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Etawah News: पानी बेचकर कमा रहे मोटा मुनाफा
Thu, 15 Jun 2023 12:50 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Thu, 15 Jun 2023 12:50 AM IST
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फोटो 07::: बोरियों में रखे पानी के पाउच। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। तपिश भरी गर्मी में डीहाईड्रेशन से बचने और गला तर करने के लिए हर किसी को पानी की दरकार जरूर होती है। सूखते कंठ की प्यास बुझाने में पानी की बोतलें और पानी के पाउच की बिक्री में जमकर इजाफा हो रहा है। पानी की तेज मांग के चलते दुकानदार इन पाउचों के मानक और गुणवत्ता का भी ध्यान नही रख रहे हैं। उधर, भीषण गर्मी के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर प्याऊ की व्यवस्था भी नाकाफी सबित हो रही है।
वहीं विभाग भी ऐसे प्लांटों पर कार्रवाई से बच रहे हैं। एक-दो रुपये में बिकने वाला पानी का पाउच लोगों के प्यास बुझाने के नाम पर बीमारियां परोस रहे हैं। गांव, कस्बा और शहरों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में पानी के पाउचों की बिक्री की जा रही है। इन पाउचों और बोतलों पर प्लांट संचालक न तो उनके उत्पादन तिथि दर्ज कर रहे हैं और न ही एक्सपायरी का।
वहीं जनपद में करीब 50 से अधिक पानी के प्लांट का संचालन हो रहा है, लेकिन मानकों की अगर बात करें तो सिर्फ चुनिंदा ही खाद्य विभाग में पंजीकृत हैं। सिर्फ मानकों का ठेका भी उन्हीं के हाथों में थमाया गया है, जबकि अन्य प्लांटों पर विभाग कार्रवाई तो दूर समय समय पर उनकी जांच करना भी उचित नहीं समझते हैं।
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रामकिशोर, रघुनाथ यादव, अजय नारायण, बाबू सिंह, प्रेम कुशवाहा का कहना है कि विभाग को ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे प्लांटों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो मानकों का कतई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इन गावों में जमकर बिक रहे हैं पानी के पाउच
पानी के पाउच की बिक्री इटावा शहर के अतिरिक्त छोटे-छोटे गावों में भी जमकर हो रही है। इनमें महेवा, बकेवर , निवाड़ीकला, अहेरीपुर, उरेंग सहित बड़ी संख्या में गांव शामिल है। इन गांवों में कईं प्लांट भी खोल लिए गए हैं, जो चोरी छिपे संचालित किए जा रहे हैं। यह खुलेआम बिजली चोरी करके राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
यह हैं आरओ प्लांट के नियम....
आरओ वाटर प्लांट लगाने के लिए जिला उद्योग केंद्र में पंजीकरण करवाना होगा। उसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फूड कारपोरेशन से एनओसी की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही संचालक को शपथ पत्र देना होता है कि जिस स्थान पर प्लांट का संचालन होगा वह सुरक्षित जोन में हैं या क्रिटिकल जोन में। पानी को रीचार्ज और ठंडे करने की व्यवस्था भी होनी आवश्यक है। इन मानकों को पूरा करने के बाद भूगर्भ विभाग से एन ओसी लेनी होती हैं। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही इस प्लांट का संचालन किया जा सकता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में सीधे मशीन लगाकर प्लांट चालू कर दिया जाता है।
कोट
लगातार अभियान चलाकर बिना मानक के पानी बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। फिर सघन अभियान चलाकर इस तरह के प्लांटों पर कार्रवाई की जाएगी। सतीश शुक्ला, सहायक आयुक्त द्वितीय, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग।
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संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। तपिश भरी गर्मी में डीहाईड्रेशन से बचने और गला तर करने के लिए हर किसी को पानी की दरकार जरूर होती है। सूखते कंठ की प्यास बुझाने में पानी की बोतलें और पानी के पाउच की बिक्री में जमकर इजाफा हो रहा है। पानी की तेज मांग के चलते दुकानदार इन पाउचों के मानक और गुणवत्ता का भी ध्यान नही रख रहे हैं। उधर, भीषण गर्मी के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर प्याऊ की व्यवस्था भी नाकाफी सबित हो रही है।
वहीं विभाग भी ऐसे प्लांटों पर कार्रवाई से बच रहे हैं। एक-दो रुपये में बिकने वाला पानी का पाउच लोगों के प्यास बुझाने के नाम पर बीमारियां परोस रहे हैं। गांव, कस्बा और शहरों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में पानी के पाउचों की बिक्री की जा रही है। इन पाउचों और बोतलों पर प्लांट संचालक न तो उनके उत्पादन तिथि दर्ज कर रहे हैं और न ही एक्सपायरी का।
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वहीं जनपद में करीब 50 से अधिक पानी के प्लांट का संचालन हो रहा है, लेकिन मानकों की अगर बात करें तो सिर्फ चुनिंदा ही खाद्य विभाग में पंजीकृत हैं। सिर्फ मानकों का ठेका भी उन्हीं के हाथों में थमाया गया है, जबकि अन्य प्लांटों पर विभाग कार्रवाई तो दूर समय समय पर उनकी जांच करना भी उचित नहीं समझते हैं।
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रामकिशोर, रघुनाथ यादव, अजय नारायण, बाबू सिंह, प्रेम कुशवाहा का कहना है कि विभाग को ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे प्लांटों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो मानकों का कतई ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इन गावों में जमकर बिक रहे हैं पानी के पाउच
पानी के पाउच की बिक्री इटावा शहर के अतिरिक्त छोटे-छोटे गावों में भी जमकर हो रही है। इनमें महेवा, बकेवर , निवाड़ीकला, अहेरीपुर, उरेंग सहित बड़ी संख्या में गांव शामिल है। इन गांवों में कईं प्लांट भी खोल लिए गए हैं, जो चोरी छिपे संचालित किए जा रहे हैं। यह खुलेआम बिजली चोरी करके राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
यह हैं आरओ प्लांट के नियम....
आरओ वाटर प्लांट लगाने के लिए जिला उद्योग केंद्र में पंजीकरण करवाना होगा। उसके बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और फूड कारपोरेशन से एनओसी की आवश्यकता होती है। इसके साथ ही संचालक को शपथ पत्र देना होता है कि जिस स्थान पर प्लांट का संचालन होगा वह सुरक्षित जोन में हैं या क्रिटिकल जोन में। पानी को रीचार्ज और ठंडे करने की व्यवस्था भी होनी आवश्यक है। इन मानकों को पूरा करने के बाद भूगर्भ विभाग से एन ओसी लेनी होती हैं। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद ही इस प्लांट का संचालन किया जा सकता है, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में सीधे मशीन लगाकर प्लांट चालू कर दिया जाता है।
कोट
लगातार अभियान चलाकर बिना मानक के पानी बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। फिर सघन अभियान चलाकर इस तरह के प्लांटों पर कार्रवाई की जाएगी। सतीश शुक्ला, सहायक आयुक्त द्वितीय, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग।