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मारहरा में डेंगू से दो महिलाओं की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 01 Oct 2016 12:47 AM IST
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डेंगू का प्रकोप
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को कस्बा के मोहल्ला बस्ती में डेंगू के चलते दो महिलाओं की मौत हो गई। इससे कस्बे में दहशत फैल गई। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपचार न मिलने के चलते लोगों में रोष नजर आया। लोगों ने कस्बा के सीएचसी प्रभारी की लापरवाही पर आक्रोश जताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मोहल्ला बस्ती निवासी साबिर अली की पत्नी नाजिरा बेगम (35) और सलीम की पत्नी समा (23) को पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। परिवारीजन पहले तो दोनों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे, लेकिन वहां न तो डाक्टर मिले और न दवाएं। हालत बिगड़ने पर महिलाओं को लेकर कासगंज में एक निजी चिकित्सक के यहां पहुंचे, जहां जांच के बाद महिलाओं को डेंगू की पुष्टि हुई। इलाज के बाद भी हालत में सुधार न होने पर शुक्रवार को महिलाओं ने दम तोड़ दिया। महिलाओं की मौत के बाद भी सीएचसी प्रभारी केंद्र पर नहीं पहुंचे। कस्बा के वाशिंदों ने सीएचसी प्रभारी की लापरवाही पर रोष प्रकट करते हुए तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है। मांग करने वालों में मोहम्मद आमिल, अजय यादव, विशेष यादव, अशोक सक्सेना, दिनेश गुप्ता, राजकुमार, पुष्पेन्द्र कुमार, रामप्रकाश आदि प्रमुख हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग महिलाओं की मौत को डेंगू से मानने को तैयार नहीं है।
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फार्मासिस्ट करते है उपचार
मारहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर यहां डाक्टरों की तैनाती नहीं होने से फार्मासिस्ट मरीजों का इलाज करते हैं। लोगों का कहना है कि सीएचसी प्रभारी पीके मिश्रा अक्सर केंद्र से गायब रहते हैं। इसके चलते लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता। शुक्रवार को दो महिलाओं की मौत के बाद भी सीएचसी प्रभारी केंद्र पर नहीं पहुंचे। जिले में डेंगू से तीन मौतें होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अब तक नहीं चेता है। जिला अस्पताल में आए दिन मलेरिया और डेंगू के मामले पहुंच रहे हैं, फिर भी विभाग आंखें बंद किए है।
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मारहरा में दो महिलाओं की मौत के बाद भी सीएचसी प्रभारी नहीं पहुंचे। यह एक गंभीर लापरवाही है जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच कराकर कार्रवाई होगी।
- शंभूनाथ, डीएम, एटा
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मोहल्ला बस्ती निवासी साबिर अली की पत्नी नाजिरा बेगम (35) और सलीम की पत्नी समा (23) को पिछले एक सप्ताह से बुखार आ रहा था। परिवारीजन पहले तो दोनों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे, लेकिन वहां न तो डाक्टर मिले और न दवाएं। हालत बिगड़ने पर महिलाओं को लेकर कासगंज में एक निजी चिकित्सक के यहां पहुंचे, जहां जांच के बाद महिलाओं को डेंगू की पुष्टि हुई। इलाज के बाद भी हालत में सुधार न होने पर शुक्रवार को महिलाओं ने दम तोड़ दिया। महिलाओं की मौत के बाद भी सीएचसी प्रभारी केंद्र पर नहीं पहुंचे। कस्बा के वाशिंदों ने सीएचसी प्रभारी की लापरवाही पर रोष प्रकट करते हुए तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग की है। मांग करने वालों में मोहम्मद आमिल, अजय यादव, विशेष यादव, अशोक सक्सेना, दिनेश गुप्ता, राजकुमार, पुष्पेन्द्र कुमार, रामप्रकाश आदि प्रमुख हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग महिलाओं की मौत को डेंगू से मानने को तैयार नहीं है।
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फार्मासिस्ट करते है उपचार
मारहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर यहां डाक्टरों की तैनाती नहीं होने से फार्मासिस्ट मरीजों का इलाज करते हैं। लोगों का कहना है कि सीएचसी प्रभारी पीके मिश्रा अक्सर केंद्र से गायब रहते हैं। इसके चलते लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल पाता। शुक्रवार को दो महिलाओं की मौत के बाद भी सीएचसी प्रभारी केंद्र पर नहीं पहुंचे। जिले में डेंगू से तीन मौतें होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अब तक नहीं चेता है। जिला अस्पताल में आए दिन मलेरिया और डेंगू के मामले पहुंच रहे हैं, फिर भी विभाग आंखें बंद किए है।
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मारहरा में दो महिलाओं की मौत के बाद भी सीएचसी प्रभारी नहीं पहुंचे। यह एक गंभीर लापरवाही है जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच कराकर कार्रवाई होगी।
- शंभूनाथ, डीएम, एटा