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Etawah News: भरेह संगम में घड़ियाल के 40 नवजात छोड़े
Mon, 19 Jun 2023 12:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
Updated Mon, 19 Jun 2023 12:16 AM IST
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फोटो 08::::अड्डे में से निकलता घड़ियाल का बच्चा। संवाद
सेंचुरी विभाग ने चंबल की बालू में बने घोसलों से घड़ियालों के बच्चे निकालने किए शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। भरेह संगम में घड़ियालों के नवजात छोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। पहले फेज में सेंचुरी विभाग के अधिकारियों ने 40 बच्चे भरेह संगम छोड़ा है।
शनिवार को मदर कॉलिंग मिलते ही सेंचुरी रेंजर हरि किशोर शुक्ला ने अपनी टीम के साथ 15 घोंसलों से 40 बच्चों को निकालकर प्राकृतिक वास में छोड़ा है। चंबल नदी के बालू में बने 75 घोसलों में मदर कॉलिंग की निरंतर जांच की जा रही है। जहां से मदर कॉलिंग आ रही है, वहां उन अंडों से बच्चों को निकालकर नदी में छोड़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सभी बच्चे सुरक्षित हैं। बताया कि चंबल नदी में इस वक्त वयस्क घड़ियालों की संख्या चार हजार से ऊपर है। बोला कि 75 घोसलों में लगभग 250 अंडे संरक्षित किए गए थे। इनमें से दो सौ अधिक बच्चे सुरक्षित निकलने की उम्मीद है। पहले फेज में एक भी अंडे को नुकसान नहीं पहुंचा है।
इनसेट
मगरमच्छों के 24 बच्चे राते के पास पहुंचे
मगरमच्छ के घातक होने के कारण इनके अंडों को विभागीय अधिकारी पहुंच से बाहर रहने देते हैं। मगरमच्छ अपने अंडों को छूने नहीं देते है। वह स्वयं उनके पास बालू में छिपे रहते हैं। दूर से ही सेंचुरी विभाग गणना करते हैं। इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक मगरमच्छ के करीब 24 बच्चे बच्चे राते के पास में पहुंच चुके हैं। वन दरोगा विष्णु पाल सिंह चौहान ने बताया टीम निरंतर खोजबीन कर रही है। लोगों को भी इस समय मगरमच्छों से बचने की सलाह दी जा रही है।
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नदी किनारे जाने से बचें लोग
जिला फॉरेस्ट ऑफीसर दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल सेंचुरी का वातावरण संरक्षित जलीय जीवों के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है। इसका प्रमाण है कि किसी भी जलीय जीव का अंडा क्षतिग्रस्त नहीं हो रहा है। चंबल नदी में घड़ियाल व मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चंबल सेंचुरी विश्व में विलुप्त जलीय जीवों के संरक्षण में नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। क्षेत्रीय लोगों से अपील है कि वह नदी किनारे इस समय जाने से बचें। क्योंकि इस वक्त जलीय जीव बालू में अंडों से कॉलिंग सुनने के लिए अपने-अपने घोसलों के आसपास बालू में छुपकर बैठ जाते हैं। नदी किनारे जाना इस समय जान जोखिम में डालना है।
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सेंचुरी विभाग ने चंबल की बालू में बने घोसलों से घड़ियालों के बच्चे निकालने किए शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। भरेह संगम में घड़ियालों के नवजात छोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया है। पहले फेज में सेंचुरी विभाग के अधिकारियों ने 40 बच्चे भरेह संगम छोड़ा है।
शनिवार को मदर कॉलिंग मिलते ही सेंचुरी रेंजर हरि किशोर शुक्ला ने अपनी टीम के साथ 15 घोंसलों से 40 बच्चों को निकालकर प्राकृतिक वास में छोड़ा है। चंबल नदी के बालू में बने 75 घोसलों में मदर कॉलिंग की निरंतर जांच की जा रही है। जहां से मदर कॉलिंग आ रही है, वहां उन अंडों से बच्चों को निकालकर नदी में छोड़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सभी बच्चे सुरक्षित हैं। बताया कि चंबल नदी में इस वक्त वयस्क घड़ियालों की संख्या चार हजार से ऊपर है। बोला कि 75 घोसलों में लगभग 250 अंडे संरक्षित किए गए थे। इनमें से दो सौ अधिक बच्चे सुरक्षित निकलने की उम्मीद है। पहले फेज में एक भी अंडे को नुकसान नहीं पहुंचा है।
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मगरमच्छों के 24 बच्चे राते के पास पहुंचे
मगरमच्छ के घातक होने के कारण इनके अंडों को विभागीय अधिकारी पहुंच से बाहर रहने देते हैं। मगरमच्छ अपने अंडों को छूने नहीं देते है। वह स्वयं उनके पास बालू में छिपे रहते हैं। दूर से ही सेंचुरी विभाग गणना करते हैं। इस बार अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक मगरमच्छ के करीब 24 बच्चे बच्चे राते के पास में पहुंच चुके हैं। वन दरोगा विष्णु पाल सिंह चौहान ने बताया टीम निरंतर खोजबीन कर रही है। लोगों को भी इस समय मगरमच्छों से बचने की सलाह दी जा रही है।
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नदी किनारे जाने से बचें लोग
जिला फॉरेस्ट ऑफीसर दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि चंबल सेंचुरी का वातावरण संरक्षित जलीय जीवों के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रहा है। इसका प्रमाण है कि किसी भी जलीय जीव का अंडा क्षतिग्रस्त नहीं हो रहा है। चंबल नदी में घड़ियाल व मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है। चंबल सेंचुरी विश्व में विलुप्त जलीय जीवों के संरक्षण में नया कीर्तिमान स्थापित करेगी। क्षेत्रीय लोगों से अपील है कि वह नदी किनारे इस समय जाने से बचें। क्योंकि इस वक्त जलीय जीव बालू में अंडों से कॉलिंग सुनने के लिए अपने-अपने घोसलों के आसपास बालू में छुपकर बैठ जाते हैं। नदी किनारे जाना इस समय जान जोखिम में डालना है।