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अंतरराष्ट्रीय नर्सेज डेः अस्पतालों में बहनें अपनी जान जोखिम में डाल, दूसरों की कर रहीं सेवा
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एटा। कोरोना महामारी काल का रूप लेकर लोगों पर कहर बरपा रही है। इस दौर में हमारे रक्षा कवच के रूप में कोरोना योद्धा जुटे हुए हैं। नर्स अपनी और परिवार की चिंता छोड़ मरीजों की जान बचाने में लगी हैं। डॉक्टर के साथ-साथ पैरामेडिकल स्टाफ की भी अहम भूमिका है। इन्होंने खुद को कोरोना की जंग में झोंक रखा है लेकिन परिवार वालों से दूरी बना ली है। नर्सों का कहना है कि इस समय उनकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। कइयों को ड्यूटी करने के बाद क्वारंटीन रहना पड़ रहा है। किसी ने घर पर ही कमरा अलग कर लिया है तो कोई बीमार बच्चे तक की देखभाल नहीं कर पा रही।
फर्ज के आगे भूलीं मां की भूमिका
महिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स मीरा कुमारी ने बताया जब से कोविड संक्रमण बढ़ा है। तभी से लगातार उनकी ड्यूटी अस्पताल में लग रही है। कई साथी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं, इससे थोड़ा डर लगता है। घर में खुद को बच्चों से अलग कर रखा है। एक ही कमरे में रहना होता है। पहले फर्ज है, इसके बाद मां की ममता।
अभी कोरोना से लड़ लें, परिवार बाद में संभाल लेंगे
जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स ईविलन मैसी ने बताया कि जबसे कोरोना शुरु हुआ, जिम्मेदारी और बढ़ गई है। दिन हो या रात मरीज को देखना पहला फर्ज है। कभी-कभी कई पॉजिटिव मरीज आ जाते हैं, उनका भी इलाज करना होता है। मन में संक्रमित होने का डर तो बना रहता है, लेकिन घर जाने के बाद पहले स्नान, इसके बाद कुछ और करते हैं। अभी नाजुक दौर है, कोरोना को मात दे दें फिर परिवार को संभाल लेंगे।
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कासगंज जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स प्रमिला कोरोना संक्रमण के इस दौर में बुखार से पीड़ित हुईं, लेकिन दवा लेने के बाद उन्होंने अपनी सेहत को दुरुस्त रखा और गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए बेहद गंभीरता दिखाई। वे कहती हैं परिवार भी जरूरी है और सरकारी फर्ज भी। दोनों ही निभाने हैं।
फर्रुखाबाद जिले की रहने वाली स्टाफ नर्स अंजली कोरोना अस्पताल में तैनात हैं। वे पिछले साल से ही कोरोना टीम में शामिल हैं। पिछले साल उनके रिश्तेदार की मौत हो गई, लेकिन सरकारी फर्ज ने उन्हें डिगने नहीं दिया। वे अपने रिशतेदार के अंतिम दर्शन करने नहीं गई।
स्टाफ नर्स वंदना शहर की ही रहने वाली हैं। इस समय वे टीकाकरण की टीम में शामिल हैं। कोरोना के खतरे के बाद भी वे अपने इस कार्य को बखूवी अंजाम दे रही है। बिना किसी डर के वे लोगों को टीका लगाती है। वे कहती हैं नर्स को काम सेवा करना है।
स्टाफ नर्स बेेेबी को विभाग ने जांच टीम में जिम्मेदारी सौंप रखी है। कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक है, लेकिन यह खतरा भी उनको अपने सेवा पथ से विचलित नहीं कर पाता। वे लोगों की कोरोना की जांच बिना किसी डर के करती हैं।
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फर्ज के आगे भूलीं मां की भूमिका
महिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स मीरा कुमारी ने बताया जब से कोविड संक्रमण बढ़ा है। तभी से लगातार उनकी ड्यूटी अस्पताल में लग रही है। कई साथी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं, इससे थोड़ा डर लगता है। घर में खुद को बच्चों से अलग कर रखा है। एक ही कमरे में रहना होता है। पहले फर्ज है, इसके बाद मां की ममता।
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अभी कोरोना से लड़ लें, परिवार बाद में संभाल लेंगे
जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स ईविलन मैसी ने बताया कि जबसे कोरोना शुरु हुआ, जिम्मेदारी और बढ़ गई है। दिन हो या रात मरीज को देखना पहला फर्ज है। कभी-कभी कई पॉजिटिव मरीज आ जाते हैं, उनका भी इलाज करना होता है। मन में संक्रमित होने का डर तो बना रहता है, लेकिन घर जाने के बाद पहले स्नान, इसके बाद कुछ और करते हैं। अभी नाजुक दौर है, कोरोना को मात दे दें फिर परिवार को संभाल लेंगे।
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कासगंज जिला अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स प्रमिला कोरोना संक्रमण के इस दौर में बुखार से पीड़ित हुईं, लेकिन दवा लेने के बाद उन्होंने अपनी सेहत को दुरुस्त रखा और गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए बेहद गंभीरता दिखाई। वे कहती हैं परिवार भी जरूरी है और सरकारी फर्ज भी। दोनों ही निभाने हैं।
फर्रुखाबाद जिले की रहने वाली स्टाफ नर्स अंजली कोरोना अस्पताल में तैनात हैं। वे पिछले साल से ही कोरोना टीम में शामिल हैं। पिछले साल उनके रिश्तेदार की मौत हो गई, लेकिन सरकारी फर्ज ने उन्हें डिगने नहीं दिया। वे अपने रिशतेदार के अंतिम दर्शन करने नहीं गई।
स्टाफ नर्स वंदना शहर की ही रहने वाली हैं। इस समय वे टीकाकरण की टीम में शामिल हैं। कोरोना के खतरे के बाद भी वे अपने इस कार्य को बखूवी अंजाम दे रही है। बिना किसी डर के वे लोगों को टीका लगाती है। वे कहती हैं नर्स को काम सेवा करना है।
स्टाफ नर्स बेेेबी को विभाग ने जांच टीम में जिम्मेदारी सौंप रखी है। कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक है, लेकिन यह खतरा भी उनको अपने सेवा पथ से विचलित नहीं कर पाता। वे लोगों की कोरोना की जांच बिना किसी डर के करती हैं।