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Etah News: रसूलपुर गढ़ाैली के मरीजों से भरा अस्पताल
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कासगंज रोड स्थित निजी अस्पताल में एक ही बेड पर उपचार के लिए लेटे मरीज। संवाद
एटा। रसूलपुर गढ़ौली में बुखार, डेंगू ने पांव पसार लिए हैं। गांव में 100 से अधिक लोग बीमार हैं। वहीं 150 से अधिक एटा, आगरा, अलीगढ़ और कासगंज के प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती हैं। एटा के कासगंज रोड स्थित मिष्टी अस्पताल भी मरीजों से भरा पड़ा है। यहां वार्ड से लेकर केबिन तक बेड पड़े हुए हैं। एक बेड पर दो से अधिक मरीजों को लिटाकर इलाज किया रहा है। ऐसा लग रहा है मानो पूरा अस्पताल रसूलपुर गढ़ाैली के लिए आरक्षित कर दिया है।
अस्पताल में 90 से अधिक मरीजों का उपचार चल रहा है। यहां अन्य गांव का कोई भी नहीं है। हालात ऐसे हैं कि केबिन तक खाली नहीं बचे हैं। कोई अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचा है तो कोई बच्चों की तीमारदारी में जुटा है। हर तरफ मरीजों और परिजनों की चिंता साफ दिखाई दे रही है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गांव में बीमारी फैलने के बाद से अब तक डेंगू से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिविर लगाकर लोगों की जांच की जा रही है लेकिन जांच रिपोर्ट में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि नहीं हो रही। दूसरी ओर निजी पैथोलॉजी लैब की जांच में कुछ मरीजों में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग का उपचार न लेकर बेहतर उपचार के लिए एटा शहर के निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
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कासगंज रोड स्थित मिष्टी अस्पताल में अब तक रसूलपुर गढ़ौली के करीब 130 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 40 की हालत में सुधार होने पर छुट्टी दे दी गई है। जबकि शेष का उपचार जारी है। वर्तमान में 90 से अधिक अस्पताल में भर्ती हैं। संख्या अधिक होने के कारण प्रथम तल के सभी वार्ड गांव के मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं।
एक ही केबिन में चार परिवार के लोग हैं भर्ती
अस्पताल के प्रथम तल पर बने केबिन में अलग-अलग परिवारों के बुखार से पीड़ित और डेंगू के संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया गया है। गांव निवासी सुशील की पत्नी रेखा (30) और तीन बेटियां शालिनी (16), शालू (14) और लता (10) डेंगू संदिग्ध पाई गई हैं। इसी तरह गिरीश चंद्र की पत्नी संगीता (30), बेटा हेमंत (12), बेटी दीक्षा (10) और बेटा लवकुश (8) भी डेंगू के संदिग्ध मरीज हैं। वहीं, रिंकू की पत्नी शांता (30), सात वर्षीय बेटा उत्तम और चार वर्षीय बेटी लक्ष्मी उपचार करा रहे हैं। भगवान सिंह (40) और 18 वर्षीय बेटे रिशु वर्मा का भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
ये 20 लोग मिले डेंगू संदिग्ध
गांव के जिन 20 लोगों को डेंगू संदिग्ध बताया गया है, उनमें आशा (32), रंजना (23), श्वेता (21), सिया देवी (32), जिज्ञास (5), पूजा (4), पवन (18), कोमल (26), नंदिनी (6), प्रकाशवती (60), नेम सिंह (60), कामिनी (14), निशा (23), विनीता (27), डौली (25), ओमवती (51), हिमांशु (4), गुड्डो देवी (60), ब्रजरानी (45) और रेखा (55) शामिल हैं।
रसूलपुर गढ़ौली में बीमार लोगों को उपचार देने के लिए शिविर लगाया जा रहा है। वहीं निजी अस्पतालों में भी लोग अपना उपचार करा रहे हैं। शहर के मिष्टी अस्पताल में गांव के ही 90 मरीज भर्ती मिले जिसमें कुछ संदिग्ध डेंगू के भी थे। खास बात यह है कि पूरे अस्पताल में गांव के नाम से वार्ड आरक्षित किया गया है। - डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ
