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बेहद कमजोर थे शावक : वीके सिंह
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इटावा। बिजनौर से रेस्क्यू कर सफारी पार्क में लाए गए तेंदुए के तीन दुधमुंहे शावकों कमजोर हालत में थे। उनकी मौत की वजह जानने के लिए ही विसरा को बरेली प्रयोगशाला भेजा गया है। यह बात इटावा सफारी के डायरेक्टर वीके सिंह ने कही है।
डायरेक्टर ने बताया कि गत आठ सितंबर को ये तीनों शावक सफारी के सुपुर्द किए गए थे, तब बिजनौर के पशु चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट भी साथ में आई थी। इसमें उन्होंने साफ तौर पर उल्लेख किया कि शावक बेहद कमजोर अवस्था में हैं। उनके शरीर से बाल झड़ रहे हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है, जब चमड़ी उधड़ना शुरू हो जाती है। तीनों की नाजुक हालत को देखते हुए नियो नेटल सेंटर में रखा गया था। अस्पताल प्रभारी डॉ. गौरव श्रीवास्तव की टीम उनकी देखभाल कर रही थी। डॉ. गौरव ने बताया कि 10 सितंबर तक तीनों शावकों के दूध निगलने की कंडीशन खराब थी। फिर भी उनको फीडिंग कराई गई थी। खराब स्वास्थ्य और कमजोर इम्युनिटी की वजह से तीनों को दस्त शुरू हो गए थे। कानपुर से डॉ. आरके सिंह भी बुलाए गए थे। शावकों ने मुंह से भोजन लेना बंद कर दिया था। उन्हें लाइफ सपोर्ट ट्रीटमेंट भी दिए गए। 19 सितंबर की सुबह एक और अगले दिन सुबह और देर शाम में शेष दोनों शावकों की मृत्यु हो गई।
शावकों की पोस्टमार्टम में कार्डियोरेस्प्रेटरी फेल हो जाना वजह पाई गई है। इसका मतलब है कि उनके दिल ने काम करना बंद कर दिया था। दिल ने काम करना क्यों बंद किया। इसकी वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम से विसरा व अन्य जैविक नमूने एकत्रित किए गए हैं। जिन्हें जांच के लिए आईवीआरआई बरेली प्रयोगशाला भेजा गया है। उम्मीद है कि 26 सितंबर तक विसरा रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी।
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डायरेक्टर ने बताया कि गत आठ सितंबर को ये तीनों शावक सफारी के सुपुर्द किए गए थे, तब बिजनौर के पशु चिकित्साधिकारी की रिपोर्ट भी साथ में आई थी। इसमें उन्होंने साफ तौर पर उल्लेख किया कि शावक बेहद कमजोर अवस्था में हैं। उनके शरीर से बाल झड़ रहे हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है, जब चमड़ी उधड़ना शुरू हो जाती है। तीनों की नाजुक हालत को देखते हुए नियो नेटल सेंटर में रखा गया था। अस्पताल प्रभारी डॉ. गौरव श्रीवास्तव की टीम उनकी देखभाल कर रही थी। डॉ. गौरव ने बताया कि 10 सितंबर तक तीनों शावकों के दूध निगलने की कंडीशन खराब थी। फिर भी उनको फीडिंग कराई गई थी। खराब स्वास्थ्य और कमजोर इम्युनिटी की वजह से तीनों को दस्त शुरू हो गए थे। कानपुर से डॉ. आरके सिंह भी बुलाए गए थे। शावकों ने मुंह से भोजन लेना बंद कर दिया था। उन्हें लाइफ सपोर्ट ट्रीटमेंट भी दिए गए। 19 सितंबर की सुबह एक और अगले दिन सुबह और देर शाम में शेष दोनों शावकों की मृत्यु हो गई।
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शावकों की पोस्टमार्टम में कार्डियोरेस्प्रेटरी फेल हो जाना वजह पाई गई है। इसका मतलब है कि उनके दिल ने काम करना बंद कर दिया था। दिल ने काम करना क्यों बंद किया। इसकी वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम से विसरा व अन्य जैविक नमूने एकत्रित किए गए हैं। जिन्हें जांच के लिए आईवीआरआई बरेली प्रयोगशाला भेजा गया है। उम्मीद है कि 26 सितंबर तक विसरा रिपोर्ट प्राप्त हो जाएगी।
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