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रास नहीं आई ‘उज्जवला’ गरीबों के घर अब भी चूल्हा
अमर उजाला ब्यूरो, एटा
Updated Fri, 22 Jul 2016 11:23 PM IST
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उज्जवला योजना
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी उज्जवला योजना गरीबों को रास नहीं आ रही है। उन परिवारों में भी चूल्हे पर ही खाना पक रहा है। जिन्हें योजना के तहत मुफ्त में गैस सिलेंडर, चूल्हा मिला था। गांवों में रसोई गैस की आपूर्ति नहीं होने से कई गरीब परिवारों ने सिलेंडर, चूल्हा बेच डाला है।
प्रधानमंत्री ने बीपीएल परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने के लिए एक मई को उज्जवला योजना की शुरुआत की थी। पर, गैस कंपनियों की मनमानी से इस योजना को पलीता लग रहा है। गांवों में सिलेंडर की आपूर्ति नहीं होने से गरीब सिलेंडर, चूल्हा बेचने लगे हैं। गांव खड़ौआ की ऊषा देवी ने बताया कि उसे योजना के तहत रसोई गैस सिलेंडर, चूल्हा मिला था। पर, गांव में सिलेंडर मिलता नहीं है। शहर जाकर भरवाने में परेशानी है। ब्लैक में हर महीने खरीद पाना संभव नहीं है। ऐसे में उसने अपने एक रिश्तेदार को सिलेंडर बेच दिया। गांव कुठिला की भगवानदेवी भी चूल्हे पर ही खाना पकाती है। उसने भी अपना सिलेंडर, चूल्हा एक परिचित को बेच दिया। बता दें कि अब तक जिले में 500 से ज्यादा परिवारों को उज्जवला योजना का लाभ मिल चुका है। लेकिन गैस कंपनियों की मनमानी से योजना धड़ाम होती दिखने लगी है।
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उज्जवला योजना का लाभ पाने वाले कुछ लाभार्थी तो सिलेंडर को घर लाकर रख दिए हैं। खाना मिट्टी के चूल्हे में पकाया जाता है। लाभार्थियों का कहना है कि गैस खत्म होने पर सिलेंडर बदलाने को भटकना पड़ता है। इससे कभी-कभी सिर्फ चाय आदि बना ली जाती है।
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चूल्हे पर खाना बनाने से महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बढ़ रही है। जिला अस्पताल में देखें तो आए दिन महिलाएं सांस संबंधी बीमारियों के इलाज को आती रहती हैं।
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योजना के तहत लाभार्थी को गैस कनेक्शन का प्रयोग करना अनिवार्य है। अगर, सिलेंडर बेचा जा रहा है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
संजीव कुमार, एसडीएम सदर
उज्जवला योजना को लेकर ऐसे मामलों की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो दिखवाकर कार्रवाई करवाता हूं।
गुलाब सिंह यादव, जिला पूर्ति अधिकारी एटा
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प्रधानमंत्री ने बीपीएल परिवारों को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने के लिए एक मई को उज्जवला योजना की शुरुआत की थी। पर, गैस कंपनियों की मनमानी से इस योजना को पलीता लग रहा है। गांवों में सिलेंडर की आपूर्ति नहीं होने से गरीब सिलेंडर, चूल्हा बेचने लगे हैं। गांव खड़ौआ की ऊषा देवी ने बताया कि उसे योजना के तहत रसोई गैस सिलेंडर, चूल्हा मिला था। पर, गांव में सिलेंडर मिलता नहीं है। शहर जाकर भरवाने में परेशानी है। ब्लैक में हर महीने खरीद पाना संभव नहीं है। ऐसे में उसने अपने एक रिश्तेदार को सिलेंडर बेच दिया। गांव कुठिला की भगवानदेवी भी चूल्हे पर ही खाना पकाती है। उसने भी अपना सिलेंडर, चूल्हा एक परिचित को बेच दिया। बता दें कि अब तक जिले में 500 से ज्यादा परिवारों को उज्जवला योजना का लाभ मिल चुका है। लेकिन गैस कंपनियों की मनमानी से योजना धड़ाम होती दिखने लगी है।
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उज्जवला योजना का लाभ पाने वाले कुछ लाभार्थी तो सिलेंडर को घर लाकर रख दिए हैं। खाना मिट्टी के चूल्हे में पकाया जाता है। लाभार्थियों का कहना है कि गैस खत्म होने पर सिलेंडर बदलाने को भटकना पड़ता है। इससे कभी-कभी सिर्फ चाय आदि बना ली जाती है।
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चूल्हे पर खाना बनाने से महिलाओं में स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें बढ़ रही है। जिला अस्पताल में देखें तो आए दिन महिलाएं सांस संबंधी बीमारियों के इलाज को आती रहती हैं।
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योजना के तहत लाभार्थी को गैस कनेक्शन का प्रयोग करना अनिवार्य है। अगर, सिलेंडर बेचा जा रहा है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
संजीव कुमार, एसडीएम सदर
उज्जवला योजना को लेकर ऐसे मामलों की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो दिखवाकर कार्रवाई करवाता हूं।
गुलाब सिंह यादव, जिला पूर्ति अधिकारी एटा