{"_id":"33-203052","slug":"Etawah-203052-33","type":"story","status":"publish","title_hn":"मां लक्ष्मी से मांगा सुख-समृद्धि का वरदान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मां लक्ष्मी से मांगा सुख-समृद्धि का वरदान
Etawah
Updated Sat, 25 Oct 2014 05:32 AM IST
विज्ञापन
इटावा। दिवाली का पर्व गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पर्व के दिन महिलाएं पकवान बनाने में व्यस्त रहीं। रात को घरों में गणेश-लक्ष्मी जी का पूजन हुआ। दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठानों पर भी पूजा-अर्चना की। झालरों की रोशनी से अमावस्या की अंधेरी रात जगमगाती नजर आई। मुंडेरों पर सजी दीपमालिकाएं मनोहारी दृश्य उकेरती रहीं। देर रात तक आतिशबाजी के नजारे दिखे। बच्चों ने जमकर पटाखे फोड़े।
रोशनी का पर्व दीवाली उत्साह उमंग से सराबोर रहा। सुबह से ही पर्व की तैयारियां शुरू हो गई थी। यूं तो घरों में रंगाई पुताई और साफ सफाई पहले ही की जा चुकी थी। माता लक्ष्मी के आगमन की आकांक्षा लिए लोगों ने घर में स्थापित मंदिर को भक्ति भाव से सजाया। दरवाजों पर शुभ-लाभ आदि वंदनवार सजाए। गणेश और लक्ष्मी को विराजित किया।
शाम होते ही बच्चों में पर्व का उत्साह दिखने लगा। पटाखों की आवाजें आनी शुरू हो गईं। रात होते ही पूजा अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। भगवान श्री गणेश व लक्ष्मी जी का भोग लगाकर आरती उतारी गई। इसके बाद समूचे घर में मोमबत्ती और दीपक चलाकर हर कोने को रोशन किया गया। रंगबिरंगी झालरों की जगमगाती रोशनी ने इसमें चार चांद लगा दिए। बच्चों के साथ बड़ों ने भी जमकर आतिशबाजी का लुत्फ लिया। कई प्रकार आवाज करने वाले पटाखों, राकेट आदि आतिशबाजी से आसमान रह रहकर गुलजार होता रहा। देर रात पटाखों की गूंज रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
रोशनी का पर्व दीवाली उत्साह उमंग से सराबोर रहा। सुबह से ही पर्व की तैयारियां शुरू हो गई थी। यूं तो घरों में रंगाई पुताई और साफ सफाई पहले ही की जा चुकी थी। माता लक्ष्मी के आगमन की आकांक्षा लिए लोगों ने घर में स्थापित मंदिर को भक्ति भाव से सजाया। दरवाजों पर शुभ-लाभ आदि वंदनवार सजाए। गणेश और लक्ष्मी को विराजित किया।
विज्ञापन
शाम होते ही बच्चों में पर्व का उत्साह दिखने लगा। पटाखों की आवाजें आनी शुरू हो गईं। रात होते ही पूजा अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। भगवान श्री गणेश व लक्ष्मी जी का भोग लगाकर आरती उतारी गई। इसके बाद समूचे घर में मोमबत्ती और दीपक चलाकर हर कोने को रोशन किया गया। रंगबिरंगी झालरों की जगमगाती रोशनी ने इसमें चार चांद लगा दिए। बच्चों के साथ बड़ों ने भी जमकर आतिशबाजी का लुत्फ लिया। कई प्रकार आवाज करने वाले पटाखों, राकेट आदि आतिशबाजी से आसमान रह रहकर गुलजार होता रहा। देर रात पटाखों की गूंज रही।
विज्ञापन