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प्रशासन ने नहीं दिया साथ पुलिस ने खींचा हाथ
Etawah
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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इटावा। आईजी के निर्देश पर बीते दिनों शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए थाना पुलिस व ट्रैफिक पुलिस ने दो दिन अभियान चलाया। लेकिन प्रशासन का साथ न मिलने से पुलिस ने अभियान से हाथ खींच लिया। एक बार फिर शहर की सड़कों पर अतिक्रमणकारियों ने बुलंद हौसलों के साथ अतिक्रमण कर लिया है। अतिक्रमण हटाओ अभियान से उम्मीदें लगाए बैठे शहरवासियों की उम्मीदों पर भी पानी फिर गया, उन्हें जाम से निजात नहीं मिल सका।
शहर की संकरी सड़कें और उस पर फैला अतिक्रमण लोगों के लिए आए दिन परेशानियों का कारण बनता है। प्रमुख बाजारों में अतिक्रमण के कारण दिन में कई-कई बार जाम लगने से आम शहरी परेशान रहते हैं। बीते दिनों जिले की कानून व्यवस्था का जायजा लेने आए आईजी कानपुर ने बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था व फैले अतिक्रमण को प्रशासनिक व आपसी सहमति के साथ हटाने के निर्देश दिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए थे।। आईजी के निर्देश पर एसएसपी राजेश मोदक ने नगरपालिका, जिला प्रशासन व व्यापारियों के साथ बैठक की। बैठक में 23 अप्रैल से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने की सहमति बनी। 23 अप्रैल को अतिक्रमण हटाओ अभियान तो शुरू हुआ। लेकिन इस अभियान में न तो नगर पालिका के आला अधिकारी नजर आए और न ही जिला प्रशासन के। सिर्फ ट्रैफिक पुलिस ने ही बिना पार्किंग में खड़े वाहनों को हटवाया। दूसरे दिन 24 अप्रैल को पुलिस फोर्स के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंचे सिविल लाइन थानाध्यक्ष पर व्यापारियों ने उल्टे ही अभद्रता व मारपीट करने का आरोप लगा दिया। खुद पर आरोप लगते देख सिविल लाइन थानाध्यक्ष ने भी अतिक्रमण हटाओ अभियान से हाथ खींच लिया और अभियान ने दम तोड़ दिया।
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शहर की संकरी सड़कें और उस पर फैला अतिक्रमण लोगों के लिए आए दिन परेशानियों का कारण बनता है। प्रमुख बाजारों में अतिक्रमण के कारण दिन में कई-कई बार जाम लगने से आम शहरी परेशान रहते हैं। बीते दिनों जिले की कानून व्यवस्था का जायजा लेने आए आईजी कानपुर ने बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था व फैले अतिक्रमण को प्रशासनिक व आपसी सहमति के साथ हटाने के निर्देश दिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए थे।। आईजी के निर्देश पर एसएसपी राजेश मोदक ने नगरपालिका, जिला प्रशासन व व्यापारियों के साथ बैठक की। बैठक में 23 अप्रैल से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने की सहमति बनी। 23 अप्रैल को अतिक्रमण हटाओ अभियान तो शुरू हुआ। लेकिन इस अभियान में न तो नगर पालिका के आला अधिकारी नजर आए और न ही जिला प्रशासन के। सिर्फ ट्रैफिक पुलिस ने ही बिना पार्किंग में खड़े वाहनों को हटवाया। दूसरे दिन 24 अप्रैल को पुलिस फोर्स के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंचे सिविल लाइन थानाध्यक्ष पर व्यापारियों ने उल्टे ही अभद्रता व मारपीट करने का आरोप लगा दिया। खुद पर आरोप लगते देख सिविल लाइन थानाध्यक्ष ने भी अतिक्रमण हटाओ अभियान से हाथ खींच लिया और अभियान ने दम तोड़ दिया।
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