{"_id":"60e5e0908ebc3ebb4a5ab988","slug":"etawah-news-tragedy-king-dilip-kumar-was-related-to-etawah-etawah-news-knp6388590161","type":"story","status":"publish","title_hn":"-शहर के कटरा शमशेर खां स्थित बड़ी दरगाह में माथा टेकने आए थे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
-शहर के कटरा शमशेर खां स्थित बड़ी दरगाह में माथा टेकने आए थे
विज्ञापन
इटावा। ट्रेजडी किंग के नाम के मशहूर फिल्म अभिनेता यूसूफ खान उर्फ दिलीप कुमार का इटावा से भी गहरा नाता रहा है। वह 1972 व 75 में शहर के कटरा शमशेर स्थित बड़ी दरगाह में पत्नी सायरा बानो व सास नसीम बानो के साथ माथा टेकने आए थे।
इसी साल 16 मई को दरगाह के मैनेजर हनी वारसी से मोबाइल पर हुई बातचीत में दिलीप कुमार ने कहा था कि स्वस्थ होने पर वह दरगाह में माथा टेकने आएंगे। अभिनेता के निधन की खबर सुनकर हनी वारसी हतप्रभ रह गए।
कटरा शमशेर स्थित बड़ी दरगाह परिसर में रहने वाले हनी वारसी ने बताया कि नसीम बानो की मां शमशाद बेगम किसी जमाने में इटावा शहर के ही कबीरगंज मोहल्ले में रहती थीं।
विज्ञापन
1955 के करीब नसीम बानो का परिवार यहां से मुंबई चला गया। हनी वारसी ने बताया कि अभिनेत्री सायरा बानो से निकाह करने के बाद दिलीप कुमार 1972 में दरगाह में माथा टेकने के लिए आए थे। तब सामान्य दिन थे। उसी दिन परिवार के साथ मुंबई लौट गए थे।
1975 में दरगाह के उर्स पर दिलीप कुमार पत्नी व सास के साथ फिर आए थे। उन्हें तीन दिन ठहरना था, लेकिन भीड़ अधिक देख प्रशासनिक अफसरों के अनुरोध पर दिलीप कुमार परिवार के साथ दो दिन बाद ही मुंबई लौट गए थे। इसके बाद वह दरगाह नहीं आए, लेकिन फोन पर उनसे व सायरा बानो से अक्सर उनकी बातचीत होती थी।
मेरी सेहत की बेहतरी के लिए खुदा से दुआ कीजिए
हनी वारसी ने बताया कि इसी साल ईद पर मुबारकबाद देने के लिए उन्होंने दिलीप कुमार को फोन किया था। सायरा बानो ने फोन पर बात की थी।
दिलीप कुमार के कहने पर ही सायरा बानो ने उनसे कहा था कि ‘मेरी (दिलीप कुमार) सेहत की बेहतरी के लिए खुदा से दुआ कीजिए, स्वस्थ होने पर वह दरगाह माथा टेकने जरूर आएंगे’, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दिलीप कुमार के निधन से उनका पूरा परिवार आहत है।
विज्ञापन
इसी साल 16 मई को दरगाह के मैनेजर हनी वारसी से मोबाइल पर हुई बातचीत में दिलीप कुमार ने कहा था कि स्वस्थ होने पर वह दरगाह में माथा टेकने आएंगे। अभिनेता के निधन की खबर सुनकर हनी वारसी हतप्रभ रह गए।
विज्ञापन
कटरा शमशेर स्थित बड़ी दरगाह परिसर में रहने वाले हनी वारसी ने बताया कि नसीम बानो की मां शमशाद बेगम किसी जमाने में इटावा शहर के ही कबीरगंज मोहल्ले में रहती थीं।
विज्ञापन
1955 के करीब नसीम बानो का परिवार यहां से मुंबई चला गया। हनी वारसी ने बताया कि अभिनेत्री सायरा बानो से निकाह करने के बाद दिलीप कुमार 1972 में दरगाह में माथा टेकने के लिए आए थे। तब सामान्य दिन थे। उसी दिन परिवार के साथ मुंबई लौट गए थे।
1975 में दरगाह के उर्स पर दिलीप कुमार पत्नी व सास के साथ फिर आए थे। उन्हें तीन दिन ठहरना था, लेकिन भीड़ अधिक देख प्रशासनिक अफसरों के अनुरोध पर दिलीप कुमार परिवार के साथ दो दिन बाद ही मुंबई लौट गए थे। इसके बाद वह दरगाह नहीं आए, लेकिन फोन पर उनसे व सायरा बानो से अक्सर उनकी बातचीत होती थी।
मेरी सेहत की बेहतरी के लिए खुदा से दुआ कीजिए
हनी वारसी ने बताया कि इसी साल ईद पर मुबारकबाद देने के लिए उन्होंने दिलीप कुमार को फोन किया था। सायरा बानो ने फोन पर बात की थी।
दिलीप कुमार के कहने पर ही सायरा बानो ने उनसे कहा था कि ‘मेरी (दिलीप कुमार) सेहत की बेहतरी के लिए खुदा से दुआ कीजिए, स्वस्थ होने पर वह दरगाह माथा टेकने जरूर आएंगे’, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। दिलीप कुमार के निधन से उनका पूरा परिवार आहत है।