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Etah News: नवरात्र से पहले ही घुंघरू-घंटा उद्योग पर बरसी मां की कृपा

Mon, 05 Oct 2026 11:38 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 05 Oct 2026 11:38 PM IST
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Goddess's blessings showered upon the *ghungroo* and bell industry even before Navratri.
जलेसर में घंटे की सफाई करता कारीगर। संवाद
जलेसर। आगामी शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा महोत्सव को लेकर देशभर के मंदिरों और बाजारों में तैयारियां परवान चढ़ रही हैं। इस पावन पर्व का उत्साह शुरू होने से पहले ही पीतल शिल्प व घंटी-घुंघरू के लिए ख्याति प्राप्त जलेसर की देवी मां की कृपा बरसने लगी है। मंदिरों के भव्य पीतल घंटे, पूजा की घंटियाें के बड़े-बड़े ऑर्डर स्थानीय कारोबारियों और दस्तकारों को मिल चुके हैं। स्थानीय व्यापार मंडल के अनुसार, अकेले पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों से लाखों रुपये से अधिक के अग्रिम ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।
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जलेसर के घंटा-घुंघरू कारोबारियों के अनुसार नवरात्र के मद्देनजर करीब डेढ़ महीने पहले से ही बाहरी राज्यों के लिए माल की निकासी शुरू कर दी गई थी। पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा के दुर्गा पूजा पंडालों व मंदिरों के लिए विशेष नक्काशीदार पीतल के घंटों और पूजा घंटियों के बड़े ऑर्डर रवाना किए जा चुके हैं। अब उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश के नजदीकी बाजारों की आपूर्ति के लिए उत्पादन युद्धस्तर पर जारी है। जलेसर के कारीगरों की विशेषता यह है कि वे 50 ग्राम की छोटी पूजा घंटी से लेकर कई क्विंटल वजनी मंदिर घंटों की सटीक ढलाई करते हैं।
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घंटों की विशेषता
गरुड़ घंटी और नंदी घंटी की कीमत 150 रुपये से लेकर 700 रुपये तक है। पांच किलो से लेकर 101 किलो और 251 किलो तक के घंटे देवी मंदिरों के लिए ऑर्डर पर तैयार किए जा रहे हैं। इनकी झंकार की गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में भारी मांग रहती है। पीतल और मिश्रित धातुओं से बने विशेष घंटियां, जिनकी खनक और टिकाऊपन के कारण ग्राहकों की यह पहली पसंद बने हुए हैं।
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जीआई टैग और ओडीओपी से लगे पंख
जलेसर धातु शिल्प को मिले जीआई टैग और प्रदेश सरकार की एक जिला, एक उत्पाद योजना के चलते उद्योगों का पंख लगे हैं। कस्बे और आसपास के 200 से अधिक कारखानों व ढलाई भट्टियों में अतिरिक्त कारीगर लगाकर चौबीसों घंटे काम कराया जा रहा है। कच्चा माल की मांग बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय कारीगरों को भी भरपूर रोजगार मिल रहा है।

नवरात्र और दीपोत्सव के लिए अगस्त माह से ही ऑर्डर मिलने शुरू हो गए थे। इस बार पश्चिमी और दक्षिण भारत से पहले की अपेक्षा 30 फीसदी अधिक मांग देखने को मिली है। - अचल मित्तल, कारोबारी
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नवरात्र और त्योहार को देखते हुए अच्छे ऑर्डर मिले हैं। भट्ठी रात-दिन चलानी पड़ रही है। हालांकि पीतल की महंगाई के कारण थोड़ी परेशानी जरूर हो रही है। - राहत खान, भट्ठी संचालक

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ओडीओपी और जीआई टैग मिलने के बाद से बाहरी राज्यों के व्यापारियों का भरोसा और मजबूत हुआ है। पश्चिम बंगाल, दक्षिण भारत के अलावा दिल्ली, आगरा, मथुरा के लिए मांग के अनुसार आपूर्ति जारी है। - गौरव शर्मा, सदस्य, जलेसर घुंघरू उद्योग मंडल

जलेसर में घंटे की सफाई करता कारीगर। संवाद

जलेसर में घंटे की सफाई करता कारीगर। संवाद

जलेसर में घंटे की सफाई करता कारीगर। संवाद

जलेसर में घंटे की सफाई करता कारीगर। संवाद

जलेसर में घंटे की सफाई करता कारीगर। संवाद

जलेसर में घंटे की सफाई करता कारीगर। संवाद

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