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अलविदा जुमे की नमाज में मुल्क मेें अमन-चैन की मांगी दुआ
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पोता नगला स्थित मस्जिद पर नमाज पड़ते नमाजी ।संवाद
- फोटो : ETAH
एटा। माह-ए-रमजान के अलविदा जुमे (आखिरी) की नमाज शांति पूर्ण तरीके से मस्जिदों में अदा की गई। रोजेदारों ने मस्जिद में अमन-चैन की दुआ के लिए नमाज अदा की। इस दौरान मस्जिदों के बाहर पुलिस बल तैनात रहा।
रमजान माह के अंतिम शुक्रवार को अलविदा जुमे की नमाज अदा की गई। घरों में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक कोरोना काल के बाद पहली बार मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए उत्साहित थे। नमाज पढ़ने के लिए ज्यादातर लोगों ने नए कपड़े खरीदे व सिलवाए थे, जिन्हें पहनकर मस्जिद में पहुंचे। मस्जिदों के बाहर पुलिस बल की कड़ी निगरानी रही। सुबह के वक्त सहरी के साथ ही लोगों ने धार्मिक क्रियाकलाप करना शुरू कर दिया। पांचों वक्त की नमाज लोगों ने कोरोना काल के बाद पहली बार एकत्र होकर मस्जिद में अदा की। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिद में एक दूसरे को गले मिलकर बधाईयां दीं।
बच्चों ने भी रखा रोजा
शहर में बच्चों में भी रोजा रखने का उत्साह देखा गया। छोटे-छोटे बच्चों ने रोजा रखकर अलविदा जुमे की नमाज अदा की। ठंडी सड़क निवासी आठ साल की अनबिया खान ने पहली बार रोजा रखा। पहला रोजा पूरा होने पर रिश्तेदारों ने मुबारकबाद दी। बताया कि घरवालों के साथ सुबह सहरी की, नमाज पढ़ी। शाम को फिर घरवालों के साथ इफ्तार के दस्तरखान पर खजूर व पकवान खाकर पहला रोजा मुकम्मल किया।
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रमजान माह के अंतिम शुक्रवार को अलविदा जुमे की नमाज अदा की गई। घरों में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक कोरोना काल के बाद पहली बार मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए उत्साहित थे। नमाज पढ़ने के लिए ज्यादातर लोगों ने नए कपड़े खरीदे व सिलवाए थे, जिन्हें पहनकर मस्जिद में पहुंचे। मस्जिदों के बाहर पुलिस बल की कड़ी निगरानी रही। सुबह के वक्त सहरी के साथ ही लोगों ने धार्मिक क्रियाकलाप करना शुरू कर दिया। पांचों वक्त की नमाज लोगों ने कोरोना काल के बाद पहली बार एकत्र होकर मस्जिद में अदा की। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मस्जिद में एक दूसरे को गले मिलकर बधाईयां दीं।
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बच्चों ने भी रखा रोजा
शहर में बच्चों में भी रोजा रखने का उत्साह देखा गया। छोटे-छोटे बच्चों ने रोजा रखकर अलविदा जुमे की नमाज अदा की। ठंडी सड़क निवासी आठ साल की अनबिया खान ने पहली बार रोजा रखा। पहला रोजा पूरा होने पर रिश्तेदारों ने मुबारकबाद दी। बताया कि घरवालों के साथ सुबह सहरी की, नमाज पढ़ी। शाम को फिर घरवालों के साथ इफ्तार के दस्तरखान पर खजूर व पकवान खाकर पहला रोजा मुकम्मल किया।
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