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खातों को ट्रांसफर कराके निकाली गई रकम

Thu, 06 Jun 2019 12:24 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2019 12:24 AM IST
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खातों को ट्रांसफर कराके निकाली गई रकम
इटावा। शहर के दो उप डाकघरों से जुड़े गबन मामले की जांच में कुछ नए तथ्य उजागर हुए हैं। इसमें पता चला कि किस तरह आरोपी सब पोस्टमास्टर ने खातों से रकम हजम करने का तरीका निकाला था। जांच से साफ हुआ कि गलत तरीका अपनाकर खातों को ट्रांसफर कराया गया। ताकि उन खातों में की जाने वाली अवैध गतिविधियों पर किसी की नजर न पड़े। जिन कर्मचारियों ने खातों की ट्रांसफर प्रक्रिया में नियमों की अवहेलना की, वे भी इस जांच के दायरे में हैं। जांच रिपोर्ट क्षेत्रीय कार्यालय आगरा भेजी गई है। उच्चाधिकारियों के आदेश पर कार्रवाई की गाज गिरना तय माना जा रहा है।
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नई मंडी स्थित अशोक नगर व न्यू सिटी उप डाकघरों के खातों से करीब 85 लाख रुपयों का गबन हुआ है। इस गबन का आरोप इन दोनों उप डाकघरों में तैनात रहे सब पोस्टमास्टर एनएस चौहान पर है। जो फिलहाल निलंबित होने के बाद जेल में बंद है। इस सनसनीखेज मामले की जांच सीबीआई कर रही है। डाक अधीक्षक मनोज कुमार के निर्देश पर विभागीय स्तर पर भी छानबीन की गई। इसमें उन खातों को गहराई खंगाला गया, जिनसे रकम निकाली गई है। जांच में यह पता चला कि गबन से जुड़े कई खाते ट्रांसफर कराए गए हैं।
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आरोपी सब पोस्टमास्टर एनएस चौहान पहले न्यू सिटी उप डाकघर में तैनात रहा। उसके बाद वह अशोक नगर उप डाकघर में पहुंचा। न्यू सिटी उप डाकघर में रहते हुए उसने खातों से अवैध ढंग से रकम निकाली। जब उसकी तैनाती अशोकनगर उप डाकघर में हो गई, तो न्यू सिटी के कई खातों को उसने अशोकनगर शाखा में ट्रांसफर करा लिया। इससे गड़बड़ी वाले खाते किसी अन्य कर्मचारी की नजर में न आ जाएं। जांच में यह बात निकल कर सामने आई है।
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इनसेट
आगरा भेजी है जांच रिपोर्ट
इस संबंध में डाक अधीक्षक मनोज कुमार ने माना कि गलत ढंग से खातों को ट्रांसफर कराया गया है। इस मामले में आरोपी सब पोस्टमास्टर के अलावा और कौन लोग जिम्मेदार हैं। इसकी पूरी जांच रिपोर्ट आगरा पीएमजी आफिस भेज दी है। उच्चाधिकारियों से जो भी आदेेश मिलेंगे। उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। तभी इसका खुलासा होगा।


खाता ट्रांसफर में हुई नियमों की अवहेलना
डाक विभाग में तैनात दो अलग-अलग सुपरवाइजरों की आईडी का इस्तेमाल करके खाता ट्रांसफर कराए जा सकते हैं। नियम यह है कि यह खाता ट्रांसफर सिर्फ प्रधान डाकघर से ही होने चाहिए। इस मामले में प्रधान डाकघर की बजाय अलग-अलग जगहों पर तैनात सुपरवाइजरों की आईडी का इस्तेमाल हुआ है। लिहाजा जिन सुपरवाइजरों ने अपनी आईडी इस्तेमाल की है। वे भी जांच में फंसे हैं। कर्मचारियों ने बताया कि कई बार सहकर्मी होने के नाते ये सब कर दिया जाता है। इसमें जरूरी नहीं कि आईडी इस्तेमाल करने वाले कर्मचारी भी गबन में शामिल रहे हों। लेकिन यह लापरवाही के दायरे में अवश्य आता है। इस पर कार्रवाई हो सकती है।
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