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रसूलपुर गढ़ौली के करीब 130 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। इनमें से 40 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। भर्ती मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। - डॉ. ओमकार, मिष्टी अस्पताल
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अस्पताल में 90 से अधिक मरीजों का उपचार चल रहा है। यहां अन्य गांव का कोई भी नहीं है। हालात ऐसे हैं कि केबिन तक खाली नहीं बचे हैं। कोई अपनी पत्नी को लेकर अस्पताल पहुंचा है तो कोई बच्चों की तीमारदारी में जुटा है। हर तरफ मरीजों और परिजनों की चिंता साफ दिखाई दे रही है।
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स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गांव में बीमारी फैलने के बाद से अब तक डेंगू से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से शिविर लगाकर लोगों की जांच की जा रही है लेकिन जांच रिपोर्ट में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि नहीं हो रही। दूसरी ओर निजी पैथोलॉजी लैब की जांच में कुछ मरीजों में डेंगू और मलेरिया की पुष्टि होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग का उपचार न लेकर बेहतर उपचार के लिए एटा शहर के निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं।
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कासगंज रोड स्थित मिष्टी अस्पताल में अब तक रसूलपुर गढ़ौली के करीब 130 मरीज भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 40 की हालत में सुधार होने पर छुट्टी दे दी गई है। जबकि शेष का उपचार जारी है। वर्तमान में 90 से अधिक अस्पताल में भर्ती हैं। संख्या अधिक होने के कारण प्रथम तल के सभी वार्ड गांव के मरीजों के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं।
एक ही केबिन में चार परिवार के लोग हैं भर्ती
अस्पताल के प्रथम तल पर बने केबिन में अलग-अलग परिवारों के बुखार से पीड़ित और डेंगू के संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया गया है। गांव निवासी सुशील की पत्नी रेखा (30) और तीन बेटियां शालिनी (16), शालू (14) और लता (10) डेंगू संदिग्ध पाई गई हैं। इसी तरह गिरीश चंद्र की पत्नी संगीता (30), बेटा हेमंत (12), बेटी दीक्षा (10) और बेटा लवकुश (8) भी डेंगू के संदिग्ध मरीज हैं। वहीं, रिंकू की पत्नी शांता (30), सात वर्षीय बेटा उत्तम और चार वर्षीय बेटी लक्ष्मी उपचार करा रहे हैं। भगवान सिंह (40) और 18 वर्षीय बेटे रिशु वर्मा का भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
ये 20 लोग मिले डेंगू संदिग्ध
गांव के जिन 20 लोगों को डेंगू संदिग्ध बताया गया है, उनमें आशा (32), रंजना (23), श्वेता (21), सिया देवी (32), जिज्ञास (5), पूजा (4), पवन (18), कोमल (26), नंदिनी (6), प्रकाशवती (60), नेम सिंह (60), कामिनी (14), निशा (23), विनीता (27), डौली (25), ओमवती (51), हिमांशु (4), गुड्डो देवी (60), ब्रजरानी (45) और रेखा (55) शामिल हैं।
रसूलपुर गढ़ौली में बीमार लोगों को उपचार देने के लिए शिविर लगाया जा रहा है। वहीं निजी अस्पतालों में भी लोग अपना उपचार करा रहे हैं। शहर के मिष्टी अस्पताल में गांव के ही 90 मरीज भर्ती मिले जिसमें कुछ संदिग्ध डेंगू के भी थे। खास बात यह है कि पूरे अस्पताल में गांव के नाम से वार्ड आरक्षित किया गया है। - डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सीएमओ
रसूलपुर गढ़ौली के करीब 130 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। इनमें से 40 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। भर्ती मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। - डॉ. ओमकार, मिष्टी अस्पताल