं मिल रही है।
- सिंडौस निवासी किसान सज्जन कठेरिया ने बताया कि गेहूं और सरसों की बोआई के लिए डीएपी और यूरिया चाहिए, लेकिन समितियां बंद होने से खाद नहीं मिल रही है। इसके लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
- ग्राम चमरपुरा निवासी पिंकू का कहना है कि डीएपी लेने के लिए सुबह से भोली सेंटर पर आए हैं। भीड़ बढ़ने के कारण खाद नहीं मिल सकी। निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
समितियों के सचिवों की हड़ताल में किसानों को परेशानी न हो, इसके लिए समितियों पर सुपरवाइजर के साथ ही अन्य कर्मचारियों की तैनाती की गई है। जनपद में खाद की किल्लत नहीं है, बुधवार को भी कई समितियों का निरीक्षण किया है। लगातार निगरानी करके खाद का वितरण कराया जा रहा है।
- कमलेश नारायण वर्मा, एआर कॉपरेटिव

फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद

फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद

फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद

फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद

फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद

फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद

फोटो 30::सहकारी समिति जसवंतनगर में लटका ताला। संवाद