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Etah News: हाथी पर 8 बार धुरंधर महावत सवार, फिर भी नहीं मिली जीत

Wed, 10 Apr 2024 03:15 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा Updated Wed, 10 Apr 2024 03:15 AM IST
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The mighty mahout rode the elephant 8 times, still did not win
एटा। बहुजन समाज पार्टी ने एटा लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 1989 में प्रत्याशी पहली बार प्रत्याशी चुनाव में उतारा था। वर्ष 2014 तक बसपा धुरंधर महावतों को उतारती रही। इसके बाद एक बार भी बसपा जीत दर्ज नहीं कर सकी। 8 बार लोकसभा चुनावों में बसपा लड़ी, लेकिन पांच बार तीसरे स्थान पर रही। वर्ष 2009 में देवेंद्र सिंह यादव सपा से बगावत कर बैठे और बसपा का टिकट ले आए, फिर भी जीत हासिल करने में नाकाम रहे।
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बसपा ने प्रदेश की राजनीति में वजूद मजबूत करने के लिए पहली बार एटा लोकसभा क्षेत्र से 1989 में राधेश्याम को टिकट देकर चुनावी रण में उतारा था। इस चुनाव में बसपा चौथे नंबर पर नहीं थी। प्रत्याशी को महज 14854 मत मिले थे। इस चुनाव में महादीपक सिंह भाजपा से जीते थे। 1991 के चुनाव में बसपा ने एक बार फिर राधेश्याम पर भरोसा जताया। इस बार वोट तो 33721 पाने में कामयाब रहे लेकिन खिसक पर पांचवें स्थान पर चले गए थे। इन दोनों ही चुनावों में भारी शिकस्त मिली थी।
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1996 में लोकसभा सामान्य निर्वाचन हुआ, लेकिन इस बार राजनीति के पुरोधा कैलाश यादव मजबूत और धुरंधर महावत के रूप में हाथी पर सवार हुए। वह भी जीत दर्ज नहीं करा सके। उन्हें 91925 मत मिले और एक नंबर ऊपर आकर तीसरे स्थान पर बसपा को पहुंचाने का काम किया। वर्ष 1998 के चुनाव में बसपा ने प्रत्याशी बदलकर सेठ सुल्तान आलम को उतार दिया, इनकी मजबूत पकड़ वोटों का प्रतिशत और जनाधार बढ़ाने में कामयाब रही और 102048 मत हासिल कर लिए। इस बार भी बसपा को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में सपा के देवेंद्र सिंह यादव को संसद पहुंचाया। इसी तरह वर्ष 2004 के चुनाव में रामगोपाल शाक्य को मैदान में उतारा, जो तीसरे स्थान पर रहे और सपा के देवेंद्र सिंह यादव दूसरी बार संसद तक का समय तय करने में कामयाब रहे।
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वर्ष 2009 में सपा और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बीच समझौता हो गया। सपा ने समर्थन देकर कल्याण सिंह को चुनाव लड़ाया। देवेंद्र सिंह यादव बगावत कर बैठे, खफा देवेंद्र सिंह बसपा से टिकट लेकर हाथी पर सवार हो गए। यह ऐसा चुनाव था जब देवेंद्र सिंह अपने प्रतिद्वंद्वी कल्याण सिंह के खिलाफ मजबूती से लड़े और बसपा को दूसरे स्थान पर लेकर आए। इस चुनाव में 147449 वोट देवेंद्र सिंह को मिले थे, जब कि कल्याण सिंह 275717 वोट पाकर 128268 वोट से विजयी रहे थे। बसपा का इतिहास रहा है कि तमाम धुरंधरों को उतारने के बाद भी एटा लोकसभा क्षेत्र की जनता ने प्रत्याशी को हाथी पर सवार नहीं होने दिया और हर बार हार का सामना करना पड़ा। संवाद
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