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Etah News: जिले में पहली बार तालाब में तैयार होंगे मोती
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एटा। जिले में किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्स्य विभाग ने मोती संवर्धन योजना का ट्रायल शुरू किया है। इसके तहत निधौलीकलां ब्लॉक के गांव केसरपुर निवासी बलवीर सिंह के खेत में बने तालाब में जिले की पहली मोती उत्पादन यूनिट स्थापित की जा रही है।
शासन ने फिलहाल जिले में एक यूनिट लगाने का लक्ष्य दिया था। इसके लिए विभाग को दो आवेदन मिले थे जिसमें पात्रता के आधार पर बलवीर सिंह का चयन किया गया।
करीब 1.50 लाख रुपये की लागत से स्थापित होने वाली यूनिट में दो हजार सीपों का पालन किया जाएगा। एक सीप के संवर्धन और रखरखाव पर औसतन 62 रुपये खर्च आएगा।
सीपों की खरीद, उनके भीतर न्यूक्लियस रोपित करने, एंटीबायोटिक उपचार और तालाब के पोषक तत्वों के प्रबंधन की प्रक्रिया शासन से नामित संस्थाओं के माध्यम से कराई जाएगी।
विभाग के अनुसार सीप में मोती तैयार होने में करीब 16 से 18 महीने का समय लगता है।
सीप के भीतर न्यूक्लियस डालने के बाद वह उससे बचाव के लिए नेकर नामक पदार्थ की परतें बनाती है। यही परतें धीरे-धीरे नाभिक के चारों ओर जमा होकर चमकदार मोती का रूप लेती हैं।
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मोती उत्पादन की खास बात यह है कि किसान इसे मछली पालन के साथ भी कर सकते हैं। तालाब के ऊपरी या मध्य हिस्से में नायलॉन की बैग या टोकरियों में सीपों को लटकाकर उनका पालन किया जा सकता है। इससे एक ही तालाब से मछली और मोती दोनों का उत्पादन संभव होगा। संवाद
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शासन ने फिलहाल जिले में एक यूनिट लगाने का लक्ष्य दिया था। इसके लिए विभाग को दो आवेदन मिले थे जिसमें पात्रता के आधार पर बलवीर सिंह का चयन किया गया।
करीब 1.50 लाख रुपये की लागत से स्थापित होने वाली यूनिट में दो हजार सीपों का पालन किया जाएगा। एक सीप के संवर्धन और रखरखाव पर औसतन 62 रुपये खर्च आएगा।
सीपों की खरीद, उनके भीतर न्यूक्लियस रोपित करने, एंटीबायोटिक उपचार और तालाब के पोषक तत्वों के प्रबंधन की प्रक्रिया शासन से नामित संस्थाओं के माध्यम से कराई जाएगी।
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विभाग के अनुसार सीप में मोती तैयार होने में करीब 16 से 18 महीने का समय लगता है।
सीप के भीतर न्यूक्लियस डालने के बाद वह उससे बचाव के लिए नेकर नामक पदार्थ की परतें बनाती है। यही परतें धीरे-धीरे नाभिक के चारों ओर जमा होकर चमकदार मोती का रूप लेती हैं।
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मोती उत्पादन की खास बात यह है कि किसान इसे मछली पालन के साथ भी कर सकते हैं। तालाब के ऊपरी या मध्य हिस्से में नायलॉन की बैग या टोकरियों में सीपों को लटकाकर उनका पालन किया जा सकता है। इससे एक ही तालाब से मछली और मोती दोनों का उत्पादन संभव होगा। संवाद