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Etah News: एक घंटे तक एमसीएच विंग के बाहर कराहती रही गर्भवती
Mon, 03 Jul 2023 12:22 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
संवाद न्यूज एजेंसी, एटा
Updated Mon, 03 Jul 2023 12:22 AM IST
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एटा। मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं सुधर नहीं पा रहीं है। यहां प्रसव के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को रविवार को चिकित्सक नहीं मिल पाते। कर्मचारी भी उन्हें बाहर जाने की सलाह दे देते हैं। रविवार को गांव चुरैथा निवासी गर्भवती नील करीब एक घंटे तक एमसीएच विंग के बाहर फर्श पर कराहती रही। बाद में परिजन उसे लेकर प्राइवेट नर्सिंग होम चले गए।
स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव कराने पर भी जोर है। इसके लिए जननी सुरक्षा योजना सहित प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना भी संचालित है। वहीं मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था इसके उलट हैं। यहां शनिवार से ही प्रसव के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं के परिजन को चिकित्सक न होने की बात व संसाधनों का अभाव बताना शुरू कर दिया जाता है। इससे गर्भवती के परिजन उसे नर्सिंग होम में प्रसव के लिए ले जाने को मजबूर होते हैं।
शनिवार को एक गर्भवती प्रसव के लिए पहुंची तो उसके परिजन को चिकित्सक न होने की बात कही गई। ऐसी ही स्थिति रविवार को रही। एक गर्भवती पहुंची तो उसे भी इन्कार कर दिया गया। परिजन ने बताया यहां ऐसा ही किया जा रहा है। नर्सिंग होम सहित आगरा या अलीगढ़ ले जाने की सलाह दे दी जाती है। यहां संसाधन न होने की बात कह दी जाती है।
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केस एक
गांव बारथर निवासी ब्रजेश ने बताया कि शनिवार को वह अपनी पुत्रवधू सीमा को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। चिकित्सक ने देखा और कई दिक्कतें बताकर कहा अभी चार से पांच घंटे हैं, आगरा ले जाओ। रविवार को यहां चिकित्सक नहीं रहते हैं, कौन देखेगा? ब्रजेश ने बताया उन्होंने यहीं नार्मल डिलीवरी कराने की बात कही। काफी देर बाद चिकित्सक माने और कुछ समय बाद नार्मल डिलीवरी हो भी गई।
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केस दो
गांव चुरैथा निवासी रामबरन ने बताया उनकी पत्नी नीलम को प्रसव पीड़ा हुई। आशाा कार्यकर्ता व अन्य परिजन के साथ वह रविवार सुबह करीब 11 बजे लेकर कॉलेज पहुंचे। चिकित्सक ने देखा और कहा साढ़े आठ माह का समय हुआ है। प्रसव के लिए ऑपेरशन करना पड़ेगा। चिकित्सक हैं नहीं, तुम आगरा या अलीगढ़ ले जाओ। यहां नवजात के लिए भी सुविधा नहीं है, दिक्कत हो जाएगी। इसके बाद परिजन उसे लेकर नर्सिंग होम चले गए।
कुछ बाहर के लोग आकर विंग में मरीजों और तीमारदारों को बरगलाने का कार्य करते हैं। डॉक्टर से मिलना चाहिए, स्टॉफ नर्स आदि से बात नहीं करनी चाहिए। - डॉ. विवेक पाराशर, मीडिया प्रभारी मेडिकल कॉलेज
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स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष जोर दिया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव कराने पर भी जोर है। इसके लिए जननी सुरक्षा योजना सहित प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना भी संचालित है। वहीं मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था इसके उलट हैं। यहां शनिवार से ही प्रसव के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं के परिजन को चिकित्सक न होने की बात व संसाधनों का अभाव बताना शुरू कर दिया जाता है। इससे गर्भवती के परिजन उसे नर्सिंग होम में प्रसव के लिए ले जाने को मजबूर होते हैं।
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शनिवार को एक गर्भवती प्रसव के लिए पहुंची तो उसके परिजन को चिकित्सक न होने की बात कही गई। ऐसी ही स्थिति रविवार को रही। एक गर्भवती पहुंची तो उसे भी इन्कार कर दिया गया। परिजन ने बताया यहां ऐसा ही किया जा रहा है। नर्सिंग होम सहित आगरा या अलीगढ़ ले जाने की सलाह दे दी जाती है। यहां संसाधन न होने की बात कह दी जाती है।
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केस एक
गांव बारथर निवासी ब्रजेश ने बताया कि शनिवार को वह अपनी पुत्रवधू सीमा को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। चिकित्सक ने देखा और कई दिक्कतें बताकर कहा अभी चार से पांच घंटे हैं, आगरा ले जाओ। रविवार को यहां चिकित्सक नहीं रहते हैं, कौन देखेगा? ब्रजेश ने बताया उन्होंने यहीं नार्मल डिलीवरी कराने की बात कही। काफी देर बाद चिकित्सक माने और कुछ समय बाद नार्मल डिलीवरी हो भी गई।
केस दो
गांव चुरैथा निवासी रामबरन ने बताया उनकी पत्नी नीलम को प्रसव पीड़ा हुई। आशाा कार्यकर्ता व अन्य परिजन के साथ वह रविवार सुबह करीब 11 बजे लेकर कॉलेज पहुंचे। चिकित्सक ने देखा और कहा साढ़े आठ माह का समय हुआ है। प्रसव के लिए ऑपेरशन करना पड़ेगा। चिकित्सक हैं नहीं, तुम आगरा या अलीगढ़ ले जाओ। यहां नवजात के लिए भी सुविधा नहीं है, दिक्कत हो जाएगी। इसके बाद परिजन उसे लेकर नर्सिंग होम चले गए।
कुछ बाहर के लोग आकर विंग में मरीजों और तीमारदारों को बरगलाने का कार्य करते हैं। डॉक्टर से मिलना चाहिए, स्टॉफ नर्स आदि से बात नहीं करनी चाहिए। - डॉ. विवेक पाराशर, मीडिया प्रभारी मेडिकल कॉलेज